धर्मप्राणः भारत की पुनर्स्थापना : युगपुरुष स्वामी विवेकानंद से नरेंद्र मोदी तक
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धर्मप्राणः भारत की पुनर्स्थापना : युगपुरुष स्वामी विवेकानंद से नरेंद्र मोदी तक

1893 में शिकागो में विश्व धर्म संसद में दिया गया उनका भाषण केवल धार्मिक संवाद नहीं था। वह भारत की सभ्यतागत आत्मा का वैश्विक उद्घोष था। गर्व से उन्होंने कहा कि वे उस सनातन परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसने विश्व को सहिष्णुता और समन्वय सिखाया।

Written byसंजय सेठसंजय सेठ
Jan 12, 2026, 09:56 am IST
in भारत
प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

आज 12 जनवरी 2026 को हम युगपुरुष स्वामी विवेकानंद जी की 163वीं जयंती मना रहे हैं। यह अवसर केवल एक महान संत और विचारक को स्मरण करने का नहीं है, बल्कि उस वैचारिक ऊर्जा को समझने और अपने जीवन में उतारने का भी समय है जिसने भारत को आत्मगौरव, आत्मबल और राष्ट्रीय चेतना का बोध कराया। स्वामी विवेकानंद जी ने जिस भारत की कल्पना की थी – आध्यात्मिक रूप से जाग्रत, सांस्कृतिक रूप से आत्मविश्वासी और युवाशक्ति से संपन्न – आज वही विचार हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में आधुनिक नीतियों और दृष्टि में स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहे हैं।
1893 में शिकागो में विश्व धर्म संसद में दिया गया उनका भाषण केवल धार्मिक संवाद नहीं था। वह भारत की सभ्यतागत आत्मा का वैश्विक उद्घोष था। गर्व से उन्होंने कहा कि वे उस सनातन परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसने विश्व को सहिष्णुता और समन्वय सिखाया। भारत को उन्होंने “धर्मप्राणः भारत” कहा – ऐसा राष्ट्र जिसकी आत्मा धर्म में निहित है। उनके लिए धर्म केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि सेवा, करुणा, नैतिकता और मानवता का मार्ग था।
स्वामी विवेकानंद जी बार-बार युवाओं को चेतावनी देते रहे कि भारत का उत्थान केवल राजनीतिक या भौतिक प्रगति से नहीं होगा। उन्होंने कहा था – “भारत अमर है, यदि वह ईश्वर की खोज में लगा रहे।” आज जब विकास और मूल्यों के बीच संतुलन एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है, तब उनकी यह शिक्षा हमें जीवन-दृष्टि और नैतिक नेतृत्व का मार्ग दिखाती है।

नरेंद्र से नरेंद्र : विचारों की निरंतरता

स्वामी विवेकानंद जी के विचारों से प्रभावित व्यक्तित्वों में हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यह महज़ संयोग नहीं कि दोनों का नाम नरेंद्र है; यह विचारों की एक गहरी निरंतरता भी दर्शाता है। मोदी जी बचपन से ही विवेकानंद जी के ग्रंथों के पाठक रहे, उनके विचारों को अपनी डायरी में संजोते रहे और युवाओं के साथ उन पर संवाद करते रहे।
रामकृष्ण मिशन में बिताया गया समय, संतों और साधुओं के बीच रहकर आत्मसंयम और सेवा का अनुभव करना – यह सब मोदी जी के जीवन का आधार बना। उन्होंने विवेकानंद के कर्तव्यबोध, अनुशासन और राष्ट्र-प्रेम के सिद्धांतों को आत्मसात किया। 1991 में उन्हें 45-दिन की “एकता यात्रा” आयोजित करने की जिम्मेदारी दी गई, जो राष्ट्रीय एकता और अखंडता का संदेश देने वाली एक महत्वपूर्ण पहल थी।
मोदी जी के युवा जीवन की व्यक्तिगत कहानियाँ दर्शाती हैं कि उन्होंने स्वामी विवेकानंद जी के दर्शन को कितनी गहराई से आत्मसात किया। वे बचपन में घंटों चिंतन करते, विवेकानंद जी की रचनाओं का अध्ययन करते, ‘सेवा’, ‘कर्तव्य’ और अनुशासन के अर्थ पर विचार करते, और अपने देश के लिए कैसे योगदान दें, इसकी कल्पना करते।

