भारत लगातार अपनी रक्षा तैयारियों को तेजी से मजबूत करता जा रहा है। साथ ही अब हालात ये हो गए हैं कि भारत अब केवल आयातक ही नहीं, रक्षा क्षेत्र का बड़ा निर्यातक बन गया है। इसी क्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नागपुर की एक फैसिलिटी से आर्मेनिया के लिए पिनाका गाइडेड रॉकेट्स की पहली खेप को रवाना किया। ये भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट के लिए काफी अहम कदम है।
पिनाका सिस्टम की खासियत
पिनाका एक मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर है, जो अपनी एक्यूरेसी और लंबी रेंज के लिए जाना जाता है। इसके अलग-अलग वर्जन हैं – कुछ 75 किलोमीटर तक मार कर सकते हैं, और लेटेस्ट ट्रायल वाला वर्जन 120 किलोमीटर तक पहुंच सकता है। ये सिस्टम DRDO ने 1980 के अंत में बनाना शुरू किया था, ताकि रूसी ‘ग्रैड’ जैसे सिस्टम का विकल्प मिल सके। अब ये प्राइवेट कंपनियों के साथ मिलकर बनाया जा रहा है, जैसे टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, सोलर इंडस्ट्रीज, म्युनिशन्स इंडिया लिमिटेड और इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड।
एक्सपोर्ट की डील और डिलीवरी
सितंबर 2022 में भारत और आर्मेनिया के बीच करीब 2000 करोड़ रुपये (लगभग 250 मिलियन डॉलर) की डील हुई थी। इसमें चार पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर बैटरी, एंटी-टैंक रॉकेट्स, गोला-बारूद और दूसरे उपकरण शामिल थे। ये डील गाइडेड रॉकेट्स के साथ प्रिसीजन स्ट्राइक को बेहतर बनाने के लिए थी। पहले अनगाइडेड पिनाका सिस्टम की डिलीवरी जुलाई 2023 से शुरू होकर नवंबर 2024 तक पूरी हुई। अब गाइडेड रॉकेट्स की पहली खेप नागपुर के सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) प्लांट से रवाना हुई है। ये गाइडेड वर्जन ज्यादा सटीक होता है और 70 किलोमीटर से ज्यादा रेंज कवर करता है।
भारत के रक्षा क्षेत्र में बदलाव
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत अब सिर्फ हथियार खरीदने वाला देश नहीं रहा, बल्कि तेजी से एक्सपोर्टर बन रहा है। उन्होंने बताया कि 10 साल पहले डिफेंस एक्सपोर्ट 1000 करोड़ से कम था, जो अब 24,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी तरह घरेलू डिफेंस प्रोडक्शन 2014 में 46,425 करोड़ से बढ़कर अब 1.51 लाख करोड़ रुपये हो गया है। निजी क्षेत्र की बढ़ती हिस्सेदारी इसका बड़ा कारण है।
भारतीय सेना में है शामिल
भारतीय आर्मी ने अप्रैल 2022 में पिनाका Mk-I एनहांस्ड (EPRS) को ट्रायल्स के बाद शामिल किया था। पहले इसकी रेंज 37.5 किलोमीटर थी, जो अब 40 किलोमीटर और 75+ किलोमीटर तक अपग्रेड हो चुकी है। आर्मी अब 120 किलोमीटर रेंज वाले रॉकेट्स को शामिल करने की तैयारी कर रही है – इसके लिए 2500 करोड़ रुपये का प्रपोजल है। दिसंबर 2025 में इनका ट्रायल हो चुका है, और ये मौजूदा लॉन्चर से ही फायर किए जा सकते हैं।
आर्मेनिया के साथ डील
आर्मेनिया ने भारत से पहले भी हथियार लिए हैं। नवंबर 2024 में उसे अकाश मिसाइल शील्ड की पहली बैटरी मिली थी – ये 720 मिलियन डॉलर की डील का हिस्सा है, जिसमें कुल 15 सिस्टम हैं। आर्मेनिया-अजरबैजान बॉर्डर टेंशन के बीच ये डील्स उसके लिए अहम हैं। पिनाका का ये पहला कन्फर्म्ड एक्सपोर्ट है, हालांकि साउथ ईस्ट एशिया और यूरोप (जैसे फ्रांस) के कुछ देशों ने भी इसमें दिलचस्पी दिखाई है। अकाश सिस्टम में भी फिलीपींस, ब्राजील, मिस्र और वियतनाम जैसे देश रुचि रखते हैं।
















