छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर अब साहित्य और संस्कृति का प्रमुख केंद्र बनने जा रही है। 23 से 25 जनवरी 2026 तक नवा रायपुर के अटल नगर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव–2026 का भव्य आयोजन होने जा रहा है। इस महोत्सव का केंद्रीय विचार ‘आदि से अनादि तक’ है, जो भारतीय साहित्य की प्राचीन से लेकर अनंत तक की निरंतर, जीवंत और विकसित होती परंपरा को रेखांकित करता है। यह उत्सव छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को राष्ट्रीय पटल पर सशक्त रूप से प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
उत्सव का शुभारंभ 23 जनवरी को भव्य उद्घाटन समारोह के साथ होगा, जिसमें छत्तीसगढ़ सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, प्रतिष्ठित साहित्यकार और सांस्कृतिक हस्तियां शामिल होंगी। इस दौरान देशभर से नामचीन साहित्यकार, प्रख्यात कवि, कथाकार, विचारक, पत्रकार, रंगकर्मी, कलाकार और साहित्य प्रेमी एक मंच पर जुटेंगे। आयोजकों के अनुसार, अब तक 4000 से अधिक लोगों ने पंजीकरण करा लिया है, और उत्सव में हजारों की संख्या में प्रतिभागी पहुंचने की उम्मीद है।
साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण का है उद्देश्य
रायपुर साहित्य उत्सव–2026 का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना, उसे व्यापक मंच प्रदान करना तथा विभिन्न भारतीय भाषाओं के साहित्यकारों, पाठकों और रचनाकारों को एक साझा संवाद से जोड़ना है। तीन दिनों में साहित्यिक संवाद, विचार-मंथन, समकालीन विषयों पर परिचर्चाएं, कविता पाठ, कथा सत्र, पुस्तक विमोचन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और कला-प्रदर्शन जैसे विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों के माध्यम से न केवल साहित्यिक अभिरुचि को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक विमर्श को नई दिशा भी प्रदान होगी।
इस उत्सव की एक खास विशेषता ओपन माइक सत्र है, जो आम नागरिकों, युवाओं और नवोदित रचनाकारों के लिए खुला मंच साबित होगा। प्रतिभागी अपनी कविता, कहानी, विचार, गीत, नाट्य अंश या अन्य रचनात्मक अभिव्यक्तियों को प्रस्तुत कर सकेंगे। यह सत्र साहित्य, आत्म-अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास को बढ़ावा देने का सशक्त प्रयास है। युवा पीढ़ी को साहित्य, भाषा और संस्कृति से जोड़ने के लिए राज्य के स्कूलों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में उत्सव की जानकारी व्यापक रूप से साझा की जा रही है। स्कूली छात्रों द्वारा लिखित कविताओं और कहानियों वाली पुस्तकों का विमोचन भी उत्सव का हिस्सा होगा।
देश के प्रतिष्ठित पुस्तकों के लगेंगे स्टाल
उत्सव में देश के प्रतिष्ठित प्रकाशन समूहों के पुस्तक स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां पाठकों को हिंदी, छत्तीसगढ़ी सहित विभिन्न भाषाओं और विधाओं की पुस्तकें देखने, समझने और खरीदने का अवसर मिलेगा। यह पुस्तक प्रेमियों के लिए ज्ञानवर्धक और यादगार अनुभव सिद्ध होगा। साथ ही, विख्यात कवियों की उपस्थिति में कवि सम्मेलन का आयोजन भी होगा, जो साहित्य प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा।
आमजन की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आयोजकों ने विशेष व्यवस्था की है। 23, 24 और 25 जनवरी को रायपुर शहर के विभिन्न स्थानों से पुरखौती मुक्तांगन तक निःशुल्क बस सेवा संचालित की जाएगी। कुल 6 प्रमुख रूट्स पर यह सेवा चलेगी, जिससे विद्यार्थी, वरिष्ठ नागरिक, साहित्य प्रेमी और आम नागरिक बिना किसी अतिरिक्त खर्च के उत्सव में शामिल हो सकेंगे। यह पहल अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होगी।
सहभागिता के इच्छुक व्यक्ति आधिकारिक वेबसाइट www.raipursahityautsav.org के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। आयोजकों का कहना है कि यह उत्सव छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा, लोक परंपराओं और साहित्यिक चेतना को नई पीढ़ी से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा। पुरखौती मुक्तांगन में छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और समकालीन साहित्यिक अभिव्यक्तियों का सुंदर संगम देखने को मिलेगा।
रायपुर साहित्य उत्सव–2026 छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय साहित्यिक मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाने की दिशा में निर्णायक कदम है। यह महोत्सव न केवल साहित्यकारों का मिलन बिंदु होगा, बल्कि विचारों, संस्कृति और रचनात्मकता का उत्सव भी साबित होगा। साहित्य प्रेमी इस अवसर को हाथ से न जाने दें और इस तीन दिवसीय साहित्यिक यात्रा का हिस्सा बनें।













