भुवनेश्वर । खोर्धा जिले के जटणी थाना क्षेत्र में लगभग दस साल पहले एक हिन्दू युवक की हत्या किये जाने स्थान पर तबलीगियों द्वारा आगामी दिनों में एक बडा कार्यक्रम आयोजित किये जाने की तैयारियां सामने आने के बाद स्थानीय इलाके में तनाव व रोष देखा गया है।
स्थानीय ग्रामीणों के साथ साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने इस कार्यक्रम को आयोजित करने के लिए प्रशासन द्वारा अनुमति न दिये जाने की मांग को लेकर खोर्धा के जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा । स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले के जटणी थाना क्षेत्र के तिरिमल- बेणापंजरी इलाके में तबलीगियों द्वारा एक बडा मजहबी कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी कर रहे है।
सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका
इसमें हजारों की संख्या में बाहर के मुसलमान शामिल होंगे। इस कारण इस इलाके में कानून व्यवस्था की स्थिति बिगडने के साथ साथ सांप्रदायिक सौहार्द बिगडने की आशंका है। इस कारण आसपास के गांवों के लोगों ने प्रशासन से इस कार्यक्रम को आयोजित करने की अनुमति न देने की मांग की है। स्थानीय ग्रामवासियों के साथ साथ बजरंग दल, संगठित हिन्दू परिवार, तराबोई गांव कमेटी, हिन्दू जागरण मंच, नवज्योति सेवा संगठन, हिन्दूराज सेवा संगठन के पदाधिकारियों ने 12 जनवरी को खोर्धा जिले के जिलाधिकारी अमृत ऋतुराज से मिल कर इस संबंधी ज्ञापन सौंपा।
इलाके में एक लव जिहाद का मामला भी सामने आया था…
इस ज्ञापन में कहा गया है कि तबलीगियों द्वारा जिस स्थान पर यह मजहबी कार्यक्रम करने की योजना बनायी जा रही है वह तिरिमल–बेणापंजुरी इलाका पहले से ही कानून-व्यवस्था की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। लगभग दस साल पूर्व इसी स्थान पर एक गीता भवन के निर्माण को लेकर मुसलमानों की भीड द्वारा एक हिंदू युवक की हत्या कर दी गई थी । उसके बाद से यह क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव की दृष्टि में अत्यंत संवेदनशील माना जाता रहा है। इस इलाके से गैर कानूनी तरीके से गौतस्करी, गौ हत्या जैसे घटनाएं सामने आता रहा है । पिछले दिनों इस इलाके से एक लव जिहाद का मामला भी सामने आया था।
ऐसी स्थिति में यदि इस तरह के मजहबी कार्यक्रम को आयोजित करने की प्रशासन द्वारा अनुमति दी जाती है तो सांप्रादायित स्थिति बिगडने की आशंका है। इसके अलावा ज्ञापन में पश्चिम बंगाल में एसआईआर लागू होने के बाद अवैध रूप से रह रहे लोगों के पड़ोसी राज्यों की ओर पलायन की आशंका का भी उल्लेख किया गया है। संगठनों ने दावा किया कि इस तरह के आयोजन का इस्तेमाल अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को बसाने के लिए किया जा सकता है।
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इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सांप्रदायिक सौहार्द को सुरक्षित रखने के लिए प्रस्तावित तबलीग जमात कार्यक्रम की अनुमति रद्द की जाए और आवश्यक एहतियाती कदम उठाए जाएं। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अनिल बिश्वाल ने पांचजन्य से बातचीत करते हुए कहा कि गत दस साल पहले इस स्थान पर गीता भवन के निर्माण को लेकर सांप्रदायिक तनाव देखा गया था । उस दौरान एक युवक कालंदी सेनापति की हत्या कर दी गई थी ।इसीसे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह कितना संवेदनशील इलाका है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी कटक में एक इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन किया जाना प्रस्तावित था । लेकिन खुफिया रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने उसकी अनुमति रद्द कर दी थी ।
उन्होंने कहा कि इस प्रस्तावित मजहबी कार्यक्रम के जरिये अवैध बांग्लादेशी रोहिंगियायों को यहां बसाने की योजना बनायी जा रही है । इसलिए प्रशासन को इस मजहबी कार्यक्रम को आयोजित करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए । उन्होंने आशा व्यक्त की कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन उचित निर्णय लेगी । हिन्दू जागरण मंच ओडिशा (पूर्व) के संगठन मंत्री तन्मय दाश ने कहा कि इस तरह के मजहबी आयोजन को जिला प्रशासन को कतई अनुमति नहीं देनी चाहिए । इससे इस इलाके का साप्रदायिक सौहार्द बिगडने की आशंका है । स्थानीय लोगों के आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को इस तरह की किसी प्रकार की मजहबी कार्यक्रम की अनुमति नहीं देनी चाहिए ।

















