ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता के बीच देश की मुल्ला सरकार ने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को छोड़ने से इनकार कर दिया है, भले ही अमेरिका की तरफ से दबाव हो या सैन्य धमकी हो। यह बात फरवरी 2026 में ओमान में हुई बातचीत के बीच आई है, जहां दोनों देशों के बीच सालों बाद सीधी-सीधी बातचीत फिर शुरू हुई।
क्या है पूरा मामला
ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। ईरान कहता है कि उसका यूरेनियम संवर्धन शांतिपूर्ण कामों के लिए है, जैसे बिजली बनाना या मेडिकल इस्तेमाल। लेकिन अमेरिका, इजरायल और कुछ पश्चिमी देश इसे संदेह की नजर से देखते हैं और मानते हैं कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है, जिसे ईरान बार-बार नकारता है। सालों से अमेरिकी प्रतिबंध ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ रहे हैं, और ईरान इन्हें हटवाने की कोशिश कर रहा है।
ओमान में हाल की बातचीत
फरवरी 2026 की शुरुआत में, ओमान की राजधानी मस्कट में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर शुरू हुई। यह कई सालों बाद पहली ऐसी बैठक थी। पिछली बार ऐसी कोशिशें इसलिए रुकी थीं क्योंकि जून 2025 में इजरायल के साथ ईरान के बीच 12 दिन का संघर्ष हुआ था, जिसमें अमेरिका ने भी ईरान के कुछ न्यूक्लियर साइट्स पर हमला किया था।
इस बार की बातचीत में अमेरिकी तरफ से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर जैसे लोग शामिल थे। ईरानी तरफ से विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हिस्सा लिया। ओमान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इसे “आगे बढ़ने वाला कदम” बताया, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत को “बहुत अच्छी” कहा। ईरान की मांग है कि अमेरिका उसके ऊपर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाए। बदले में ईरान कुछ विश्वास बढ़ाने वाले कदम उठाने को तैयार है, लेकिन न्यूक्लियर प्रोग्राम पर पूरी तरह समझौता नहीं करेगा।
ईरान का रुख
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने 8 फरवरी 2026 को तेहरान में एक सार्वजनिक फोरम में साफ कहा कि यूरेनियम संवर्धन को छोड़ना उनके लिए नामुमकिन है। उन्होंने कहा, “हम इतना जोर क्यों देते हैं संवर्धन पर और इसे छोड़ने से इनकार क्यों करते हैं, भले ही हम पर युद्ध थोप दिया जाए? क्योंकि किसी को भी हमारे व्यवहार पर फैसला करने का हक नहीं है।”
अराघची ने अमेरिकी सैन्य तैनाती, जैसे USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप को लेकर कहा कि यह उन्हें डराता नहीं है। उन्होंने अमेरिका पर भरोसा कम होने की बात कही और कहा कि अमेरिका की तरफ से प्रतिबंध जारी रखना और सैन्य कार्रवाई से शक पैदा होता है कि वो बातचीत को कितनी गंभीरता से ले रहा है।
ईरान का कहना है कि संवर्धन उसका “अविभाज्य अधिकार” है और इसे अपनी जमीन पर जारी रखना चाहता है। वो “शून्य संवर्धन” की अमेरिकी मांग कभी नहीं मानेगा। हालांकि, वो संवर्धन के स्तर, शुद्धता या अन्य व्यवस्थाओं पर बात करने को तैयार है, लेकिन प्रोग्राम पूरी तरह बंद नहीं करेगा। अराघची ने कहा कि ईरान का “परमाणु बम” असल में महाशक्तियों से “नहीं” कहने की ताकत है, न कि हथियार।
अमेरिका की तरफ से कदम
बातचीत के बाद अमेरिका ने ईरान से जुड़े कुछ शिपिंग फर्म्स और जहाजों पर नए प्रतिबंध लगाए, साथ ही ईरान के तेल कारोबार करने वाले देशों पर टैरिफ बढ़ाए। अमेरिका “शांति ताकत से” की नीति पर जोर दे रहा है। ईरान ने इन सबके बावजूद कहा कि वो बातचीत जारी रखने के संकेतों को देख रहा है और फैसला उसी के आधार पर लेगा।














