वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो ने पिछले महीने देश छोड़कर निकलने का एक ऑपरेशन पूरा किया। बड़ी बात ये है कि इसमें उनकी मदद अमेरिकी स्पेशल फोर्स के पूर्व वेटरन ने की थी। वे करीब एक साल से छिपकर रह रही थीं, क्योंकि राष्ट्रपति निकोलस मदुरो की सरकार ने उन पर सख्ती बरती हुई थी और वे सार्वजनिक रूप से सक्रिय नहीं हो पा रही थीं।
छिपने की वजह और बैकग्राउंड
मारिया कोरिना माचाडो को पहले से ही सार्वजनिक पद संभालने से रोका गया हुआ था। मदुरो सरकार के खिलाफ उनकी आवाज़ और विरोध के कारण उन्हें खतरे का सामना करना पड़ रहा था। वे लगभग एक साल तक छिपी रहीं। इस दौरान उन्हें अज्ञात स्रोतों से मदद मिलती रही, जिसमें अमेरिका से भी कुछ सपोर्ट की बात उन्होंने पहले कही थी। उनका मकसद था कि वे 2025 का नोबेल पीस प्राइज लेने के लिए नॉर्वे जा सकें, जहां वे परिवार से भी मिलना चाहती थीं।
कैसे हुई फरार
दिसंबर 2025 की शुरुआत में मारिया ने वेनेजुएला के तट से एक छोटी नाव ली। वे कैरेबियन सागर के बीच में एक तय जगह पर पहुंचीं। वहां अमेरिका स्थित एक नागरिक रेस्क्यू ग्रुप ग्रे बुल रेस्क्यू की टीम इंतजार कर रही थी। इस ग्रुप के फाउंडर ब्रायन स्टर्न (जो अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस के पूर्व वेटरन हैं) ने खुद उन्हें रेस्क्यू बोट पर चढ़ाया। पूरा ऑपरेशन करीब 16 घंटे चला। समंदर में लहरें काफी ऊंची थीं, हवा तेज थी, और एक समय GPS, सैटेलाइट फोन और स्टारलिंक एंटीना सब बंद हो गए थे, जिससे वे समंदर में खो गए थे। फिर भी टीम ने उन्हें सुरक्षित निकाला। इस ऑपरेशन को ‘गोल्डन डायनामाइट’ नाम दिया गया था। यह पूरी तरह प्राइवेट था, अनाम डोनर्स ने फंडिंग की, और अमेरिकी मिलिट्री को सिर्फ सूचना दी गई थी, लेकिन कोई ऑफिशियल मदद नहीं ली गई।
वीडियो फुटेज और बातचीत
शुक्रवार को ग्रे बुल रेस्क्यू ने वीडियो जारी किया, जिसमें रात के अंधेरे में मारिया की छोटी नाव से रेस्क्यू बोट पर चढ़ने का सीन है। ब्रायन स्टर्न कहते हैं, “ये वो हैं, ये वो हैं,” फिर “हाय, मारिया। मेरा नाम ब्रायन है। आपसे मिलकर अच्छा लगा। मैं समझ गया।” मारिया जवाब देती हैं, “बहुत गीला और बहुत ठंडा।” बोट पर एक छोटे वीडियो में वे कहती हैं, “मैं मारिया कोरिना मचाडो हूँ। मैं ज़िंदा हूँ। मैं सुरक्षित हूँ और ग्रे बुल की बहुत आभारी हूँ।” मारिया ने ऑपरेशन की डिटेल्स शेयर करने से मना कर दिया है, क्योंकि इससे जुड़े लोगों की सुरक्षा का सवाल है।
डोनाल्ड ट्रंप को सौंपा अपना नोबल
एस्केप के बाद मारिया नॉर्वे पहुंचीं, जहां उन्होंने नोबेल पीस प्राइज लिया। हाल ही में वे अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप से मिलीं और उन्हें अपना नोबेल मेडल (गोल्ड फ्रेम में) गिफ्ट किया। नॉर्वेजियन कमिटी ने साफ किया कि प्राइज खुद ट्रांसफर नहीं हो सकता, लेकिन मेडल गिफ्ट किया जा सकता है। ट्रंप ने इसे स्वीकार किया।














