अमृतसर में काउंटर इंटेलिजेंस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। डीजीपी पंजाब गौरव यादव के अनुसार, एक इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन के तहत काउंटर इंटेलिजेंस अमृतसर की टीम ने अवैध हथियारों की तस्करी करने वाले एक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से तीन विदेशी निर्मित पिस्तौल और जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।
डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए आरोपी विदेश में बैठे कुख्यात गैंगस्टरों के निर्देशों पर काम कर रहे थे। ये आरोपी किसी बड़ी आपराधिक वारदात को अंजाम देने की फिराक में थे। समय रहते की गई इस कार्रवाई से एक गंभीर घटना को टाल दिया गया है। डीजीपी ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ अमृतसर में मामला दर्ज कर लिया गया है। फिलहाल पुलिस द्वारा आगे की जांच की जा रही है, ताकि इस हथियार तस्करी नेटवर्क की पूरी सप्लाई चेन का पता लगाया जा सके। साथ ही इस नेटवर्क से जुड़े आगे और पीछे के लिंक, तथा किसी भी संभावित सीमा पार संबंधों की गहनता से जांच की जा रही है।
उन्होंने कहा कि आगामी गणतंत्र दिवस को देखते हुए पंजाब पुलिस पूरी तरह सतर्क है और राज्य की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। संवेदनशील अवसरों को ध्यान में रखते हुए खुफिया तंत्र को और मजबूत किया गया है। डीजीपी गौरव यादव ने दोहराया कि पंजाब पुलिस संगठित अपराध, गैंगस्टर नेटवर्क और अवैध हथियारों की तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि राज्य में शांति, कानून व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पंजाब पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इस दिशा में ऐसे ऑपरेशन लगातार जारी रहेंगे।
गैंगवार असल में सीमापार संचालित षड्यंत्र
दूसरी ओर पंजाब पुलिस द्वारा गुंडा तत्वों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन ‘प्रहार’ के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ में यह बात सामने आई है कि पंजाब के कई जिलों में हाल के महीनों में हुई हत्याएं और फिरौती की काल्स सीधे विदेशी नंबरों और एन्क्रिप्टेड ऐप्स से नियंत्रित की जा रही थीं। कुछ मामलों में निर्देश पाकिस्तान और कनाडा से मिल रहे थे, जिससे साफ हो गया है कि यह केवल गैंगवार नहीं बल्कि सीमा पार संचालित संगठित आपराधिक नेटवर्क है।
गैंगस्टरों की सूची तैयार, निर्णायक कार्रवाई शुरू
इसी इनपुट के आधार पर पंजाब पुलिस ने 61 सबसे खतरनाक गैंगस्टरों की सूची तैयार कर उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। उधर गणतंत्र दिवस को लेकर पंजाब पुलिस ने पूरे राज्य में हाईअलर्ट जारी किया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक गैंग्स्टरों के खिलाफ ऑपरेशन प्रहार लगातार जारी रहेगा। वहीं गणतंत्र दिवस को देखते हुए पूरे राज्य में विशेष नाके लगाए जाएंगे। उधर पुलिस ने गैंग्स्टरों को अलग अलग कैटेगरी में डाला है। पुलिस ने एक सूची तैयार की है किस देश में कितने गैंग्स्टर सक्रिय है।
सक्रिय गैंगस्टरों को कैटेगरी में बांटा
अधिकारियों के मुताबिक अमेरिका 18, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) 9, कनाडा जर्मनी में 6 – 6, यूनाइटेड किंगडम व यूरोप, 5, आस्ट्रेलिया, पुर्तगाल में 3-3 थाईलैंड, मलेशिया में 2-2, पाकिस्तान, इटली, ब्राजील, इंडोनेशिया में 1 – 1 – 1 – 1 गैंग्स्टर सक्रिय है। पुलिस का कहना है कि इन सभी के खिलाफ सबूत, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रेल और हिरासत में लिए गए सहयोगियों की गवाही के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ेगी। परेशन प्रहार जारी रहेगा, और लक्ष्य है विदेश में बैठे सरगनाओं तक सीधे पहुंचना और उनके पूरे नेटवर्क को तोडऩा।
ए- कैटेगरी गैंगस्टर-आतंकी
