मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया है कि मतदाता सूचियों का स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) अब बाकी राज्यों में भी जल्द ही शुरू हो जाएगा। ये बात उन्होंने शनिवार को कही, जब चुनाव आयोग के स्थापना दिवस और राष्ट्रीय मतदाता दिवस की पूर्व संध्या पर उन्होंने वीडियो के जरिए लोगों से बात की।
शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद
ज्ञानेश कुमार ने साफ कहा कि शुद्ध चुनावी रोल यानी मतदाता सूची लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव है। इसी मकसद से चुनाव आयोग ने SIR शुरू किया है। इसका सीधा-सीधा उद्देश्य ये है कि हर वो व्यक्ति जिसका नाम होना चाहिए, वो सूची में शामिल हो जाए और जिनका नाम नहीं होना चाहिए – जैसे अयोग्य या मृतक वगैरह – उन्हें हटा दिया जाए। कुमार ने जोर देकर कहा कि साफ-सुथरी मतदाता सूची के बिना अच्छे चुनाव नहीं हो सकते।
अभी 12 राज्यों में चल रहा एसआईआऱ
फिलहाल SIR का काम 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अच्छे से चल रहा है। कुमार ने बताया कि ये अभियान सुचारू रूप से आगे बढ़ रहा है। खास तौर पर बिहार का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां SIR का काम पूरा हो चुका है और ये बहुत सफल रहा। बिहार में अंतिम मतदाता सूची के खिलाफ एक भी अपील नहीं आई। इसका मतलब है कि लोग इसकी साफदिली और भरोसेमंदी से संतुष्ट हैं।
बिहार में मिले शानदार नतीजे
बिहार में SIR की सफलता का असर चुनाव में भी दिखा। वहां हाल के चुनाव में 1951 के बाद सबसे ज्यादा मतदान हुआ – कुल 67.13 प्रतिशत। खास बात ये कि महिलाओं ने रिकॉर्ड तोड़ भागीदारी की, जो कि 71.78 प्रतिशत रही। कुमार ने इसे SIR की कामयाबी का सबसे बड़ा सबूत बताया। उन्होंने कहा, “बिहार में कोई अपील न आने से इसकी पवित्रता और विश्वसनीयता साबित हो गई है।”
बाकी राज्यों में कब शुरू होगा?
मुख्य चुनाव आयुक्त ने आगे कहा, “ये (SIR) जल्द ही बाकी राज्यों में भी लागू कर दिया जाएगा।” हालांकि कोई ठीक तारीख नहीं बताई गई, लेकिन ये संकेत है कि काम तेजी से फैलने वाला है। इसके साथ ही उन्होंने युवा मतदाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवाओं को गलत सूचना, अफवाहों और फर्जी खबरों के खिलाफ आगे आना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि वे चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग की योजनाओं के बारे में पूरी तरह जागरूक रहें। उन्होंने युवाओं को आगे बढ़कर सच फैलाने और लोकतंत्र को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी।
चुनाव आयोग 25 जनवरी 1950 को बना था – गणतंत्र दिवस से ठीक एक दिन पहले। पिछले 16 साल से ये दिन राष्ट्रीय मतदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर CEC ने चुनाव आयोग की उपलब्धियों और नए-नए कदमों का भी जिक्र किया।

















