मदनी के ट्रस्ट भूमि प्रकरण की जांच-पड़ताल शुरू, सीएम धामी ने रिपोर्ट की तलब
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मदनी के ट्रस्ट भूमि प्रकरण की जांच-पड़ताल शुरू, सीएम धामी ने रिपोर्ट की तलब

कांग्रेस सरकार ने देवबंद की तरह विशाल मुस्लिम शिक्षण संस्थान (मुस्लिम यूनिवर्सिटी) खोलने की दी थी अनुमति? सुरक्षा कारणों से आईएमए की आपत्ति ने रोकी राह।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो
Feb 9, 2026, 04:33 pm IST
inभारत, उत्तराखंड
Uttarakhand land jihad

महमूद असद मदनी

देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) की सुरक्षा को ताक में रख कर इस्लामिक संस्था द्वारा कृषि भूमि को बिना लैंड यूज़ कराए बेच दिए जाने का मामला चर्चा में है। उक्त प्रकरण शेखुल हिंद एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट से जुड़ा है। इस ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ महमूद असद मदनी हैं। जोकि दारुल उलूम देवबंद और जमीयत उलेमा ए हिंद के नेता और राज्यसभा सदस्य भी रहे हैं। मामला सुर्खियों में आने के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ने गृह सचिव शैलेश बगौली के जरिए जिला प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है।

डीएम सविन बंसल ने बताया कि एसडीएम विकास नगर विनोद कुमार को इस भूमि प्रकरण पर जांच रिपोर्ट मांगी गई है प्रारंभिक रिर्पोट के अनुसार महमूद असद मदनी के शेखुल हिन्द ट्रस्ट द्वारा खरीदी गयी भूमि की जांच के दौरान यह तथ्य प्रकाश में आया है कि ट्रस्ट द्वारा 15 व्यक्तियों को बड़े भूखण्ड के रूप में जमीन बेची गई है। इन 15 ने अन्य 70-80 लोगों को छोटे-छोटे टुकड़ों में जमीन बेच दी। इस प्रकरण में नोटिस देने के साथ ही पूरी जमीन को सरकार में निहित करने की कार्यवाही अमल में लायी जा रही है।

क्या था प्रकरण

नारायण दत्त तिवारी की कांग्रेस सरकार ने शेखुल एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट जिसका पता 1 बहादुर शाह जफर मार्ग दिल्ली बताया गया है , उक्त ट्रस्ट को भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून के पास इस्लामिक शिक्षण संस्थान खोले जाने की प्रारंभिक अनुमति दी थी। इसके अध्यक्ष डा महमूद असद मदनी हैं।

बताया जाता है कि ट्रस्ट यहां देवबंद दारुल उलूम की तरह विशाल मदरसा अथवा मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने जा रहा था, जिसके लिए ट्रस्ट द्वारा 20 एकड़ भूमि ग्राम हरियावाला धौलास पछुवा दून परगना विकासनगर देहरादून में धारित भूमि किसानों से ली गई थी और साथ ही कुछ और ग्राम समाज और वन विभाग की सरकारी विभागों की भूमि पर भी कथित रूप से कब्जा किया गया था।

आईएमए की आपत्ति

जानकारी के अनुसार इंडियन मिलिट्री एकेडमी (आईएमए) को जब यहां उक्त इस्लामिक शिक्षण संस्थान खोले जाने के प्रयासों की जानकारी मिली तो उनके द्वारा उत्तराखंड की तत्कालीन कांग्रेस की तिवारी सरकार के समक्ष आपत्ति दर्ज की गई। जिसके बाद इस योजना पर कई माह तक रोक लगी रही।

कांग्रेस सरकार के बाद आई बीजेपी सरकार के समय ये मामला ठंडे बस्ते में रहा। इसके बाद जब पुनः कांग्रेस की सरकार आई तो एक बार फिर से यहां इस्लामिक शिक्षण संस्थान खोले जाने के लिए हलचल तेज हुई।

ट्रस्ट के अध्यक्ष महमूद हसन मदनी द्वारा मामला उत्तराखंड उच्च न्यायालय में ले जाया गया जोकि कई माह तक चला जहां उन्हें कोई राहत नहीं मिली और इसके पीछे सबसे बड़ी वजह आईएमए की आपत्ति ही रही।

हाई कोर्ट ने इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार को और ट्रस्ट को ये निर्देश दिए थे कि उक्त भूमि का लैंड यूज़ चेंज नहीं किया जाएगा और ये कृषि भूमि ही रहेगी और यदि बेची जाएगी तो भी कृषि भूमि ही रहेगी और इससे जो पैसा आयेगा वो भी ट्रस्ट में सामाजिक कार्यों में लगाया जाएगा।

दरअसल इस निर्देश के पीछे तर्क ये दिया गया था कि आईएमए एक संवेदनशील स्थान है आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से इसके कैंपस के आसपास न तो आबादी की बसावट की जानी चाहिए और न ही व्यापारिक गतिविधियां यहां से संचालित होनी चाहिए। इसकी सीमा भारतीय सैन्य अकादमी के लगी हुई है, जहां अकादमी के कैडेट्स अभ्यास करते हैं।

ट्रस्ट की ओर से हाई कोर्ट में दी गई याचिका संख्या 1918( एम एस)/2007 ट्रस्ट बनाम राज्य व अन्य के निर्देशों के बाद राज्य सरकार के राजस्व विभाग के अपर सचिव जे पी जोशी ने 19 जुलाई 2016 को डीएम देहरादून को पत्र लिख कर कहा कि हाईकोर्ट के द्वारा पारित आदेश 8/6/2010 के अनुपालन में शासनादेश 150/राजस्व/2004/15/3/2004 के संदर्भ में उक्त ट्रस्ट की कृषि भूमि को अकृषि नहीं किया जाएगा।

