आपरेशन सिंदूर में मिले गहरे जख्म साल रहे जिन्ना के देश की साजिशी हरकतें उसके बाद कम नहीं हुई हैं। इस आपरेशन के फौरन बाद ही, उसने भारत की चिंताएं बढ़ाने के नए पैंतरे अपनाने शुरू कर दिए थे। इसी का नतीजा देखने में आया सर क्रीक में। उस सीमा क्षेत्र में पाकिस्तानी फौज और साजोसामान की बढ़ती तादाद क्या संकेत करती है? यह सवाल रक्षा विशेषज्ञों को स्वाभाविक रूप से एक निष्कर्ष पर पहुंचाता है कि संभवत: जिन्ना के देश का सेना प्रमुख असीम मुनीर उस क्षेत्र में कोई मोर्चा खोलने की मंशा पाले बैठा है। लेकिन क्या यह आकलन सही है? क्या मुनीर का इरादा असल मोर्चे से ध्यान भटकाना तो नहीं है। भारत की सीमा पर सर क्रीक एक अहम रणनीतिक मोर्चा है जिस पर अंग्रेजों के जमाने से विवाद चला आ रहा है। तो भी, पाकिस्तान द्वारा उस क्षेत्र में अपने सैनिकों की तैनाती को बढ़ाना और खतरनाक हथियारों का जमावड़ा लगाना अनदेखा तो नहीं किया जा सकता।
गत अक्तूबर माह में ऐसी खबरें आई थीं कि पाकिस्तान भारत की पश्चिमी सीमा पर कुछ फौजी हलचल कर रहा है। वह विवादित सर क्रीक इलाके के निकट सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर रहा है। भारत ने वहां अपना सबसे बड़ा संयुक्त सैन्य अभ्यास, एक्सरसाइज त्रिशूल चलाया था और अपनी ताकत की एक छोटी सी झलक दिखाई थी।

क्या हैं सर क्रीक के मायने?
सर क्रीक भारत के गुजरात राज्य में कच्छ के रण और पाकिस्तान के बीच 96 किलोमीटर का एक दलदली इलाका है जहां ज्वार आने पर पानी भरता है। यह इलाका और दलदली भले है तो भी भारत और जिन्ना के देश की नजर में इसकी महत्ता रणनीतिक और आर्थिक, दोनों तरह से है।
यह इलाका एशिया में मछली पकड़ने के सबसे बड़े मैदानों में से एक माना जाता है। इसलिए स्वाभाविक है कि दोनों तरफ के हजारों मछुआरों की रोजी-रोटी यहीं से आती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि वहां समुद्र तल के नीचे तेल और गैस के बड़े भंडार हैं, जिनका द्विपक्षीय विवाद की वजह से अभी तक पता नहीं लगाया जा सका है।
रणनीतिक लिहाज से माना जाता है जो भी सर क्रीक को नियंत्रित करता है, वह आस-पास के एक बड़े समुद्री इलाके को भी नियंत्रित करता है, जिसमें विशिष्ट आर्थिक जोन भी शामिल हैं, जो मछली पकड़ने, खनिज निकालने और समुद्री सुरक्षा का अधिकार देते हैं।
पाकिस्तान की बात करें तो वह सर क्रीक को खास इसलिए मानता है क्योंकि यह वह इलाका है जो उसके सबसे बड़े शहर कराची के निकट है जहां उसका मुख्य नौसेना अड्डा है। तो इस इलाके पर काबू पाने से पाकिस्तान को लगता है उसकी समुद्री सुरक्षा और अरब सागर तक पहुंच बन सकती है। यही वजह है कि जिन्ना का देश इस क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाकर अपना पलड़ा भारी दिखाना चाहता है। इसलिए वहां वह सैन्य ढांचे खड़े कर रहा है।
क्या है पाकिस्तान की सैन्य तैयारी?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान यहां जो सैन्य ढांचा खड़ा कर रहा है, उसमें अग्रिम चौकी, सैनिकों की त्वरित आवाजाही के लिए सुधरी सड़कें और पुख्ता बंकर शामिल हैं। उपग्रह चित्रों के आधार पर एकत्र गुप्तचर सूचनाएं बताती हैं कि यह अधिकांश ढांचा पिछले कुछ ही महीनों के अंदर खड़ा किया गया है। वैसे विशेषज्ञ मानते हैं कि इसकी तैयारी 2019 से ही चल रही थी, जब पाकिस्तान की नौसेना ने इस इलाके में एक नई बटालियन खड़ी की थी। फिर साल 2023 में पाकिस्तान ने इसी जगह अपना सुरक्षा ढांचा सुधारा था और निगरानी ड्रोन तैनात किए थे।
सर क्रीक में पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य उपस्थिति के प्रति भारत के रणनीतिकार सचेत हैं। खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कह चुके हैं कि पाकिस्तान के किसी भी हरकत का भारत पूरी ताकत से जवाब देगा। दरअसल पाकिस्तान की मंशा बस एक विवादित सीमा को नियंत्रित करना नहीं है, क्योंकि यह भारत के आर्थिक केन्द्र पर सीधी नजर डालने का स्थान भी है। यह स्थान पाकिस्तान को गुजरात के पेट्रोलियम और रिफाइनरी इंफ्रास्ट्रक्चर को लक्ष्य की तरह देखने का लालच दे सकता है।
कभी बाण गंगा के नाम से मशहूर रही इस क्रीक को इसका वर्तमान नाम ‘सर क्रिक’ उपनिवेश काल के दौरान एक ब्रिटिश अधिकारी के सम्मान में रखा गया था। कच्छ के रण के पास ही 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच लड़ाई हुई थी। इसलिए सर क्रीक का रणनीतिक महत्व कम नहीं आंका जा सकता।

















