शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया की रिहाई पर पंजाब की राजनीति में नया विवाद जुड़ गया है। असल में आय से अधिक संपति के मामले में कल सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले सात महीनों से जेल में बंद मजीठिया को जमानत दे दी। जमानत से पहले डेरा ब्यास के संचालक बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों नाभा जेल में बंद मजीठिया से मिले और उनको निरपराध बताया।
संयोग से बाबा गुरिंदर सिंह व मजीठिया की मुलाकात के कुछ समय बाद ही सर्वोच्च न्यायालय ने मजीठिया को जमानत दे दी और आज मजीठिया जेल से बाहर आ गए। इस पर आम आदमी पार्टी के नेतृत्व में चल रही पंजाब सरकार के मुख्यमंत्री ने अपने एक्स हैंडल पर ऐसी विवादित टिप्पणी की जिससे न केवल राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया बल्कि डेरा श्रद्धालुओं में मुख्यमंत्री के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश पैदा हो गया।
डेरा श्रद्धालुओं की राज्य में अच्छी खासी संख्या होने के कारण आम आदमी पार्टी को इसका खामियाजा भुगतने की बात कही जा रही है। भगवंत मान ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा
‘कल बण जाण चाहे अज्ज बण जाण।
अदालतां दा ओत्थे रब्ब राखा।
जित्थे मुलाकाती ही जज बण जाण।’
मजीठिया की रिहाई से पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान की एक्स (ट्वीटर) पर की पोस्ट से विवाद और बढ़ गया है, जिससे डेरा बनाम भगवंत मान की स्थिति बन गई है। डेरा व्यास का पंजाब के मालवा, दोआबा और माझा तीनों क्षेत्रों में प्रभाव है। अब यह टकराव 2027 के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकता है।
ਕੱਲ੍ਹ ਬਣ ਜਾਣ ਭਾਵੇਂ ਅੱਜ ਬਣ ਜਾਣ
ਅਦਾਲਤਾਂ ਦਾ ਓਥੇ ਰੱਬ ਰਾਖਾ
ਜਿੱਥੇ ਮੁਲਾਕਾਤੀ ਹੀ ਜੱਜ ਬਣ ਜਾਣ …— Bhagwant Mann (@BhagwantMann) February 3, 2026
डेरा प्रमुख का बयान, जिससे सरकार को लगी मिर्ची
2 फरवरी को डेरा राधा स्वामी सत्संग ब्यास के प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने नाभा जेल में शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया से मुलाकात के बाद खुलकर उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मजीठिया के खिलाफ सभी आरोप झूठे हैं। उन्होंने कहा कि मजीठिया मेरे दोस्त हैं और रिश्तेदार हैं। इसलिए मैं उनसे मिलूंगा।
आप मजीठिया की गिरफ्तारी को बताती है सबसे बड़ी उपलब्धि
आम आदमी पार्टी मजीठिया को जेल में बंद करने को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानती रही है। पंजाब से लेकर गुजरात तक पार्टी मंचों से कहती रही कि जिनका नाम लेने से भी लोग डरते थे, उन्हें हमने जेल भेज दिया। डेरा प्रमुख ने जब कहा कि मजीठिया के खिलाफ झूठे केस दर्ज किए गए, तो आप ने उनके खिलाफ बोलना शुरू कर दिया।
डेरा प्रमुख के बयान के कुछ घंटे बाद मिल गई जमानत
डेरा प्रमुख के बयान के कुछ घंटे बाद ही मजीठिया को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई। अकाली दल में जश्न का माहौल हो गया। उधर, ्र्रक्क ने डेरा प्रमुख पर हमले जारी रखे। मामले ने तब तूल पकड़ा जब सीएम भगवंत मान ने उनका नाम लिखे बिना एक ट्वीट किया और लिखा कि ‘चाहे आज की बात हो या कल की, उन अदालतों का भगवान ही रक्षक है जहां (जेल में) मिलने आने वाले लोग ही खुद ‘जज’ बन जाएं।’ विपक्ष ने इस ट्वीट को सीधे डेरा प्रमुख के साथ जोड़ा क्योंकि उन्होंने मजीठिया पर लगे आरोपों को झूठा बताया था।
