क्या हम यह कल्पना कर सकते हैं कि ब्रिटेन में अस्पतालों में भी सहायता के लिए मुक्ति मंत्री भी होते होंगे? दरअसल इस शब्द का हिन्दी भाषांतरित शब्द मुझे मिला नहीं तो लिखा नहीं। परंतु इसकी व्याख्या ऐसे व्यक्ति के रूप में की जा सकती है, जो झाड़फूँक करता हो।
एक ऐसा ही मामला टेलीग्राफ ने रिपोर्ट किया है। यह एक ऐसे हॉस्पाइस अर्थात मृत्यु के निकट पहुंचे हुए व्यक्तियों की सेवा करने वाले विशेष अस्पताल के विषय में है, जहां पर पहले बच्चों का अस्पताल था, और लोगों का कहना था कि उस अस्पताल में उन्होनें लाल ड्रेस में एक बच्ची को देखा है। नॉरविच में एक रिलीजियस अस्पताल (hospice) में काम करने वाले लोगों ने महसूस किया कि वार्ड्स में एक छोटी बच्ची लाल ड्रेस में घूमती रहती है।
और सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा, एनएचएस ने इसके लिए मुक्ति मंत्री से अनुरोध किया कि वे आएं और जो शापित शैतान आत्मा है, उससे उन्हें मुक्ति दिलाएं। मुक्ति मंत्री का अर्थ आम तौर पर एक्सॉसिस्ट अर्थात झाड़फूँक करने वालों के रूप में लिया जाता है। इन्हें एनएचएस वालों ने बुलाया और आग्रह किया कि वे पवित्र तेल के प्रयोग के साथ उस स्पिरिट को भगाएं।
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वेटिकन में विशेष होते हैं एक्सॉसिस्ट पाठ्यक्रम
यह हमने पहले भी लिखा था कि वेटिकन में एक्सॉसिस्ट के विशेष पाठ्यक्रम आयोजित किये जाते हैं और ये वर्ष 2005 से लगातार चल रहे हैं। वेटिकन के जो देशा निर्देश हैं उनके अनुसार मानसिक रोगों में एक्सॉर्सिस्ट डॉक्टर्स के साथ काम कर सकते हैं। इस पाठ्यक्रम का नाम है “झाड़-फूंक और मुक्ति की प्रार्थना की मिनिस्ट्री पर कोर्स”।
यहाँ पर विभिन्न स्थानों से लोग प्रशिक्षित होने आते हैं और फिर वापस जाकर एक्सॉर्सिज्म का काम करते हैं। हाल ही की कई रिपोर्ट्स ऐसी आई हैं, जो यह बताती हैं कि ब्रिटेन में एक्सॉर्सिज्म की मांग बढ़ रही हैं। इस मांग के कई कारण हैं। यह भी कहा जाता है कि वर्ष 1970 में आई फिल्म एक्सॉर्सिस्ट के आने के बाद झाड़फूँक और भी अधिक तेज गति से लोकप्रिय हुआ। हालांकि उससे पहले भी विच अर्थात चुड़ैल वाला विचार लोकप्रिय था ही। यह फिल्म एक बच्ची की कहानी है, जिसपर शैतान का साया होता है।
इस अस्पताल में काम करने वाले कर्मियों का कहना था कि उन्होंने यहाँ पर एक छोटी बच्ची को देखा था, जो लाल कपड़े पहने हुए थी। टेलीग्राफ ने वर्ष 2023 में भेजे गए वे ईमेल देखे, जिनमें नॉरविच के डाइअसस से यह अनुरोध किया गया था कि वे अपनी डिलिव्रन्स टीम के साथ उनकी मदद करें। चूंकि यह अस्पताल ऐसे स्थान पर है, जहां पर वर्ष 1975 तक जेनी लिंद चिल्ड्रन’स हॉस्पिटल हुआ करता था, और अस्पताल के एक सूत्र ने कहा कि कुछ कर्मियों का यह मानना है कि यह अस्पताल “स्पिरिट्स” से शापित है।
