प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के गुवाहाटी स्थित सरुसजाई स्टेडियम में ‘बागुरुम्बा दोहो 2026’ कार्यक्रम में बड़ी बात कही। उन्होंने बोडो संस्कृति की तारीफ करते हुए कहा बोडो समुदाय के साथ हुए समझौते का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश के लोग विकास और अपनी संस्कृति के विकास पर ध्यान दे रहे हैं।
बागुरुम्बा दोहो क्या है
बागुरुम्बा बोडो का सबसे मशहूर लोक नृत्य है। ये पूरी तरह प्रकृति से जुड़ा हुआ है – इसमें तितलियों की उड़ान, पक्षियों की छलांग और लहरों जैसी मूवमेंट्स दिखती हैं। इस बार के बागुरुम्बा दोहो में लगभग 10,000 कलाकार शामिल हुए। 8,000 से ज्यादा डांसरों ने एक साथ मिलकर कमाल का लयबद्ध नाच किया, जिसमें सिफुंग और खाम जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन गूंज रही थी। पूरा स्टेडियम रंगों और लहरों से भर गया। पीएम ने कहा कि ये महज उत्सव नहीं, बल्कि बोडो समाज की शानदार परंपरा को सम्मान देने और उनके महान लोगों को याद करने का तरीका है। उन्होंने इसे असम की सांस्कृतिक शान बताया।
बोडो समुदाय और शांति समझौता
प्रधानमंत्री ने 2020 के बोडो पीस एग्रीमेंट का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस समझौते के बाद असम में सालों की हिंसा और झगड़े खत्म हो गए। हजारों युवा हथियार छोड़कर मुख्यधारा में आ गए। इससे लोगों का भरोसा लौटा और अब सब विकास व संस्कृति पर फोकस कर रहे हैं। मोदी जी बोले कि बोडो समाज का ये सफर संघर्ष से शांति और प्रगति की तरफ है, जो देश भर के लिए प्रेरणा है।
कांग्रेस पर तंज
कार्यक्रम में पीएम ने कांग्रेस पर कटाक्ष किया। कहा कि कांग्रेस ने कभी असम को अपना नहीं समझा। उनकी सरकारों में असम के साथ उपेक्षा हुई, विकास की बातें कम हुईं और समस्याओं को अनदेखा किया गया। अब हालात बदल चुके हैं। असम तेजी से आगे बढ़ रहा है और केंद्र सरकार बोडो समेत सभी समुदायों की परंपराओं को पूरा सम्मान दे रही है।
असम की संस्कृति
प्रधानमंत्री ने कहा कि असम की पहचान पूरे भारत की शान है। बोडो संस्कृति, बागुरुम्बा नृत्य और बोडोफा उपेंद्रनाथ ब्रह्मा जैसे महान शख्सियतों की विरासत देश के लिए गर्व की बात है। ये आयोजन भारत की सांस्कृतिक विविधता को दिखाता है और अपनी जड़ों को बचाने का शानदार उदाहरण है। मोदी जी ने कलाकारों और आयोजकों की खूब तारीफ की, जिन्होंने इतने बड़े पैमाने पर बोडो संस्कृति को दुनिया के सामने ला दिया।

















