लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में लव जिहाद के आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर रमीज (रमीजुद्दीन नायक उर्फ रमीज मलिक) को लेकर एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं। उसके पीएफआई से संबंधों के बाद अब पता चला है कि वो विश्वविद्यालय को इस्लामिक कन्वर्जन का अड्डा बनाने के मिशन पर था। उसने काजियों और मौलानाओं के साथ मिलकर कन्वर्जन नर्सरी तैयार कर रखी थी। उसके निशाने पर हिन्दू लड़कियां थीं। पुलिस और जांच एजेंसियां इसे एक संगठित नेटवर्क मान रही हैं, जिसे ‘धर्मांतरण नर्सरी’ जैसा बताया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला
इस मामले की शुरुआत 2012 से होती है। रमीज ने अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई 2012 में आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज से की थी। उसी समय से उसने कुछ मौलवियों और काजियों से संपर्क बनाया। वह मुस्लिम लड़कों को प्रभावित करने के लिए हॉस्टल में मीटिंग्स करवाता था। बाद में बस्ती मेडिकल कॉलेज में रेजिडेंट डॉक्टर रहते हुए भी यही काम जारी रखा। लखनऊ के केजीएमयू में आने के बाद उसने यहां भी ऐसे कनेक्शन बढ़ाए। आरोप है कि वह और उसके साथी मौलाना-काजी को हॉस्टल में बुलाते थे, जहां बातचीत और ब्रेनवॉशिंग होती थी।
केजीएमयू में क्या हुआ
रमीज पर मुख्य आरोप है कि उसने हिंदू महिला डॉक्टरों और स्टाफ को टारगेट किया। एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर (28) ने शिकायत की कि रमीज ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए, फिर जबरन धर्म बदलवाने की कोशिश की। जब वह शादी की बात करती तो उसे धमकाया जाता था। जांच में पता चला कि रमीज ने एक और महिला डॉक्टर को भी इसी तरह प्रभावित करने की कोशिश की थी। उसके जूनियर एसोसिएट ने दो हिंदू लड़कियों को निशाना बनाया था। पुलिस के मुताबिक रमीज मोबाइल पर 15 हिंदू लड़कियों (स्टूडेंट्स और प्रोफेसर समेत) से संपर्क में था, जिन्हें धर्म बदलवाने की कोशिश की जा रही थी। ये लड़कियां आगरा, नोएडा और दूसरे जिलों से भी थीं।
पहले से शादीशुदा है रमीज
रमीज की पहली शादी फरवरी 2025 में एक हिंदू महिला डॉक्टर (आगरा की) से हुई थी, जिसका पहले धर्मांतरण कराया गया। यह निकाह पीलीभीत के एक काजी ने कराया था। पुलिस उस काजी और गवाहों की तलाश में है। रमीज के पिता सलीमुद्दीन पर भी आरोप हैं कि उन्होंने चार हिंदू महिलाओं (पंजाब, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और यूपी से) से शादी की, सबका पहले धर्म बदलवाया। सलीमुद्दीन और उनकी दूसरी पत्नी खदीजा को जनवरी में गिरफ्तार किया गया। पुलिस कह रही है कि पिता ने बेटे को भी ऐसे टारगेट दिए थे और लंबे समय से यह काम चल रहा था।
पुलिस कार्रवाई
23 दिसंबर 2025 को चौक कोतवाली में केस दर्ज हुआ – बलात्कार (झूठे शादी के वादे से), जबरन गर्भपात, धमकी और एंटी-कन्वर्जन लॉ की धारा के तहत। रमीज फरार हो गया, दिल्ली, उत्तराखंड और पश्चिमी यूपी में छिपता रहा। उसके बैंक में करोड़ों के ट्रांजेक्शन दिखे, कुछ पैसे पश्चिमी यूपी के एक शख्स को भेजे गए। 9 जनवरी 2026 को उसे लखनऊ से गिरफ्तार किया गया। 50 हजार का इनाम था। उसके माता-पिता, कुछ काजी और साथी भी पकड़े गए। एसटीएफ जांच कर रही है – फॉरेन फंडिंग, आगरा से पुराने ‘इस्लामिक मेडिकोस’ ग्रुप के कनेक्शन, आतंकी शाहीन (आगरा) से लिंक आदि। केजीएमयू ने विशाखा कमेटी से जांच कराई, रमीज को दोषी पाया और एक्सपल करने की सिफारिश की।
यह मामला अब बड़े नेटवर्क की जांच में बदल गया है, जहां हॉस्टल मीटिंग्स, चंदा और संगठित तरीके से हिंदू महिलाओं को टारगेट करने की बात सामने आ रही है।













