Mount Abu: राजस्थान का ये हिल स्टेशन... मनाली- शिमला से भी सुंदर
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Mount Abu: राजस्थान का ये हिल स्टेशन… मनाली- शिमला से भी सुंदर

देश और दुनिया से बड़ी तादाद में पर्यटक माउंट आबू की सैर के लिए आते हैं। इसे राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन भी कहा जाता है।

Written byLalit FularaLalit Fulara
Jan 22, 2026, 08:46 am IST
inयात्रा

Mount Abu Rajasthan: राजस्थान में भी एक हिल स्टेशन है जो कि शिमला और मनाली से भी सुंदर कहा जाता है। यह हिल स्टेशन है माउंट आबू। देश और दुनिया से बड़ी तादाद में पर्यटक माउंट आबू की सैर के लिए आते हैं। इसे राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन भी कहा जाता है। इस जगह पर पर्यटकों को प्रकृति के सुंदर नजारे देखने को मिलते हैं। आइए इस हिल स्टेशन के बारे में जानते हैं..

माउंट आबू में पर्यटक एडवेंचर्स एक्टिविटी कर सकते है। यह जगह जैन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। पर्यटक यहां धार्मिक यात्रा भी कर सकते हैं और मंदिरों के दर्शन के साथ ही प्रकृति का आनंद ले सकते हैं। इस हिल स्टेशन की सबसे ऊंची चोटी गुरु शिखर चोटी है। टूरिस्ट इस चोटी से माउंट आबू के नजारे देख सकते हैं।

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मंदिरों में दर्शन के साथ ही ट्रैकिंग-कैंपिंग का आनंद ले सकते हैं पर्यटक
माउंट आबू में पर्यटक रॉक क्लाइम्बिंग का आनंद ले सकते हैं। साथ ही ट्रैकिंग और कैंपिंग भी कर सकते हैं। इस हिल स्टेशन में बड़ी संख्या में मंदिर हैं। पर्यटक यहां मंदिरों में दर्शन कर सकते हैं। इस जगह का काफी धार्मिक महत्व है और आप पर्यटक यहां अध्यात्म के साथ पर्यटन का लुत्फ उठा सकते हैं। शिमला और मनाली की तरह ही माउंट आबू का वातावरण भी एकदम शांत है। यह जगह प्रकृति की गोद में बसी है। पर्यटकों के लिए इस जगह पर घूमने के लिए बहुत सारे डेस्टिनेशन हैं।

इसे भी पढ़ें-9 महीने कोहरे से घिरी रहती है ये जगह, शिमला-मनाली से भी है सुंदर; एक बार जरूर घूमिये 

पर्यटक माउंट आबू में नक्की झील की सैर कर सकते हैं। यह मानव निर्मित झील है। इस झील को भारत की पहली मानव निर्मित झील का श्रेय जाता है। झील में पर्यटक बोटिंग भी कर सकते हैं। यहां की  गुरु शिखर पर्वत चोटी काफी प्रसिद्ध है। यह माउंट आबू का सबसे ऊंचा पर्वत है। 300 सीढ़ियां चढ़कर इस पर्वत तक पहुंचा जाता है। यहां पर्यटक गुरु दत्तात्रेय के मंदिर के दर्शन कर सकते हैं। माउंट आबू  धार्मिक मान्यता और मनरोम दृश्यों दोनों कारणों से प्रसिद्ध है।

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Lalit Fulara
Lalit Fulara
उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के सुदूर स्थित छोटे से गाँव 'पटास' में पैदाइश. कला-साहित्य में विशेष रुचि. पहला नॉवेल 'घासी: लाल कैंपस का भगवाधारी' प्रकाशित. विगत 12 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय. करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से हुई और उसके बाद ज़ी न्यूज़, न्यूज़18, राजस्थान पत्रिका, अमर उजाला और इंडियाडॉटकॉम होते हुए वर्तमान में पांचजन्य डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. पत्रकारिता में एम.ए माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के नोएडा कैंपस से किया है. [Read more]
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