भुवनेश्वर। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने रविवार को केंद्रीय बजट 2026–27 को विकासोन्मुख, समावेशी और दूरदर्शी बताते हुए कहा कि यह बजट युवा सशक्तिकरण, बुनियादी ढांचे के विकास और संतुलित सामाजिक-आर्थिक प्रगति पर विशेष जोर देता है। माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके प्रावधान ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को तेजी से आगे बढ़ाएंगे।
सोनपुर दौरे पर गये मुख्यमंत्री माझी ने जिला मुख्यालय सोनपुर में आयोजित एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि यह बजट समाज के सभी वर्गों के विकास पर केंद्रित है, जिसमें युवाओं, किसानों, ग्रामीण परिवारों और उभरते आर्थिक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने इसे “वास्तविक युवा शक्ति बजट” करार देते हुए कहा कि कौशल विकास, रोजगार क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए युवाओं को तैयार करने पर इसमें विशेष फोकस किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का लगातार नौवां केंद्रीय बजट है और इसमें अस्पष्ट वादों के बजाय स्पष्ट कार्ययोजना, ठोस क्रियान्वयन और मापनीय परिणामों पर जोर दिया गया है। “यह बजट सुधारों की निरंतरता और कार्यान्वयन के लिए स्पष्ट रोडमैप को दर्शाता है। इससे युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे,” उन्होंने कहा। मुख्यमंत्री माझी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा अब तक लागू किए गए 350 से अधिक संरचनात्मक सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारत के आर्थिक इतिहास में एक दुर्लभ उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों के चलते वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद देश में आर्थिक स्थिरता, सतत विकास और नियंत्रित महंगाई सुनिश्चित हुई है। केंद्रीय बजट 2026–27 में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान इसी सुधार-आधारित दृष्टिकोण को और मजबूती प्रदान करता है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
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मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस बजट में ओडिशा को विशेष महत्व दिया गया है। बजट की प्रमुख घोषणाओं में ओडिशा में एक समर्पित ‘रेयर अर्थ कॉरिडोर’ की स्थापना शामिल है। यह कॉरिडोर महत्वपूर्ण खनिजों के खनन, प्रसंस्करण, अनुसंधान और विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ावा देगा, आयात पर निर्भरता घटाएगा और स्थानीय उद्योगों को सशक्त करेगा। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स और अक्षय ऊर्जा जैसे उच्च तकनीकी क्षेत्रों को भी समर्थन मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि बजट में पूर्वी तट विकास कॉरिडोर (ईस्ट कोस्ट डेवलपमेंट कॉरिडोर) की परिकल्पना की गई है, जिससे ओडिशा को उसकी रणनीतिक तटीय स्थिति और आर्थिक कनेक्टिविटी के कारण विशेष लाभ होगा। ‘पूर्वोदय’ पहल के तहत बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश—इन पांच पूर्वी राज्यों में प्रमुख पर्यटन स्थलों का विकास किया जाएगा। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने और सतत गतिशीलता को बढ़ावा देने के लिए 4,000 इलेक्ट्रिक बसें भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
आंतरिक जल परिवहन के विस्तार को ओडिशा के लिए एक और बड़ी उपलब्धि बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले पांच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग परिचालन में आएंगे, जिनमें पहले चरण में राष्ट्रीय जलमार्ग-5 (एनडब्ल्यू-5) को लागू किया जाएगा। एनडब्ल्यू-5, खनिज-समृद्ध तालचेर और अंगुल क्षेत्रों को पारादीप और धामरा जैसे प्रमुख औद्योगिक व बंदरगाह हब से जोड़ेगा। इससे माल ढुलाई अधिक किफायती और कुशल होगी, सड़क और रेल नेटवर्क पर दबाव कम होगा तथा पूर्वी तट पर एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक केंद्र के रूप में ओडिशा की भूमिका और मजबूत होगी। मुख्यमंत्री ने ‘सिटी इकोनॉमिक रीजन’ (सीईआर) की शुरुआत का भी स्वागत किया, जिसे शहरी-आधारित समेकित आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की एक नई पहल बताया गया है। इस योजना के तहत अगले पांच वर्षों में प्रत्येक सीईआर के लिए 5,000 करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव है। ये क्षेत्र बुनियादी ढांचे, सेवाओं और निवेश संपर्कों को मजबूत करते हुए समन्वित शहरी विकास क्षेत्र के रूप में कार्य करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल भुवनेश्वर–कटक–पारादीप–पुरी शहरी कॉरिडोर को प्रभावी रूप से क्रियान्वित करने में सहायक होगी।
