डिजिटल डाका: बुजुर्ग दंपति 17 दिन घर में कैद, 15 करोड़ गंवाए, तुरंत डिजिटल दरवाजे करें लॉक
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डिजिटल डाका: बुजुर्ग दंपति 17 दिन घर में कैद, 15 करोड़ गंवाए, तुरंत डिजिटल दरवाजे करें लॉक

बुजुर्ग दंपत्ति को 17 दिनों तक डरा-धमका कर 24 घंटे कैमरे की निगरानी में रहने को मजबूर किया और उनके बैंक खाते से करीब 15 करोड़ रुपये निकाल लिए गए

Written byसुनीता मिश्रासुनीता मिश्रा
Jan 12, 2026, 07:20 pm IST
inभारत
डिजिटल डाका

डिजिटल डाका

डिजिटल युग में ऑनलाइन बैंकिंग, निवेश और सोशल मीडिया ने जीवन को आसान बना दिया है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराध एक गंभीर चुनौती के रूप में उभरा है। ताजा मामला दिल्ली के ग्रेटर कैलाश का है, जहां संयुक्त राष्ट्र (यूएन) से रिटायर्ड डॉ. ओम तनेजा (81 साल) और उनकी पत्नी डॉ. इंदिरा तनेजा (77 साल) को साइबर ठगों ने 17 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा। इस दौरान नकली पुलिस और जज बनकर उनसे करीब 15 करोड़ रुपये ठग लिए गए।

बुजुर्ग दंपत्ति 10 साल पहले अमेरिका छोड़कर वापस अपने देश लौटे थे, ताकि वे यहां रहकर समाज सेवा कर सकें। उन्होंने जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए एक ट्रस्ट भी बनाया, लेकिन उन्होंने समाज सेवा के लिए जो पैसा बचाया था, उसे साइबर ठगों ने उड़ा लिया। बुजुर्ग दंपत्ति को 17 दिनों तक डरा-धमका कर 24 घंटे कैमरे की निगरानी में रहने को मजबूर किया और उनके बैंक खाते से करीब 15 करोड़ रुपये निकाल लिए गए।

आरबीआई के चौंकाने वाले आंकड़े

डिजिटल ठगों का निशाना अब केवल पढ़े-लिखे, नौकरी पेशा नहीं, बल्कि देश के अमीर लोग और बुजुर्ग बन रहे हैं। यह स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब लगातार जागरूकता अभियानों के बावजूद रोज साइबर ठगी के मामले सामने आते हैं। इसका संकेत आरबीआई के ताजा आंकड़े दे रहे हैं। हाल ही में आरबीआई की ओर से जारी ‘ट्रेंड एंड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग इन इंडिया 2024-25’ रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकिंग धोखाधड़ी की संख्या तो घटी है, लेकिन इनमें संलिप्त राशि में वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर 2025) में 21,367 करोड़ की धोखाधड़ी हुई, जबकि 2024 में समान अवधि में यह संख्या 16,659 करोड़ थी।

सोशल मीडिया पर निजी, वित्तीय जानकारी साझा न करें

अमीर लोग आमतौर पर कई बैंक खातों, निवेश ऐप और क्रेडिट कार्ड का उपयोग करते हैं। इसमें इंटरनेट के जरिए ई-कॉमर्स खरीदारी, बिल भुगतान और एक से दूसरे व्यक्ति को यूपीआई, एनईएफटी व आईएमपीएस द्वारा पैसे भेजना शामिल है। डिजिटल ठग अमीर लोगों की सोशल मीडिया पर उपलब्ध निजी और वित्तीय जानकारी आसानी से जुटा लेते हैं और फिर उसी के अनुरूप ठगी की रणनीति अपनाते हैं। इसके बाद फर्जी कॉल, ईमेल और फेक प्रोफाइल के जरिए साइबर अपराधी खुद को बैंक अधिकारी, जज, सीबीआई अधिकारी, पुलिसकर्मी और वित्तीय सलाहकार बताकर पहले उनका विश्वास जीतते हैं। फिर उन्हें कई दिनों तक डिजिटल अरेस्ट कर उनसे लाखों-करोड़ों रुपये ठग लेते हैं। डॉक्टर, जज, इंजीनियर, पुलिस अधिकारी, प्रोफेसर, सेना के अधिकारी, सेवानिवृत्त सरकारी व निजी कंपनियों के अधिकारियों को भी ठग चुके हैं।

साइबर ठग बुजुर्गों को क्यों बना रहे निशाना?

