बांग्लादेश में हिन्दुओं पर अत्याचार लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इसी बीच एक हिन्दू नेता और संगीतकार प्रोलय चाकी की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई है। ये मौत रविवार रात (11 जनवरी 2026 की रात) को हुई। प्रोलय चाकी 60 साल के थे और वे बांग्लादेश की अवामी लीग पार्टी के सीनियर नेता थे। इसके अलावा वे पार्टी की पाबना यूनिट के कल्चरल अफेयर्स सेक्रेटरी थे। साथ ही वे 1990 के दशक के जाने-माने कल्चरल एक्टिविस्ट, गायक और म्यूजिक डायरेक्टर भी थे। वे श्री श्री रामकृष्ण सेवा श्रम के सेक्रेटरी भी थे।
गिरफ्तारी और हिरासत
प्रोलय चाकी को 16 दिसंबर 2025 को उनके घर से पाबना के दिलालपुर इलाके से पुलिस ने उठाया था। बाद में उन्हें एक ब्लास्ट केस में गिरफ्तार दिखाया गया। यह केस 2024 के एंटी-डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट मूवमेंट से जुड़ा था, जो आगे चलकर ‘जुलाई अपराइजिंग’ बना और इससे शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। ध्यान देने वाली बात है कि गिरफ्तारी के समय उनके नाम पर कोई केस नहीं था, लेकिन बाद में उन्हें इस मामले में नामित किया गया।
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मौत का कारण
प्रोलय को डायबिटीज और हृदय रोग की पुरानी बीमारियां थीं। जेल में उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पहले शुक्रवार को पाबना जनरल हॉस्पिटल ले जाया गया। हालत ज्यादा खराब होने पर उन्हें राजशाही मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया, जहां रविवार रात करीब 9 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया। मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया गया है।
बांग्लादेश ने बताया प्राकृतिक मौत
पाबना जेल के सुपरिंटेंडेंट मो. ओमार फारूक ने कहा कि प्रोलय को पहले से कई स्वास्थ्य समस्याएं थीं, जैसे डायबिटीज और हार्ट डिजीज। उन्होंने इसे नैचुरल डेथ बताया और मेडिकल केयर न देने के आरोपों को खारिज किया। उनका कहना था कि यह मौत सामान्य थी, किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई।
परिवार का आरोप
प्रोलय के बेटे सोनी चाकी ने आरोप लगाया कि उनके पिता को जेल में सही मेडिकल मदद नहीं मिली। परिवार को आधिकारिक रूप से उनकी तबीयत के बारे में सूचना नहीं दी गई। वे हॉस्पिटल पहुंचे तो हालत बहुत खराब हो चुकी थी। परिवार का कहना है कि जेल प्रशासन ने जरूरी इलाज नहीं करवाया, जिससे मौत हुई। वे पुलिस के नैचुरल डेथ वाले दावे को सिरे से नकारते हैं।
बांग्लादेश में लगातार हो रही हिन्दुओं की हत्या
यह घटना ऐसे समय हुई है जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं, और अवामी लीग से जुड़े लोगों पर हमलों की खबरें आ रही हैं। दिसंबर 2025 में मयमेंसिंह में दीपू चंद्र दास की लिंचिंग के बाद से सात हिंदुओं की मौत और अल्पसंख्यकों की संपत्ति पर हमले हुए हैं। प्रोलय चाकी की मौत से अवामी लीग समर्थकों में गुस्सा है, और वे इसे राजनीतिक दबाव या कस्टडी में लापरवाही से जोड़ रहे हैं।
















