बांग्लादेश में फरवरी 2026 में होने वाले आम चुनाव से पहले स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई है। खासकर हिंदू समुदाय के खिलाफ कट्टरपंथी तत्वों की तरफ से ऐसी बातें और वीडियो सामने आ रहे हैं, जो चिंता बढ़ा रहे हैं। कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं, जिनमें मौलाना और मौलवी हिंदुओं को काफिर बताते हुए उन्हें वोट देने या गैर-मुस्लिम उम्मीदवारों को समर्थन देने से मना कर रहे हैं।
हिन्दुओं को बता रहे हराम
एक वीडियो में एक अज्ञात मौलाना ने साफ कहा कि हिंदू उम्मीदवार या किसी भी गैर-मुस्लिम को वोट देना इस्लाम में हराम है। उन्होंने लोगों से अपील की कि ऐसा समर्थन बिल्कुल न करें। दूसरे वीडियो में एक मौलाना ने हिंदुओं के धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में मंदिर का मतलब सिर्फ तबाही है, मूर्तियां भी तबाही का प्रतीक हैं। आगे उन्होंने कहा कि यहां न कोई हिंदू रह सकता है, न इस्कोन से जुड़े लोग, और दिल्ली के दलालों को यहां से चले जाना चाहिए। ये सभी बातें चुनाव की तैयारी के बीच सामने आई हैं, जहां कट्टरपंथी तत्व हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ जहर फैला रहे हैं।
हाल की हिंसा की घटनाएं
पिछले कुछ समय में हिंदुओं पर कई हमले हुए हैं। एक 25 साल के युवक मिथुन सरकार पर चोरी का आरोप लगाकर भीड़ ने हमला किया, वो बचने के लिए नहर में कूद गए और उनकी मौत हो गई। एक हिंदू कारोबारी मोनी चक्रवर्ती को गोली मार दी गई। कुल मिलाकर हाल के दिनों में 7-8 ऐसी घटनाएं सामने आईं, जहां कट्टरपंथियों ने हिंदुओं की हत्या की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच के 45 दिनों में 15 हिंदुओं की हत्या हुई। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस पर चिंता जताई। प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने कहा कि कट्टरपंथी तत्व हिंदू नागरिकों और कारोबारियों को निशाना बना रहे हैं, जो बहुत चिंताजनक है। भारत ने बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है।
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अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
ब्रिटेन सरकार ने भी बांग्लादेश में हो रही हिंसा की निंदा की और शांतिपूर्ण, विश्वसनीय चुनाव की अपील की। ब्रिटिश संसद के हाउस ऑफ कॉमन्स में कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने कहा कि हिंदुओं की हत्या, घर जलाए जाना और मंदिरों में आग लगाई जा रही है, वो इस स्थिति से स्तब्ध हैं। उन्होंने लेबर सरकार से अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की। साथ ही उन्होंने चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठाए, क्योंकि अवामी लीग जैसी प्रमुख पार्टी को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है, जबकि सर्वे में उसे करीब 30% समर्थन दिखता है। कुछ चरमपंथी तत्व संविधान बदलने के लिए जनमत संग्रह की भी मांग कर रहे हैं।
