युवा शक्ति: सौ से एक लाख राष्ट्रनिर्माता

स्वामी विवेकानंद का युवाओं पर अटूट विश्वास था – “मुझे सौ ऊर्जावान युवा दे दो, मैं भारत को बदल दूँगा।” यह आज भी प्रासंगिक है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने लाल किले से युवाओं को संबोधित करते हुए कहा – “मुझे एक लाख ऐसे युवा चाहिए, जो विकसित भारत@2047 के लिए अपना जीवन समर्पित कर दें।” यह आह्वान केवल संख्या नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व और सेवा की भावना का संदेश है। भारत अपने युवाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि राष्ट्रनिर्माण का सहभागी मानता है।
आज भारत विश्व का सबसे युवा देश है। 2029 तक देश की 50 प्रतिशत से अधिक आबादी 25 वर्ष से कम होगी। यही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। प्रधानमंत्री मोदी जी का दृष्टिकोण है कि युवाओं को शिक्षा, कौशल, नवाचार, नेतृत्व और मूल्यपरक दृष्टि से सशक्त किया जाए, ताकि वे देश के सर्वांगीण विकास में सक्रिय योगदान दें।

एक भारत श्रेष्ठ भारत: विविधता में एकता

स्वामी विवेकानंद जी भारत की विविधता को उसकी सबसे बड़ी शक्ति मानते थे। आज यह दृष्टि “एक भारत श्रेष्ठ भारत” कार्यक्रम में साकार होती है। भाषाई, क्षेत्रीय और सांस्कृतिक भेदों से ऊपर उठकर साझा भारतीय पहचान को मजबूत करना इसका मूल उद्देश्य है।
शिक्षा मंत्रालय की पहल काशी–तमिल संगमम् विशेष रूप से उल्लेखनीय है। काशी और तमिलनाडु के बीच सांस्कृतिक एवं शैक्षिक संवाद स्थापित कर यह कार्यक्रम भारत की सभ्यतागत एकता को अनुभव के स्तर पर जीवंत करता है। यह केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता का सशक्त अभ्यास है – जिसकी कल्पना स्वामी विवेकानंद ने बहुत पहले की थी।

विवेकानंद की भूमि बंगाल: एक सभ्यतागत दायित्व

स्वामी विवेकानंद की जन्मभूमि पश्चिम बंगाल आज विशेष आत्मचिंतन की मांग करती है। जिस धरती ने भारत को आध्यात्मिक नेतृत्व और बौद्धिक साहस दिया, वही आज सांस्कृतिक असुरक्षा, वैचारिक भ्रम और सामाजिक असंतुलन के दौर से गुजर रही है। यह किसी दल की आलोचना नहीं, बल्कि एक सभ्यता की चिंता है।
बंगाल की भाषा, साहित्य, उत्सव और सनातन चेतना भारत की आत्मा का अभिन्न अंग हैं। इन्हें बचाना किसी के विरुद्ध नहीं, बल्कि भारत के पक्ष में खड़ा होना है। विवेकानंद ने कहा था—
“जिस समाज में आत्मविश्वास नहीं, वहाँ धर्म जीवित नहीं रह सकता।”
आज बंगाल के युवाओं से अपेक्षा है कि वे अपनी विरासत को फिर से शक्ति बनाएं, भय नहीं, साहस का चयन करें।

सेवा से सत्ता तक एवं सत्ता से सेवा तक

प्रधानमंत्री कार्यालय का नया नाम “सेवा तीर्थ”, राजभवनों का नाम लोक भवन, राजपथ का नाम कर्तव्य पथ, और केंद्रीय सचिवालय का नाम कर्तव्य भवन – यह सभी पहल सेवा को शासन का मूल आधार बनाती हैं। यह संकेत हैं कि सत्ता का उद्देश्य शक्ति नहीं, बल्कि देश और समाज की सेवा है। मोदी जी का जीवन और शासन मॉडल इस दर्शन का प्रयोग है – स्वामी विवेकानंद इसका स्रोत हैं, मोदी जी उसका आधुनिक प्रयोग हैं।
शिक्षा, कौशल और नवाचार: विवेकानंद का आधुनिक रूप
स्वामी विवेकानंद जी ने शिक्षा को समाज निर्माण की आधारशिला माना। प्रधानमंत्री मोदी जी की नीतियों में कौशल विकास, नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति, महिला सशक्तिकरण और युवा नेतृत्व पर जोर उसी दर्शन का समकालीन रूप है। विवेकानंद जी कहते थे – “युवाओं के चरित्र पर ही भविष्य निर्भर करता है।” आज जब भारत विश्व का सबसे युवा देश है, यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।
स्वामी विवेकानंद जी ने भारत को जगद्गुरु के रूप में देखा था। नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत आज ज्ञान, मूल्यों और समाधान देने वाला राष्ट्र बन रहा है – चाहे वह योग हो, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना हो, या वैश्विक दक्षिण की आवाज़। यह यात्रा सत्ता से नहीं, विचार से शुरू हुई थी।
विशेष रूप से यह भी याद रहे कि 1893 में शिकागो में स्वामी विवेकानंद जी के भाषण का स्मारक पुस्तक राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा प्रधानमंत्री मोदी जी को भेंट की गई थी, जो उनकी वैश्विक प्रतिष्ठा और मूल्यों की सार्वभौमिक मान्यता को दर्शाती है।

