'समरस समाज ही शक्तिशाली राष्ट्र की नींव'
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होम भारत छत्तीसगढ़

‘समरस समाज ही शक्तिशाली राष्ट्र की नींव’

छत्तीसगढ़ के बोड़ला (कबीरधाम) में छह दिवसीय हिंदू संगम आयोजित हुआ। इसका समापन मौनी अमावस्या को हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री रामदत्त चक्रधर ने कहा कि हिंदू समाज को जाति और पंथ के बंधनों से ऊपर उठकर राष्ट्र की एकता के लिए कार्य करना होगा

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jan 23, 2026, 11:44 am IST
inछत्तीसगढ़
हिन्दू संगम के समापन कार्यक्रम में उपस्थित हर अंचल से आए हिंदू

हिन्दू संगम के समापन कार्यक्रम में उपस्थित हर अंचल से आए हिंदू

गत दिनों छत्तीसगढ़ के बोड़ला (कबीरधाम) में छह दिवसीय हिंदू संगम आयोजित हुआ। इसका समापन मौनी अमावस्या (18 जनवरी) को हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री रामदत्त चक्रधर ने कहा कि हिंदू समाज को जाति और पंथ के बंधनों से ऊपर उठकर राष्ट्र की एकता के लिए कार्य करना होगा। जब हम संगठित होते हैं, तो दुनिया हमारी ओर सम्मान से देखती है।

स्वदेशी, स्वावलंबन और पारिवारिक संस्कार ही हमारे समाज के असली कवच हैं। उन्होंने कहा कि यहां उपस्थित माताओं-बहनों और युवाओं का उत्साह बताता है कि भारत अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है। हिंदू समाज की एकता ही राष्ट्र की अखंडता का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब-जब हिंदू संगठित हुआ है, भारत ने विश्व पटल पर गौरव प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि समाज में ऊंच-नीच का कोई स्थान नहीं होना चाहिए, क्योंकि समरस समाज ही एक शक्तिशाली राष्ट्र की नींव रख सकता है।

संघ शताब्दी वर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्वयंसेवकों और समाज के उत्तरदायित्वों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य केवल संगठन बनाना नहीं, बल्कि समाज को संगठित करना है। उन्होंने स्व यानी स्वदेशी, स्वावलंबन और स्व-भाषा पर जोर देते हुए कहा कि आज भारत हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहा है और दुनिया में अग्रसर है। उन्होंने पाश्चात्य संस्कृति की चकाचौंध को छोड़ अपनी मूल सनातन परंपराओं की ओर लौटने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में चंद्रशेखर वर्मा ने हिंदू संगम आयोजन के उद्देश्यों और इसकी विस्तृत रूपरेखा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का मूल लक्ष्य समाज को अपनी जड़ों से जोड़ना और सांस्कृतिक गौरव को वापस लाना है। युवाओं को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि अपनी ऊर्जा का उपयोग समाज को संगठित करने और सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए करना चाहिए। इस अवसर पर प्रांत संघचालक डॉ. टोपलाल वर्मा, सर्व समाज के समाज प्रमुखों सहित बड़ी संख्या में सनातनी उपस्थित रहे।

Topics: संघ शताब्दी वर्षकबीरधामहिंदू संगमबोड़लाजाति और पंथस्वदेशी और स्वावलंबनRSSसामाजिक समरसतारामदत्त चक्रधरराष्ट्र की एकता
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