- गोल्डी बराड़ (कनाडा) – सिद्धू मूसेवाला केस से जुड़ा नाम, विदेश से शूटर और फंडिंग कंट्रोल करता रहा है।
- हरविंदर रिंदा (पाकिस्तान) – आतंकी मॉड्यूल से जुड़ा, पंजाब में हमलों के लिए निर्देश भेजने का आरोप।
- रोहित गोदारा (यूरोप) – बराड़-गोदारा नेटवर्क का ऑपरेटर, फिरौती और धमकी कॉल्स का संचालन।
- अर्श डाला (कनाडा) – खालिस्तानी आतंकी संगठनों से लिंक, टारगेट किलिंग मॉड्यूल से जुड़ा।
- लखबीर लांडा (कनाडा) – रिंदा-लांडा नेटवर्क का हिस्सा, जबरन वसूली के मामलों से जुड़ा।
- अमृत बाठ (कनाडा) – हथियार और लॉजिस्टिक सपोर्ट से जुड़े मामलों में वांछित।
अन्य प्रमुख नाम
- डोनी बल – बंबीहा गिरोह से जुड़ा, हाल की हिंसक घटनाओं में नाम सामने आया।
- लकी पटियाल – बंबीहा नेटवर्क का विदेशी संचालक, कई हाई-प्रोफाइल मामलों से जुड़ा।
- अमृत दालम – जग्गू भगवानपुरिया गैंग का प्रमुख हैंडलर, खाड़ी देशों से नेटवर्क चलाने का आरोप।
- अंकुश बहमन – ऑस्ट्रेलिया से संचालित मॉड्यूल, फिरौती और हथियार मामलों से जुड़ा।
- जैसल (गुरदेव सिंह) – अमेरिका से नेटवर्क, जबरन वसूली और गैंग सपोर्ट के आरोप।
- जंटा (गुरजंट सिंह) – ऑस्ट्रेलिया से कॉल ऑपरेशन, फिरौती और धमकी मामलों से जुड़ा।
- अमरजीत खब्बे राजपूत – यूरोप से हैंडलिंग, बंबीहा-डोनी नेटवर्क का कॉल ऑपरेटर।
- अमन घोटा वाला – यूएई से लॉजिस्टिक सपोर्ट, कई गिरोहों से संपर्क।
- अजयपाल उर्फ डैनी – एनडीपीएस और गैंग फंडिंग के लिंक, यूएई में छिपे होने की आशंका।
- हैप्पी जट्ट – ड्रग और कॉल मॉड्यूल से जुड़ा, कई मामलों में वांछित।
- हैरी च_ा – विदेश से ऑपरेटिंग हैंडलर, कई गैंगों के साथ गठजोड़।
- गोपी – फाइनेंसर और लोकल कड़ी, हवाला नेटवर्क से लिंक।
- दलबीर बीरा – हथियार सपोर्ट और सेफ-हाउस से जुड़ा नाम।
- जवंदा – काल रूटिंग और धमकी मैसेजिंग से जुड़ा।
- गोल्डी ढिल्लों – लोकल मॉड्यूल का समन्वय, फिरौती मामलों से जुड़ा।
- गुल्लू – शूटर नेटवर्क की सप्लाई चेन से जुड़ा।
- हैरी बाक्सर – गैंग ट्रेनिंग और फंड कलेक्शन में भूमिका।
- हुसान – सोशल मीडिया पर धमकी और जिम्मेदारी लेने वाले अकाउंट्स से लिंक।
- जिंदी – हथियार ट्रांजिट और ड्राइवर नेटवर्क।
- जर्मनजीत मल्ही – यूरोप से कॉल-रूटिंग सपोर्ट।
- जोबन मल्ही – फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट चैनल।
- बिल्ला – शूटरों की मूवमेंट और सेफ-हाउस।
- करणवीर – लोकल फंड कलेक्शन और कैश मूवमेंट।
- कोमल (जर्मनी) – विदेश से कॉल ऑपरेशन।
- कुणाल महाजन – हवाला और डिजिटल वॉलेट लिंक।
- लड्डी भजल – धमकी कॉल्स और मीडिया अकाउंट्स।
- मनिंदर बिल्ला – लोकल नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स।
- मनप्रीत मुन्ना – हथियार सप्लाई चैन।
- मोहब्बत सिंह – ड्राइवर और मूवमेंट सपोर्ट।
- जैसी – सेफ-हाउस और शरण देने के आरोप।
- आरजू बिश्नोई – डिजिटल कम्युनिकेशन हैंडलर।
- निशान जौरियन – कॉल ट्रैक बदलने की तकनीकी मदद।
- पवित्तर – लोकल कलेक्टर।
- प्रभ दासूवाल – सोशल मीडिया और धमकी वीडियो।
- राजन भगत – फंड मूवमेंट।
- सोनू खत्री – सेफ-हाउस।
- राज जवंदा – अंतर-गिरोह समन्वय।
- रणदीप मलिक – ड्राइवर नेटवर्क।
- रितिक रैली – डिजिटल पेमेंट।
- सनी ख्वाजके – हथियार ट्रांजिट।
- जीवन फौजी – सुरक्षा और मूवमेंट।
- सत्ता – लोकल आपरेटर।
- शमशेर शीरा – गैंग सपोर्ट।
- शुभम लोनकर – आनलाइन धमकी।
- मोनू गुर्जर – फाइनेंस और कैश।
- नोनी – सेफ-हाउस।
- विक्की सत्तेवाला – लोकल कड़ी।
- चांदी – हथियार सप्लाई।
- यादविंदर यादा – शूटर लिंक।
बैकफुट पर आप सरकार
राज्य में बढ़ रही गैंगस्टरों की गतिविधियों के चलते राज्य सरकार बैकफुट पर है और इसी कारण पुलिस को इस दिशा में सक्रिय किया गया है। वर्तमान सरकार गैंगस्टरवाद के चलते न केवल विपक्ष बल्कि सिविल सोसाइटी•ा व सामाजिक संगठनों की भी आलोचना का शिकार हो रही है।
















