जर्मनी ने भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए बड़ा ऐलान किया है। भारत दौरे पर आए जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भारतीयों के लिए वीजा-फ्री ट्रांजिट की सुविधा दी है। उन्होंने इस बात का ऐलान 12 जनवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय मुलाकात के दौरान किया।
क्या है पूरा मामला
यह खबर जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की भारत यात्रा के दौरान सामने आई। यह उनकी पहली भारत यात्रा थी और चांसलर बनने के बाद उनकी पहली एशिया यात्रा भी। मुलाकात मुख्य रूप से अहमदाबाद और गांधीनगर में हुई। दोनों नेताओं ने CEOs फोरम में हिस्सा लिया, संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कई मुद्दों पर बात की। पीएम मोदी ने चांसलर मेर्ज़ को इस फैसले के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि इससे दोनों देशों के लोगों के बीच रिश्ते और मजबूत होंगे। संयुक्त बयान में लिखा है कि यह कदम भारतीय नागरिकों की यात्रा को आसान बनाएगा और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाएगा।
वीजा-फ्री ट्रांजिट क्या है?
सीधे शब्दों में कहें तो भारतीय पासपोर्ट वाले लोग अब जर्मनी के एयरपोर्ट से होते हुए किसी दूसरे देश की यात्रा करते समय अलग से ट्रांजिट वीजा नहीं लेंगे। पहले उन्हें एयरपोर्ट ट्रांजिट वीजा (Schengen Category A) लेना पड़ता था, भले ही वे सिर्फ इंटरनेशनल ट्रांजिट एरिया में रहें और बाहर न निकलें। अब यह जरूरत खत्म हो गई। जैसे फ्रैंकफर्ट, म्यूनिख या बर्लिन एयरपोर्ट पर लेओवर हो और अगली फ्लाइट पकड़नी हो, तो बिना अतिरिक्त कागजी कार्रवाई के काम चल जाएगा। इससे यात्रा तेज, आसान और कम परेशानी वाली हो जाएगी।
यह सिर्फ ट्रांजिट के लिए है। अगर कोई जर्मनी में घूमना-फिरना चाहे, बिजनेस या फैमिली विजिट पर जाना चाहे, या शेंगेन देशों में एंट्री लेनी हो, तो अभी भी पूरा शेंगेन वीजा लगेगा। यह सुविधा सिर्फ एयरपोर्ट के इंटरनेशनल ट्रांजिट जोन तक सीमित है, जहां से सीधे कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़ी जाती है।
मुलाकात में और क्या रहा खास
ट्रांजिट वीजा के अलावा दोनों देशों ने लोगों के बीच रिश्तों को मजबूत करने पर जोर दिया। जर्मनी में भारतीय छात्रों, रिसर्चर्स, स्किल्ड प्रोफेशनल्स, कलाकारों और टूरिस्ट्स की संख्या बढ़ रही है। वहां करीब 3 लाख भारतीय रहते हैं और 60 हजार छात्र पढ़ते हैं। दोनों नेताओं ने शिक्षा, रिसर्च, वोकेशनल ट्रेनिंग, कल्चर और यूथ एक्सचेंज पर सहयोग बढ़ाने की बात की। भारतीय छात्रों और ग्रेजुएट्स को जर्मन जॉब मार्केट में मदद देने की योजनाएं स्वागत की गईं। IITs और जर्मन टेक्निकल यूनिवर्सिटीज के बीच लिंकेज मजबूत होंगे। दोनों ने इंडो-जर्मन हायर एजुकेशन पर एक कॉम्प्रिहेंसिव रोडमैप बनाने पर सहमति जताई।
जर्मन विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस खोलने का न्योता
इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जर्मन विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस खोलने का न्योता दिया। ये फैसला भारत की नई शिक्षा नीति के तहत लिया गया है। इसके अलावा स्किल्ड वर्कर्स, जैसे हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स, नर्सेस और केयरगिवर्स की मोबिलिटी पर भी बात हुई। जर्मनी को ऐसे वर्कर्स की जरूरत बढ़ रही है। दोनों देशों ने डिफेंस, ट्रेड, क्रिटिकल मिनरल्स, सेमीकंडक्टर्स, क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।