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पर्यावरण और पर्यटन के क्षेत्र में बजट की प्राथमिकताओं पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीव पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित पहलें ओडिशा के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। नई योजना के तहत ओडिशा, कर्नाटक और केरल में प्रमुख कछुआ अंडा देने वाले स्थलों के निकट ‘टर्टल ट्रेल्स’ विकसित किए जाएंगे। यह प्रकृति-आधारित पर्यटन मॉडल पर्यावरण-अनुकूल अवसंरचना, पर्यावरण जागरूकता और स्थानीय समुदायों के लिए सतत आजीविका को प्रोत्साहित करेगा।
ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में सुधार को मुख्यमंत्री ने एक ऐतिहासिक कदम बताया। नव-प्रस्तावित ‘विकसित भारत–रोजगार गारंटी एवं आजीविका (ग्रामीण)’ योजना के तहत ग्रामीण परिवारों के लिए वैधानिक रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। इस योजना में केंद्र और राज्य के बीच 60:40 का साझेदारी अनुपात रहेगा। वर्ष 2026–27 के लिए कुल अनुमानित आवश्यकता 1.51 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र का हिस्सा 95,692 करोड़ रुपये होगा। सुचारु संक्रमण सुनिश्चित करने के लिए बजट में निवर्तमान मनरेगा और नई योजना—दोनों के लिए अलग-अलग आवंटन किया गया है।
कृषि क्षेत्र पर बजट के फोकस का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा जैसे तटीय राज्यों को उच्च-मूल्य कृषि को बढ़ावा देने वाली योजनाओं से विशेष लाभ मिलेगा। नारियल, काजू और चंदन जैसी फसलों के लिए विशेष योजनाएं घोषित की गई हैं। नारियल उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए एक समर्पित ‘नारियल प्रोत्साहन योजना’ लाई गई है, जिसके तहत पुराने और कम उपज देने वाले पेड़ों के स्थान पर उच्च उत्पादक किस्मों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी।
मुख्यमंत्री ने ‘नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन’ का भी उल्लेख किया, जिसके तहत लिथियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सात वर्षों में 34,300 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इस मिशन में मूल्य श्रृंखला विकास, नए रेयर अर्थ कॉरिडोर और कोयला गैसीकरण के लिए प्रोत्साहन शामिल हैं, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक आधार को सुदृढ़ करेंगे। मुख्यमंत्री ने उन प्रमुख केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं की भी जानकारी दी जिनमें इस बजट में बढ़ा हुआ आवंटन किया गया है। इनमें कृषि विकास योजना, जल जीवन मिशन, समग्र शिक्षा, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी एवं ग्रामीण), राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन शामिल हैं। इसके अतिरिक्त पीएम-किसान, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना और प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना जैसी प्रमुख केंद्रीय क्षेत्र योजनाओं में भी अधिक आवंटन किया गया है। बजट में कई नई पहलें भी शामिल हैं, जैसे पीएम सेतु, एलाइड हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स योजना, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सहायता, बायोफार्मा मिशन, केमिकल पार्क, इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड और एमएसएमई ग्रोथ फंड।
मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार औद्योगिक विकास को गति देने के लिए 16 प्राथमिक क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। सभी जिलों मंा उद्योगों को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाई जा रही है। उन्होंने बताया कि बलांगीर, कालाहांडी और सुबर्णपुर जैसे कपास उत्पादक जिलों में वस्त्र इकाइयों की स्थापना पर विशेष जोर दिया जा रहा है। “जिस जिले में जिस उद्योग की संभावना है, उसी जिले में उसी उद्योग को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि क्षेत्रीय संतुलन के साथ विकास सुनिश्चित हो सके,” उन्होंने कहा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्रीय बजट 2026–27 के प्रावधान समृद्ध ओडिशा और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। “हर दृष्टि से यह एक ऐतिहासिक बजट है, जो समावेशी, सतत और दीर्घकालिक विकास की मजबूत नींव रखता है,” उन्होंने कहा।

