शिअद नेता अमरदीप ने पूछा सवाल
अकाली दल के नेता अमरदीप सिंह ने सीएम की पोस्ट पर कहा है कि आज भगवंत मान साहिब ने एक्स (ट्वीटर) पर एक पोस्ट डालकर लिखा कि मुलाकाती जज बन गए। इसके जरिए उन्होंने अपनी निराशा सबके सामने जाहिर की। उन्होंने कहा कि वो मुख्यमंत्री भगवंत मान से पूछना चाहता हैं कि वे मुलाकाती नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य थे। अमरदीप सिंह ने कहा कि आपके वित्त मंत्री हरपाल चीमा, जो खुद वकील हैं, उन्होंने भी यह कहकर फैसला सुना दिया कि सजा होगी। मैं उन्हें कहना चाहता हूं कि केस स्पेशल प्रॉसिक्यूटर के रूप में अपनी हाजिरी जरूर लगवानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। सजा देना अदालतों का काम है। आज सिर्फ न्यायपालिका ही बची हुई है, और आपने उस पर भी कोई कसर नहीं छोड़ी। जिस तरह से इस मामले में मीडिया ट्रायल किए गए हैं, वे सब लोगों के सामने आ चुके हैं।
अति का खुदा से बैर होता है – भाजपा
बीजेपी के नेता प्रितपाल सिह ने सीएम की पोस्ट के बाद कहा कि अति का खुदा से भी बैर होता है। अब आप रब्ब-रूपी आत्माओं की भी नुक्ताचीनी करने लगे हैं। राधा स्वामी सत्संग ब्यास के मुखिया बाबा गुरिंदर सिंह जी करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र हैं। लेकिन आपको कौन समझाए। डेरा की संगत और पंजाब की जनता इस अपमान का जवाब देगी।
‘आप’ का बिगड़ सकता है गणित
डेरा व्यास का पंजाब के तीनों क्षेत्रों में प्रभाव: डेरा व्यास का पंजाब के मालवा, दोआबा और माझा तीनों क्षेत्रों में प्रभाव है। डेरा व्यास के अनुयायी हर सीट पर अच्छी खासी दाताद में हैं, जो कि किसी भी उम्मीदवार की हार जीत के समीकरण को बिगाड़ सकते हैं। ऐसे में सीएम समेत आप नेताओं का डेरा प्रमुख के खिलाफ मोर्चा खोलना आप के लिए घाटे का सौदा हो सकता है।
डेरा संगतों की है जबरदस्त पकड़
मालवा की 40 सीटों पर अनुयायियों की संख्या अधिक: मालवा की 69 सीटों में से लगभग 35 से 40 सीटों पर डेरा ब्यास के अनुयायियों की संख्या इतनी है कि वे हार-जीत के समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं। इनमें से करीब 15-20 सीटें ऐसी हैं, जहां डेरा प्रेमियों का वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभाता है। पटियाला और संगरूर में डेरे के बड़े सत्संग घर हैं। पटियाला शहरी, पटियाला ग्रामीण, नाभा और संगरूर जैसी सीटों पर इनकी अच्छी पकड़ है। लुधियाना में औद्योगिक शहर होने के कारण यहां हिंदू और सिख दोनों समुदायों में डेरा ब्यास के लाखों अनुयायी हैं। लुधियाना की लगभग सभी शहरी 9 सीटों पर इनका प्रभाव है। बठिंडा और मानसा में डेरा सच्चा सौदा का प्रभाव पारंपरिक रूप से अधिक रहा है, लेकिन पिछले एक दशक में डेरा ब्यास के अनुयायियों की संख्या यहां भी तेजी से बढ़ी है। मोगा और फरीदकोट में डेरा ब्यास की संगत काफी संगठित है।
माझा और दोआबा में भी डेरा व्यास का प्रभाव: माझा की 25 में से कम से कम 18-20 सीटों पर और दोआबा की 23 सीटों में से 10-12 सीटों पर डेरा ब्यास के अनुयायी इतने संगठित हैं कि वे किसी भी पार्टी का पलड़ा हलका या भारी कर सकते हैं।

















