सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि अगर कोई शादीशुदा महिला किसी दूसरे आदमी के साथ शारीरिक संबंध बनाती है, तो बाद में वो ये दावा नहीं कर सकती कि वो झूठे शादी के वादे के कारण ऐसा हुआ था और इसलिए बलात्कार हुआ। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में महिला खुद शादी करने के लायक नहीं होती क्योंकि उसकी पहले से शादी है। इसलिए शादी का कोई वादा कानूनी तौर पर मान्य या अमल में लाने लायक नहीं होता।
ये फैसला एक वकील के खिलाफ दर्ज केस को खारिज करते हुए आया। एक महिला वकील ने आरोप लगाया था कि आरोपी वकील ने उसे शादी का झूठा वादा करके कई बार बलात्कार किया। लेकिन कोर्ट ने जांच के बाद कहा कि ये एक क्लासिक केस है जहां सहमति से चले रिश्ते में बाद में झगड़ा हो गया।
कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भूयान की बेंच ने कहा कि अगर मान भी लें कि आरोपी ने शादी का वादा किया था, तो भी वो वादा कानूनी रूप से लागू नहीं हो सकता। वजह ये कि महिला पहले से शादीशुदा थी। हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 की धारा 5 के सब-क्लॉज (i) के मुताबिक, अगर किसी का जीवित पति या पत्नी है तो दूसरी शादी नहीं हो सकती। इसलिए आरोपी के वादे का कोई कानूनी आधार नहीं बनता।
कोर्ट ने आगे कहा कि आजकल बलात्कार के कानून का दुरुपयोग हो रहा है। जब रिश्ता सहमति से शुरू होता है और बाद में खराब हो जाता है, तो उसे बलात्कार का नाम देना ठीक नहीं। अदालतों को असली बलात्कार के केस पहचानने में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए और बलात्कार के जरूरी तत्वों को ध्यान से देखना चाहिए।
क्या है पूरा मामला
मामला छत्तीसगढ़ का लगता है जहां आरोपी एक वकील था और शिकायतकर्ता भी महिला वकील थी। दोनों के बीच रिश्ता चला, शारीरिक संबंध बने, लेकिन बाद में बात बिगड़ गई। महिला ने FIR दर्ज कराई जिसमें बलात्कार का आरोप लगाया गया, वो भी झूठे शादी के वादे के आधार पर। हाई कोर्ट ने आरोपी की याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पूरी क्रिमिनल प्रोसीडिंग्स को क्वाश (खारिज) कर दिया।
कोर्ट ने साफ कहा कि ये सहमति वाला रिश्ता था जो बाद में कड़वा हो गया। महिला खुद पढ़ी-लिखी, वकील और पहले से शादीशुदा थी, इसलिए शादी का वादा करके धोखा देने वाली बात बनती ही नहीं।
पुराने फैसलों का दिया हवाला
कोर्ट ने पुराने फैसलों का हवाला देते हुए दोहराया कि सिर्फ वादा तोड़ना बलात्कार नहीं बनता। बलात्कार तभी माना जाता है जब शुरू से ही धोखे की नीयत हो और वादा सिर्फ सेक्स के लिए इस्तेमाल किया गया हो। लेकिन यहां महिला की शादी बरकरार थी, इसलिए कोई दूसरी शादी संभव ही नहीं थी। ऐसे में सहमति को झूठा बताना मुश्किल है।