रिपोर्ट्स बताती हैं कि पिछले कुछ समय से साइबर अपराध का शिकार लोगों में बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ी है, क्योंकि बुजुर्ग सामान्यतया सेवानिवृत्त अधिकारी, कर्मचारी या आर्थिक रूप से अच्छी स्थिति में होते हैं। वे अपनी पूरी जिंदगी की कमाई अपने बुढ़ापे के लिए बचाकर रखते हैं। उनमें डिजिटल ट्रांजैक्शन संबंधी सावधानियों को लेकर जागरूकता का अभाव रहता है। वे नई तकनीक और डिजिटल सुरक्षा उपायों से दूर रहते हैं। इसके अलावा बुजुर्ग आसानी से डर और भरोसे में आ जाते हैं। ये ठग न केवल उनका पैसा, बल्कि उनकी मानसिक शांति भी छीन लेते हैं।

जागरूकता अभियान के बावजूद तेजी से बढ़ रहे मामले

सरकार और पुलिस द्वारा लगातार साइबर अपराध को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। समाचार पत्रों-पत्रिकाओं, न्यूज पोर्टल में भी प्रतिदिन साइबर ठगी की खबरें प्रकाशित हो रही हैं, इसके बावजूद डिजिटल ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कभी आतंकी हमलों में शामिल होने का डर दिखा कर, तो कभी पुलिस केस की धमकी देकर साइबर ठग हर दिन नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को ठग रहे हैं। वहीं, जागरूकता की कमी, अति आत्मविश्वास (मेरे साथ ऐसी धोखाधड़ी नहीं हो सकती) इस समस्या को और भी जटिल बना रहा है।

अत्यधिक आत्मविश्वास साइबर अपराध को दे रहा बढ़ावा

इस बात को समझना होगा कि डिजिटल सुविधा तभी सुरक्षित है, जब उसके साथ समझदारी और सावधानी बरती जाए। नई तकनीकों का दुरुपयोग और लोगों का अत्यधिक आत्मविश्वास साइबर अपराध को बढ़ावा देता है। इसलिए जागरूक होने के साथ सतर्क रहना भी बहुत जरूरी है। साइबर ठग जिस व्यक्ति को अपना शिकार बनाते हैं उसकी पहले से हर छोटी से छोटी और निजी जानकारी जुटाते हैं। उन्हें यह भी पता होता है उनका शिकार किन चीजों से अनजान हैं और वह कैसे उनके जाल में फंस सकता है।

डिजिटली ठगी से बचने के लिए क्या करें?

डिजिटल दौर में सुरक्षा के प्रति लापरवाही भारी पड़ सकती है। इसलिए साइबर सुरक्षा को केवल सरकारी जिम्मेदारी मानने के बजाय इसे सामूहिक दायित्व के रूप में अपनाने की आवश्यकता है।

  1. सोशल मीडिया पर अपनी निजी और वित्तीय जानकारी साझा न करें
  2. किसी भी अनजान लिंक, वीडियो या अटैचमेंट पर क्लिक न करें
  3. शुभकामना संदेश और निमंत्रण वाली एपीके फाइल से सावधान रहें
  4. बैंक, एटीएम और यूपीआई से जुड़ी जानकारी किसी के साथ साझा न करें
  5. ऑनलाइन शापिंग के दौरान किसी भी ऑफर की पुष्टि उसकी अधिकारिक वेबसाइड पर जाकर करें
  6. पब्लिक वाई-फाई नेटवर्क से ऑननलाइन खरीददारी करने से बचें
  7. मजबूत ईमेल पासवर्ड का उपयोग करें और उन्हें समय-समय पर बदलें
  8. निवेश में भारी मुनाफे का लालच न करें

इस बात को भी समझें कि बैंक अधिकारी और पुलिसकर्मी कभी भी लोगों को फोन नहीं करते हैं। इनके नाम पर फर्जी कॉल करने वालों की तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

 

 

Topics: पाञ्चजन्य विशेषडिजिटल अरेस्टसाइबर फ्रॉडडिजिटल डाकाबुजुर्ग को ठगासाइबर सेफ्टी
सुनीता मिश्रा
सुनीता मिश्रा
हरियाणा की कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री। इग्नू दिल्ली से राजनीतिक विज्ञान में मास्टर डिग्री। पत्रकारिता में 10 वर्षों का अनुभव। [Read more]
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