शक्सगाम घाटी पर चीन का नया दावा: कहा-'यह हमारा क्षेत्र है', भारत ने किया कड़ा विरोध
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शक्सगाम घाटी पर चीन का नया दावा: कहा-‘यह हमारा क्षेत्र है’, भारत ने किया कड़ा विरोध

शक्सगाम घाटी में चीन के तेज निर्माण पर भारत ने विरोध जताया। चीन की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा - 'यह हमारा क्षेत्र है, इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना हमारा हक'। जानें 1963 समझौते और CPEC विवाद की पूरी कहानी।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Jan 13, 2026, 12:39 pm IST
in विश्व
China Shakshgam vally

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POJK) के अंतर्गत आने वाली शक्सगाम घाटी में चीन तेजी से सड़कों, रेल और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रहा है। जिसका भारत सरकार ने विरोध किया है। लेकिन बशर्मी की हद तो ये है कि उसने शक्सगाम वैली पर अपना दावा दोहराया है। जबकि, हकीकत ये है कि ये इलाका जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है, लेकिन चीन कहता है कि ये उसका अपना क्षेत्र है।

क्या है पूरा मामला

रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले हफ्ते भारत ने शक्सगाम घाटी में चीन के निर्माण कार्यों पर ऐतराज जताया था। इस पर अब चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि ये इलाका चीन का है और यहां इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना बिल्कुल ठीक है। माओ निंग का कहना है, “जिस इलाके की बात हो रही है, वो चीन का हिस्सा है। अपनी जमीन पर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना चीन का हक है और ये काम ‘बियॉन्ड रिप्रोच’ यानी बिल्कुल सही है।”

माओ निंग ने आगे कहा कि 1960 के दशक में चीन और पाकिस्तान के बीच बॉर्डर एग्रीमेंट हुआ था, जिसमें दोनों देशों ने अपनी सीमा तय की। ये दोनों संप्रभु देशों का हक था। निंग ने CPEC (चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर) का भी जिक्र किया और कहा कि ये सिर्फ आर्थिक सहयोग का प्रोजेक्ट है, जो लोकल लोगों के विकास और बेहतरी के लिए है। CPEC पर भारत की आपत्ति को भी उन्होंने खारिज किया। साथ ही कहा कि ये एग्रीमेंट और CPEC कश्मीर मुद्दे पर चीन की पोजीशन को प्रभावित नहीं करते। चीन का मानना है कि जम्मू-कश्मीर का विवाद इतिहास से बचा हुआ है और इसे UN चार्टर, सिक्योरिटी काउंसिल रेजोल्यूशन और द्विपक्षीय समझौतों के मुताबिक शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाना चाहिए।

भारत ने किया तगड़ा विरोध

भारत ने चीन के दावे और 1963 के चीन-पाकिस्तान बॉर्डर एग्रीमेंट को बिल्कुल गैरकानूनी बताया है। एक्सटर्नल अफेयर्स मिनिस्ट्री के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि शक्सगाम वैली भारत का हिस्सा है। 1963 का वो समझौता कभी मान्य नहीं किया गया, क्योंकि पाकिस्तान ने वो इलाका (करीब 5,180 वर्ग किमी) गैरकानूनी तरीके से कब्जे में रखा हुआ है और फिर चीन को सौंप दिया। भारत बार-बार कहता आया है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे यूनियन टेरिटरी भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। ये बात पाकिस्तान और चीन को कई बार साफ-साफ बताई जा चुकी है। भारत CPEC का भी विरोध करता है, क्योंकि उसके कुछ हिस्से भारतीय इलाके से गुजरते हैं।

शक्सगाम वैली की स्थिति

शक्सगाम वैली जम्मू-कश्मीर में है और ये सियाचिन ग्लेशियर के करीब है। 1948 में पाकिस्तान ने इस पर कब्जा कर लिया था। 1963 में पाकिस्तान ने चीन के साथ एग्रीमेंट किया और करीब 5,180 वर्ग किमी जमीन चीन को दे दी। भारत इसे कभी नहीं मानता और कहता है कि पाकिस्तान के पास ये जमीन देने का कोई हक नहीं था, क्योंकि वो इलाका भारत का है। खास बात ये है कि ये इलाका सियाचिन से लगता है और सियाचिन भारत के लिए सामरिक दृष्टि से बेहद अहम है।

Topics: shaksgam valleyशक्सगाम घाटीचीन दावाChina claim ShaksgamPOJK China constructionशक्सगाम वैली विवादभारत विरोध चीन
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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