जानकारी के अनुसार ट्रस्ट ने देहरादून स्थित रईस अहमद नाम के व्यक्ति को पावर ऑफ अटॉर्नी दी हुई थी अब उक्त 20 एकड़ भूमि पर मुस्लिम बस्ती बसाने के लिए सड़क डाल कर और बिजली के खंभे खड़े करके प्लॉटिंग की जा रही है।
जानकारी के मुताबिक हरियाला वाला कि प्रधान रही रजनी देवी ने इस मामले की शिकायत जिला प्रशासन के समक्ष 2016 में कई बार लिखित रूप में भी दर्ज करवाई गई थी। उस समय तो प्रशासनिक दबाव में ये प्रकरण ठंडे बस्ते में पड़ा था किंतु कुछ माह बाद उक्त भूमि को बेचा जाने लगा।

उत्तराखंड के किसानों से ली गई थी जमीन

जानकारी के मुताबिक यहां ट्रस्ट द्वारा इस्लामिक शिक्षण संस्थान खोले जाने के उद्देश्य से वीर सिंह पुंडीर, मंगत राम, कला चंद, हितेंद्र नारायण, महेंद्र सिंह, रणबीर सिंह, लक्ष्मी थापा, कुंती देवी, विक्रम सिंह, बीना ठाकुर, चरण सिंह, सत्येंद्र कुमार, बलवीर सिंह, मदन सिंह, भगवान सिंह, आलोक कुमार, मनजीत सिंह, संदीप कुमार, धर्म सिंह, गुलाब सिंह, रतन देई, जोगेंद्र सिंह आदि से 20 एकड़ कृषि भूमि ली गई थी।

इन मुस्लिमों के नाम हो चुकी है रजिस्ट्री

ट्रस्ट द्वारा रईस अहमद को पावर आफ एटर्नी देकर मुस्लिम समुदाय को भूमि बेची जा रही है। अब तक मंजर आलम, शहजाद अली, आसिफ, ताहिर खान, अमजद अली, मोहम्मद तारिक,साहिल अहमद, मोहम्मद इरशाद, शहजाद अली, सलीम अहमद, नवाब नसीम, मोहम्मद शोएब आदि के नाम भूमि बिक्री के बाद दाखिल खारिज भी हो चुका है। भू दस्तावेजों को देख कर सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि हिंदू किसानों से ली गई भूमि पर मुस्लिम समुदाय की बसावट हो रही है, यानि योजनाबद्ध तरीकों से डेमोग्राफी चेंज की साजिश रची जा रही है तो क्या इसके पीछे दारुल उलूम, जमीयत उलेमा ए हिंद या महमूद मदनी का शेखुल हिंद एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट की कोई योजना काम कर रही है ? ये आईएमए के साथ जुड़ी हुई है। यहां ज्यादातर वो मुस्लिम है जोकि बाहरी राज्यों से आए हुए है। इस बारे में स्थानीय ग्राम सभा के प्रतिनिधियों द्वारा भी जिला प्रशासन को कई शिकायती पत्र भी दिए गए, ऐसी भी जानकारी मिली है कि आई एमए द्वारा भी कई बार प्रशासन को इस बारे में शिकायत दर्ज करवाई गई किन्तु कोई ठोस समाधान नहीं निकला।

टाइगर राजा का बयान

देहरादून में उक्त भूमि को लेकर हैदराबाद के हिंदूवादी नेता टी राजा सिंह जो की गोशामहल हैदराबाद से पांच बार के विधायक रहे हैं का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें उनके द्वारा जमीयत उलेमा हिंद के महमूद मदनी पर खुला आरोप लगाया है कि उनके द्वारा देहरादून में कांग्रेस शासनकाल में ली गई भूमि को बेच दिया गया। उनका वीडियो सोशल मीडिया में सुर्खियां बटोर रहा है।

धामी सरकार करती रही है मुस्लिम यूनिवर्सिटी का विरोध

2022 के विधान सभा चुनावों के दौरान बीजेपी ने कांग्रेस पर देवभूमि उत्तराखंड में मुस्लिम यूनिवर्सिटी खोले जाने पर सवाल उठाए थे और ये मुद्दा सुर्खियों में रहा और जनमानस में गहराया रहा, आज भी कांग्रेस नेता इस पर सफाई देते रहते हैं कि उनकी ऐसी कोई योजना नहीं थी, लेकिन शेखुल हिंद एजुकेशन चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा इस्लामिक शिक्षण संस्थान के लिए खरीदी गई हिंदू किसानों की भूमि इस बात का प्रमाण था कि इस्लामिक धार्मिक नेता डॉ महमूद मदनी और कांग्रेस सरकार के बीच कुछ न कुछ तो इस पर सहमति थी, जिसे भारतीय सैन्य अकादमी प्रबंधन ने आगे बात बढ़ने नहीं दी। उस समय कांग्रेस नेता अकील अहमद ने ये बयान दिया था कि कांग्रेस सरकार आई तो वो मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाएगी। जिस पर कांग्रेस नेताओं की खासी फजीहत हो रही है।

भूमि प्रकरण पर क्या कहते हैं सीएम धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि ये मामला उनके संज्ञान में आया है। यह संवेदनशील विषय है, गृह विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट आने पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। उत्तराखंड की डेमोग्राफी चेंज करने के साजिश कामयाब नहीं होने दी जाएगी।

 

 

Topics: उत्तराखंड समाचारसीएम पुष्कर सिंह धामीआईएमए देहरादूनमहमूद असद मदनीमदनी ट्रस्ट भूमि प्रकरण
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