वैश्विक मंच पर भारत: शिकागो से वॉशिंगटन तक

1993 में स्वामी विवेकानंद जी के शिकागो भाषण की शताब्दी पर वॉशिंगटन डीसी में आयोजित ग्लोबल विज़न 2000 सम्मेलन में नरेंद्र मोदी जी की भागीदारी, युवाओं के लिए आयोजित संगोष्ठी और तिरंगे के साथ युवाओं का मार्च – यह सब उसी परंपरा की कड़ी हैं। आज जब प्रधानमंत्री मोदी जी वैश्विक मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं, तो उनकी भाषा, आत्मविश्वास और दृष्टि में विवेकानंद की चेतना स्पष्ट झलकती है।

जीवन का विचार: राष्ट्र निर्माण का यज्ञ

स्वामी विवेकानंद जी का संदेश है – “एक विचार को पकड़ो। उस विचार को अपना जीवन बनाओ, उसके बारे में सोचो, उसके सपने देखो, उस विचार पर जियो।” यही संदेश आज के युवाओं के लिए दीपक की तरह है। प्रधानमंत्री मोदी जी का दृष्टिकोण – विकसित भारत@2047 – इसी संदेश का आधुनिक विस्तार है। युवाओं को शिक्षा, कौशल, नेतृत्व और मूल्यपरक दृष्टि से सशक्त कर, उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
आज राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर यह समय है कि हम अपनी ऊर्जा, ज्ञान और सेवा भावना को राष्ट्र निर्माण के महायज्ञ में समर्पित करें। जैसे रामसेतु के निर्माण में गिलहरी सहित सभी प्राणियों ने अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दिया, वैसे ही हमारा प्रत्येक छोटा-बड़ा प्रयास भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में अमूल्य सिद्ध होगी।
अतः इस पावन अवसर पर मैं देश के प्रत्येक युवा से आह्वान करता हूँ – अपने भीतर की शक्ति को पहचानिए, अपने कर्तव्य को राष्ट्रसेवा से जोड़िए और माँ भारती के गौरवपूर्ण धर्मप्राणः भारत की पुनर्स्थापना में सहभागी बनिए। युवाओं की भागीदारी से ही राष्ट्र का भविष्य सशक्त बनता है। यदि हम स्वामी विवेकानंद जी के विचारों और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दृष्टिकोण को अपने जीवन में उतारें, तो भारत को आत्मनिर्भर, सक्षम और गौरवशाली बनाने का हमारा संकल्प अवश्य साकार होगा।
आइए, हम सब मिलकर भारत को फिर से विश्वगुरु बनाएं और आने वाली पीढ़ियों को एक सशक्त, आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी भारत सौंपें।

एक भारत। श्रेष्ठ भारत। विकसित भारत।

Topics: स्वामी विवेकानंद जयंती National Youth Day Indiaराष्ट्रीय युवा दिवस DharmaPran Bharatधर्मप्राण भारत Vivekananda to Modiविवेकानंद से मोदी Indian Spiritual Heritageभारत की युवा शक्ति Developed India 2047विकसित भारत 2047 Ek Bharat Shreshtha Bharatएक भारत श्रेष्ठ भारत Indian NationalismSwami Vivekananda Jayantiभारतीय राष्ट्रवाद Spirituality and Nation BuildingContribution of Swami Vivekanandaआध्यात्मिकता और राष्ट्र निर्माणभारतीय आध्यात्मिक विरासतswami vivekanand
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