निःस्वार्थ बुद्धि और ईमानदारी से देशहित में किया जाने वाला कोई भी कार्य संघ का ही कार्य है : डॉ. मोहन भागवत जी
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निःस्वार्थ बुद्धि और ईमानदारी से देशहित में किया जाने वाला कोई भी कार्य संघ का ही कार्य है : डॉ. मोहन भागवत जी

राजकोट में RSS सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने युवाओं से संवाद में कहा— भारत केवल भूमि नहीं, जीवंत चेतना है। उन्होंने हिंदू स्वभाव, पंच परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण पर दिया स्पष्ट संदेश।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Jan 20, 2026, 02:54 pm IST
in भारत, संघ को जानें, पंच परिवर्तन, संघ @100, गुजरात

राजकोट । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने आज राजकोट के सेवा भारती भवन में सौराष्ट्र-कच्छ की युवा प्रतिभाओं के साथ संवाद किया। सरसंघचालक जी ने कहा कि “जब युवा विभिन्न क्षेत्रों में देश के लिए कार्य करते हैं, तब उनके मन में ‘देश क्या है’ इसकी स्पष्ट कल्पना होनी चाहिए। अतीत में इस स्पष्ट विचार के अभाव या इसके धुंधला पड़ने के कारण ही देश गुलाम बना था। हमारा देश चैतन्यमय है, हम इसे भारत माता कहते हैं; यह केवल भूमि का एक टुकड़ा नहीं है। इसका विभाजन नहीं हो सकता, यह भावना से जुड़ा है”।

संघ स्थापना की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार द्वारा संघ स्थापना से पूर्व किए मंथन का उल्लेख करते हुए संघ की स्थापना की पृष्ठभूमि स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि संघ संपूर्ण हिन्दू समाज को संगठित करने के लक्ष्य के साथ कार्यरत है।

हिन्दू और भारत की अवधारणा

उन्होंने कहा, “जैसे ब्रिटेन में ब्रिटिश और अमेरिका में अमेरिकन रहते हैं, वैसे ही हिन्दुस्तान में रहने वाले ‘हिन्दू’ हैं। भारत और हिन्दुस्तान अलग नहीं, एक ही हैं। भारत एक स्वभाव है और हिन्दू भी एक स्वभाव है। मिल-जुलकर, साथ मिलकर एकता के साथ चलने का स्वभाव ही ‘हिन्दू’ है”।

वसुधैव कुटुंबकम और भारतीय पहचान

उन्होंने कहा कि हमारी भावना ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की रही है। सनातन, भारतीय, इंडिक, आर्य और हिन्दू – ये सभी समान नाम हैं, लेकिन ‘हिन्दू’ शब्द सरल है और आसानी से समझ में आता है।

हिन्दू समाज के विरुद्ध षड्यंत्र और संघ का दृष्टिकोण

आज देश में हिन्दू समाज को आत्म-विस्मृत (अपनी पहचान भुलाने) करने के लिए चल रहे षड्यंत्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हिन्दू आदिकाल से, परंपरा से इस भूमि पर रह रहे हैं और देश को शक्तिशाली व विकसित बनाने की जिम्मेदारी पूरे समाज की है। इसलिए, संपूर्ण हिन्दू समाज को एकजुट कर, गुणवत्ता का निर्माण कर और विश्व कल्याण के लिए देश को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से संघ निरंतर कार्य कर रहा है।

संघ शाखा और स्वयंसेवकों की भूमिका

उन्होंने कहा कि संघ शाखा के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण, श्रेष्ठ और निष्ठावान स्वयंसेवक तैयार करता है। ऐसे स्वयंसेवक समर्पण भाव से समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सेवा कार्य करते हैं। लेकिन इसके अलावा भी संघ का कार्य है। केवल उन्हें देखकर संघ के कार्य का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता। संघ को समझने के लिए संघ में ही आना होगा।

पंच परिवर्तन का विचार

देश का भाग्य बदलने के लिए पूरे समाज की सक्रियता आवश्यक है और समाज में आचरण का परिवर्तन भी जरूरी है। चूंकि सभी लोग शाखा में नहीं आ सकते, इसे ध्यान में रखते हुए संघ ने ‘पंच परिवर्तन’ का विचार प्रस्तुत किया है — सामाजिक समरसता; कुटुंब प्रबोधन; पर्यावरण: पानी बचाएं, प्लास्टिक हटाएं, पेड़ लगाएं; स्व-बोध और स्वदेशी; नागरिक कर्तव्य, इन पांच क्षेत्रों में कोई भी नागरिक छोटे-बड़े कार्य करके देशहित में योगदान दे सकता है।

युवाओं के प्रश्न और संघ को समझने का संदेश

कार्यक्रम के अंत में युवाओं ने संघ और देशहित से संबंधित प्रश्न पूछे। सरसंघचालक जी ने विभिन्न उदाहरणों के साथ युवाओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया। एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि “संघ को जानना है तो विकिपीडिया न पढ़ें, संघ-साहित्य पढ़ें। दूसरों के प्रोपेगेंडा के आधार पर संघ को नहीं समझा जा सकता। यदि आप उत्कृष्ट तरीके से, निःस्वार्थ बुद्धि और ईमानदारी से देशहित में कोई काम करते हैं, तो संघ मानता है कि आप संघ का ही काम कर रहे हैं”।

मातृशक्ति जागरण का संकल्प

कार्यक्रम में मातृशक्ति जागरण का संकल्प व्यक्त किया गया। इस अवसर पर सौराष्ट्र प्रांत के संघचालक मुकेशभाई मलकाण सहित अन्य वरिष्ठ कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

Topics: डॉ. मोहन भागवतRSS Yuva Samvadयुवा संवादBharat is not land but consciousnessवसुधैव कुटुंबकमHindu identity RSSराजकोट समाचारपंच परिवर्तनसंघ विचारRSS सरसंघचालकहिंदू समाजPanch Parivartan RSSराष्ट्र निर्माणMohan Bhagwat Rajkot speech
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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