टेलीग्राफ के अनुसार एक विश्वसनीय प्रवक्ता ने उन्हें बताया कि इन घटनाओं के बाद उस बिल्डिंग की ब्लेसिंग की गई थी। हालांकि यह नहीं बताया कि डिलिव्रन्स मिनिस्टर कभी भी वहाँ गए थे। उसके बाद वह अस्पताल और कहीं हस्तांतरित हो गया और अब वह इमारत बंद है।
ब्रिटेन में एनएचएस और चर्च और इंग्लैंड की डिलिव्रन्स मिनिस्ट्री के बीच संबंध
टेलीग्राफ के अनुसार यह घटना एनएचएस और डिलिव्रन्स मिनिस्ट्री के बीच अल्पज्ञात संबंधों को बताती है। चर्च ऑफ इंग्लैंड में एक्सॉर्सिज़म का ऐतिहासिक अध्ययन लिखने वाले डॉक्टर फ्रांसिस यंग के अनुसार, ऐतिहासिक रूप से चर्च एक्सॉर्सिज़म को शी नहीं समझता था, मगर वर्ष 1971 में द एक्सॉर्सिस्ट के प्रकाशन और 1973 में फिल्म के आने के बाद वे पैरनोर्मल गतिविधियों में विश्वास रखने लगा।
और 1974 की एक घटना के बाद कैन्टरबरी के तत्कालीन आर्कबिशप ने एक्सॉर्सिज़म के लिए कड़े दिशानिर्देश जारी कर दिए थे। और यह कहा गया था कि एक्सॉर्सिज़म करने के लिए डॉक्टर्स और मनोवैज्ञानिकों की सहायता लेनी चाहिए। डेलीमेल के अनुसार डॉक्टर्स की सलाह लेनी चाहिए और ऐसी भी अफवाह थी कि एक्सॉर्सिज़म कम से कम प्रचार के साथ करना चाहिए।
वर्ष 2023 में नेशनल सेकुलर सोसाइटी ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें यह चिंता जताई गई थी कि चर्च ऑफ इंग्लैंड स्पिरिचुअल एब्यूज को कानूनी जामा पहना रहा है। इसमें लिखा था कि वर्ष 2011 तक चर्च ऑफ इंग्लैंड में 44 एक्सॉर्सिस्ट थे। चर्च के वर्ष 2023 के दिशानिर्देश अभिभावकों को यह अनुमति देते हैं कि वे अपने बच्चों के लिए डिलिव्रन्स के औपचारिक रिवाज कर सकते हैं, और जिनमें स्पर्श भी सम्मिलित हैं। शैतानों को बाहर निकालने के लिए स्पर्श आवश्यक है। इस रिपोर्ट में लिखा है कि पहले किसी बच्चे को यह बताना कि उसमें कोई शैतान है और फिर प्रीस्ट द्वारा उसे छूकर भगाने की बात करना, बाल शोषण ही है।
और इसमें यह भी है कि ये दिशानिर्देश यह भी कहते हैं कि 16-17 वर्ष के अधिकतर मामलों में अभिभावकों की अनुमति भी लेनी आवश्यक नहीं है। चिकित्सीय सलाह ली जानी चाहिए, परंतु बहुत अधिक आवश्यकता नहीं है, बस स्थानीय बिशप की अनुमति आवश्यक है। इस रिपोर्ट में कई ऐसे मामलों का उल्लेख है, जिसमें अभी भी विच का आरोप लगाकर इलाज किया गया। इसमें कहा गया है कि आज के समय में एक्सॉर्सिज़म चर्च का नहीं बल्कि कहानियों का किस्सा होना चाहिए। परंतु टेलीग्राफ में प्रकाशित यह घटना और हाल ही की कई और रिपोर्ट्स जैसे कि वर्ष 2025 में गार्डियन में प्रकाशित एक रिपोर्ट जिसमें कई बच्चों के जीवन के हवाले से यह लिखा गया था कि इंग्लैंड में हजारों बच्चे पिछले दशक में मत आधारित शोषण से पीड़ित रहे और इसमें कई बच्चों की कहानी के साथ Victoria Climbié की मौत की भी कहानी थी, जिसकी हत्या चुड़ैल होने के संदेह पर कर दी गई थी।
टेलीग्राफ द्वारा इस घटना की रिपोर्ट के बाद एक बार फिर से यह बहस तेज हो रही है कि एनएचएस को एक्सॉर्सिसम जैसे विचारों में जाना चाहिए?











