Jagannath Temple: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पुरी में पितृ अनुष्ठान किए, श्री जगन्नाथ मंदिर में की पूजा-अर्चना
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Jagannath Temple: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पुरी में पितृ अनुष्ठान किए, श्री जगन्नाथ मंदिर में की पूजा-अर्चना

राष्ट्रपति ने सर्वप्रथम श्वेतगंगा में पारंपरिक पिंडदान विधि संपन्न की। यह स्थल पितृ कर्मों से जुड़ा एक पवित्र तीर्थ माना जाता है।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Feb 5, 2026, 09:01 am IST
inओडिशा

भुवनेश्वर। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने 2 फरवरी से शुरू हुई अपनी ओडिशा यात्रा के तीसरे दिन बुधवार को पुरी में पितृ अनुष्ठान संपन्न किए और विश्वप्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इसके पश्चात उन्होंने मयूरभंज जिले के रायरंगपुर में कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया, जिससे केंद्र सरकार की समावेशी विकास और जनजातीय कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट हुई।

पुरी पहुंचने पर राष्ट्रपति ने सर्वप्रथम श्वेतगंगा में पारंपरिक पिंडदान विधि संपन्न की। यह स्थल पितृ कर्मों से जुड़ा एक पवित्र तीर्थ माना जाता है। हिंदू परंपरा में पिंडदान को पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इस अनुष्ठान के बाद राष्ट्रपति ने 12वीं शताब्दी के श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए। यह मंदिर चार धामों में से एक है और देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है।

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मंदिर दर्शन के दौरान राष्ट्रपति के साथ ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपटि तथा मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भी उपस्थित रहे। दर्शन के उपरांत श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन की ओर से राष्ट्रपति को पारंपरिक खंडुआ रेशमी वस्त्र और ओडिशा की प्रसिद्ध लोककला पट्टचित्र भेंट कर सम्मानित किया गया। पट्टचित्र में भगवान विष्णु के दशावतार को दर्शाया गया था, जिसके केंद्र में भगवान जगन्नाथ विराजमान थे। यह भेंट ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत का प्रतीक रही।

राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मंदिर में सामान्य श्रद्धालुओं के लिए दर्शन प्रातः 10 बजे तक स्थगित रखा गया, ताकि सुरक्षा व्यवस्था और मंदिर की नियमित परंपरागत नीतियों, जिनमें गोपाल वल्लभ भोग भी शामिल है, का सुचारु रूप से पालन किया जा सके। पूरे दौरे के दौरान मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था सख्त रही।

पुरी में अपने कार्यक्रम पूरे करने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर से अपने गृह जिले मयूरभंज के रायरंगपुर के लिए रवाना हुईं। वहां वे अगले तीन दिनों तक विभिन्न आधिकारिक कार्यक्रमों में भाग लेंगी।

रायरंगपुर में विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास
दिन के दूसरे चरण में राष्ट्रपति ने रायरंगपुर में महाराजा श्रीराम चंद्र भंज देव विश्वविद्यालय के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) परिसर का उद्घाटन किया और कई प्रमुख आधारभूत तथा सामाजिक विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इनमें आयुष अस्पताल-सह-आयुर्वेदिक कॉलेज, ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी परिसर, तीरंदाजी केंद्र, नगर सौंदर्यीकरण एवं जल निकासी उन्नयन परियोजनाएं, सभागार एवं सांस्कृतिक केंद्र, बालिका छात्रावास तथा नशामुक्ति केंद्र शामिल हैं।

इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत सरकार की ‘पूर्वोदय’ दृष्टि के तहत पूर्वी भारत के विकास को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है और ओडिशा, विशेषकर मयूरभंज जिला, इस दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण लाभ प्राप्त कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये नई संस्थाएं और परियोजनाएं क्षेत्रीय विकास को गति देंगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करेंगी।

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राष्ट्रपति ने जनजातीय समुदायों के आर्थिक और सामाजिक उत्थान के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने प्रधानमंत्री वन धन योजना के अंतर्गत 90 से अधिक लघु वनोपजों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था, जनजातीय स्वयं सहायता समूहों को सूक्ष्म ऋण सहायता तथा जनजातीय महिला सशक्तिकरण योजना के तहत अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने जैसी पहलों का उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य, शिक्षा, संपर्क और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में भी जनजातीय बहुल क्षेत्रों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। प्रधानमंत्री-जनमन योजना के माध्यम से विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूहों के कल्याण, दूरदराज के क्षेत्रों में विद्युतीकरण तथा 4जी इंटरनेट कनेक्टिविटी के विस्तार से जनजातीय इलाकों में समग्र विकास को गति मिली है।

समावेशी विकास पर जोर देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि समाज के सबसे कमजोर वर्गों का उत्थान जनजातीय समुदायों के विकास के बिना संभव नहीं है। उन्होंने लोगों से सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने और उनके प्रति जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। अपने संबोधन के समापन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को सरकार और नागरिकों के सामूहिक प्रयासों से ही साकार किया जा सकता है, जहां स्थानीय विकास राज्य और राष्ट्रीय प्रगति की मजबूत नींव बनेगा।

 

Topics: Pitru Ritualsपितृ अनुष्ठानPresident Draupadi Murmuराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मूपिंडदानJagannath TempleOdishaPind Daanपुरी
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