बीजेपी के मनोनीत सांसद सी सदानंदन मास्टर ने राज्यसभा में सोमवार (2 फरवरी) को अपने कृत्रिम पैरों को मेज पर रख लोकतंत्र की दुहाई दे रहे सीपीएम की क्रूरता की कहानी सुनाई। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलते हुए बीजेपी नेता ने 31 वर्ष पूर्व हुए जानलेवा हमले का जिक्र करते हुए कहा, “जो लोग आज संसद में लोकतंत्र की दुहाई दे रहे हैं, उन्होंने 31 साल पहले मुझ पर हमला किया था। इन पार्टियों की प्रतिबद्धता लोकतांत्रिक मूल्यों में नहीं, बल्कि राजनीतिक हिंसा में है।”
दोनों पैर काटने के बाद इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाए
उन्होंने तीन दशक पुरानी घटना को याद करते हुए कहा कि 1994 में वह अपने चाचा के साथ अपनी बहन की शादी की बात करके घर वापस लौट रहे थे, तभी सीपीएम के कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया और उनके साथ मारपीट की। फिर जमीन पर गिराकर उनके दोनों पैर काट दिए और इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाए। उस समय उनकी उम्र 30 वर्ष थी।
बीजेपी सांसद ने आगे कहा कि सीपीएम समर्थकों ने उनके साथ ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े हुए थे। इस हमले में उनके पैर घुटने के नीचे से काटे गए थे, जिसे दोबारा जोड़ा नहीं जा सकता था। यही वजह है कि आज उन्हें कृत्रिम पैरों के सहारे चलना पड़ रहा है। अपने भाषण में सी सदानंदन मास्टर ने यह भी कहा कि राजनीतिक हिंसा किसी भी लोकतंत्र के लिए अच्छी नहीं है। यह देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचाती है।
सीपीएम सांसद जॉन ब्रिट्टस ने जताई आपत्ति
राज्यसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर जब सी सदानंदन मास्टर ने अपने कृत्रिम पैर मेज पर रखकर बोलना शुरू तो केरल के सीपीएम सांसद जॉन ब्रिट्टस ने नियमों का हवाला देते हुए सदन में कृत्रिम अंग दिखाने पर आपत्ति जताई। इसको लेकर सभापति सी पी राधाकृष्णन ने कहा कि सदानंदन मास्टर यह बता रहे हैं कि उन्हें आखिर बैठकर क्यों बोलना पड़ रहा है?
सी सदानंदन मास्टर कौन हैं?
राजनीतिक हिंसा के प्रतीक रहे बीजेपी नेता सी सदानंदन मास्टर केरल के कन्नूर से हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव रहा है। उन्होंने 1999 से पेरमंगलम के श्री दुर्गा विलासम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में सामाजिक विज्ञान पढ़ाया है। उन्होंने गुवाहाटी विश्वविद्यालय से बी.कॉम और कालीकट विश्वविद्यालय से बी.एड की डिग्री प्राप्त की है। अध्यापन के अलावा वह केरल में राष्ट्रीय शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष और इसके प्रकाशन देशीय अध्यापक वार्ता के संपादक भी हैं। यही नहीं उनका परिवार भी केरल में शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय रहा है। उनकी पत्नी वनिता रानी सदानंदन भी एक शिक्षक हैं। बेटी यमुना भारती बी.टेक की छात्रा हैं। बताया जाता है कि सदानंदन पैर कटने के बाद भी किसी से नहीं डरे और अपने कृत्रिम पैरों के सहारे उन्होंने शिक्षा व सामाजिक सेवा में सक्रिय भूमिका निभाई।

















