मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने दिल्ली में चल रहे लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन पर भारतीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (IICDEM) 2026 में बिहार के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) की सफलता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अंतिम इलेक्टोरल रोल पब्लिश होने के बाद से कोई भी अपील नहीं आई है। ये कॉन्फ्रेंस 22 जनवरी 2026 को शुरू हुई है, जिसमें 70 देशों के डेलिगेट्स शामिल हैं। इसमें 42 चुनाव प्रबंधन संस्थाओं के टॉप प्रतिनिधि और 27 राजदूत हिस्सा ले रहे हैं।
भारत की भूमिका
ये सम्मेलन लोकतंत्र को मनाने के साथ-साथ आगे की राह, चुनौतियां, मतदाताओं की उम्मीदें और चुनावी प्रक्रिया को और पारदर्शी, स्वतंत्र व निष्पक्ष बनाने पर विचार-विमर्श के लिए है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने विदेशी मेहमानों को बताया कि भारतीय चुनाव दुनिया के सबसे बड़े लॉजिस्टिकल कामों में से एक हैं। इसमें एक अरब से ज्यादा मतदाता हैं, जिनमें से करीब 64 करोड़ लोग वोट डालते हैं। एक मिलियन से ज्यादा मतदान केंद्रों पर यह सब होता है और लगभग 2 करोड़ लोग इसमें काम करते हैं। ये सब मिलाकर एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।
बिहार में SIR की सफलता
ज्ञानेश कुमार ने बिहार में SIR को खासतौर पर फोकस किया। उन्होंने कहा कि अंतिम इलेक्टोरल रोल पब्लिश होने के बाद एक भी अपील नहीं आई। उसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में भी किसी भी मतदान केंद्रों पर पुनर्पोल की जरूरत नहीं पड़ी। उनका कहना था कि “शुद्ध इलेक्टोरल रोल” बहुत जरूरी है, जिसमें कानून के मुताबिक हर योग्य वोटर शामिल हो। ये लोकतंत्र को मजबूत करता है। चुनाव करवाना भी बहुत चुनौतीपूर्ण काम है, क्योंकि इतने सारे लोग चुनाव आयोग के नियमों और निर्देशों का पालन करते हैं। बिहार में दोनों ही हिस्सों – रोल तैयार करना और चुनाव करवाना – पर अच्छा परिणाम मिला।
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अन्य चुनाव आयुक्तों की बात
चुनाव आयुक्त एस एस संधु ने कहा कि नागरिकों का चुनाव प्रबंधन संस्थाओं पर भरोसा बहुत कीमती है और इसे बनाए रखना सबकी जिम्मेदारी है। चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने बताया कि IICDEM-2026 में चुनाव प्रबंधन संस्थाएं, रिसर्चर्स, स्टूडेंट्स और प्रैक्टिशनर्स इकट्ठा हुए हैं, जो अलग-अलग नजरिए से चुनाव देखते हैं और लोकतंत्र व चुनावी मैनेजमेंट से जुड़े हर मुद्दे पर ब्रेनस्टॉर्मिंग करते हैं।
इंटरनेशनल IDEA की तरफ से
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस के सेक्रेटरी जनरल केविन कैसास-जामोरा ने भारत की इंटरनेशनल IDEA की चेयरशिप का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया के साथ शेयर करना चाहिए कि उसने चुनौतियों से कैसे निपटा और “मुक्त व निष्पक्ष चुनाव, कानून का सम्मान, सहिष्णुता, सेकुलरिज्म, प्रेस फ्रीडम” जैसी चीजों की विरासत कैसे बनाई।
उन्होंने 2024 के ग्लोबल चुनावों का जिक्र किया, जब 74 देशों में 1.6 अरब लोगों ने वोट डाला, जिसमें भारत भी शामिल था। लेकिन पिछले 15 सालों की तुलना में ग्लोबल टर्नआउट में करीब 10 प्रतिशत पॉइंट्स की गिरावट आई। लगभग 40% चुनावों में क्रेडिबिलिटी पर कुछ न कुछ विवाद हुआ। कई देशों में पॉलिटिकल पोलराइजेशन, गैरकानूनी फंडिंग, ऑनलाइन-ऑफलाइन हिंसा और डिजिटल मिसइनफॉर्मेशन देखा गया। कुछ नेता अमेरिका, पेरू, जॉर्जिया और बांग्लादेश में “झूठे तर्कों” से क्रेडिबल रिजल्ट्स पर सवाल उठाते हैं। लेकिन पोलैंड, सेनेगल, ग्वाटेमाला और ब्राजील जैसे देशों में चुनावों ने डेमोक्रेटिक बैकस्लाइडिंग को रोका।
कॉन्फ्रेंस का थीम क्या था
IIIDEM के DG राकेश वर्मा ने कहा कि कॉन्फ्रेंस का थीम “इंक्लूसिव, पीसफुल, रेजिलिएंट एंड सस्टेनेबल वर्ल्ड के लिए डेमोक्रेसी” है, जो 21वीं सदी में लोकतंत्र से क्या उम्मीद की जाती है, उसकी व्यापक तस्वीर दिखाता है।

















