भुवनेश्वर: ओडिशा सरकार ने सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित हिंदी फीचर फिल्म ‘गोदान’ को राज्यभर में कर-मुक्त घोषित किया है। यह घोषणा मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी ने गुरुवार को फिल्म के प्रीमियर शो में शामिल होने के बाद की। सरकार के इस निर्णय का उद्देश्य समाजोपयोगी और मूल्य-आधारित सिनेमा को प्रोत्साहन देना है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘गोदान’ एक पारिवारिक फिल्म है, जिसमें गहरा सामाजिक संदेश निहित है। उन्होंने बताया कि यह फिल्म भारतीय परंपराओं और सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों को सशक्त रूप से प्रस्तुत करती है। फिल्म नैतिकता, सांस्कृतिक चेतना और पारिवारिक मूल्यों को उजागर करती है, जो आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह फिल्म माता-पिता और बच्चों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करने तथा नैतिक जीवन शैली को अपनाने की प्रेरणा देती है। मुख्यमंत्री माझी ने समाज पर सिनेमा के प्रभाव को रेखांकित करते हुए कहा कि फिल्में सामाजिक चेतना फैलाने और सांस्कृतिक समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में, जब पारंपरिक मूल्य धीरे-धीरे कमजोर हो रहे हैं, ‘गोदान’ जैसी अर्थपूर्ण और मूल्य-आधारित फिल्में विशेष रूप से युवाओं में सकारात्मक सोच विकसित कर सकती हैं।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर यह भी घोषणा की कि राज्य सरकार शीघ्र ही ओडिशा में एक गौ अनुसंधान केंद्र की स्थापना करेगी। उन्होंने बताया कि यह केंद्र देशी गौवंश के संरक्षण, अनुसंधान और उनसे जुड़ी पारंपरिक पद्धतियों पर कार्य करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा, “गोदान के प्रीमियर को देखने के बाद मुझे लगा कि यह फिल्म पूरे राज्य में कर-मुक्त किए जाने की हकदार है। इसके साथ ही, हम ओडिशा में अनुसंधान केंद्रों की स्थापना भी करेंगे।”
उन्होंने युवाओं और परिवारों से अपील की कि वे इस फिल्म को सामूहिक रूप से देखें और समाजोपयोगी सिनेमा को समर्थन दें, जो भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और नैतिक आदर्शों को आगे बढ़ाता है। मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि ‘गोदान’ को ओडिशा के दर्शकों से व्यापक सराहना मिलेगी। फिल्म के प्रीमियर कार्यक्रम में खान एवं इस्पात मंत्री श्री बिभूति भूषण जेना, फिल्म के निर्देशक एवं निर्माता श्री विनोद कुमार चौधरी, कई विधायक तथा अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। इस अवसर पर फिल्म निर्माता विनोद कुमार चौधरी ने कहा कि गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जो वैदिक काल से भारतीय जीवन का आधार रही है। उन्होंने चिंता जताई कि आज की युवा पीढ़ी गौ माता के महत्व को धीरे-धीरे भूलती जा रही है। उन्होंने बताया कि फिल्म ‘गोदान’ में पंचगव्य की अवधारणा और उसके पांच परिवर्तनकारी प्रभावों को प्रमुखता से दर्शाया गया है, तथा इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत कर परंपरा और आधुनिकता के बीच सेतु बनाने का प्रयास किया गया है।

















