दिल्ली पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। इस गिरोह ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर-धमकाकर करीब 100 करोड़ रुपये की ठगी की। पुलिस ने इस मामले में 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अपराधी पीड़ितों को आतंकी मामलों में फंसाने के लिए डराते थे।
ठगी कैसे होती थी?
ठग खुद को उत्तर प्रदेश एटीएस या दूसरे पुलिस अधिकारियों का नाम बताकर फोन करते थे। पीड़ितों को बोलते कि उनका मोबाइल नंबर पहलगाम या दिल्ली बम धमाके जैसे आतंकी हमलों से जुड़ा हुआ है। फिर डराते कि तुम्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाएगा। इसके बाद डिजिटल अरेस्ट का ड्रामा शुरू होता – लगातार फोन पर बात करके, वीडियो कॉल पर रखकर, पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते। कहते कि पैसे ट्रांसफर करके अपनी मासूमियत साबित करो, वरना जेल हो जाएगी। ये कॉल ज्यादातर विदेश से आती थीं, लेकिन भारतीय लोकल नंबर से दिखती थीं।
सिम बॉक्स का खेल
इस पूरे धंधे के लिए गिरोह ने अवैध सिम बॉक्स का इस्तेमाल किया। ये डिवाइस विदेशी कॉल को भारत के लोकल नंबर में बदल देती हैं, ताकि ट्रैकिंग मुश्किल हो जाए। 2G नेटवर्क का इस्तेमाल करके लोकेशन छिपाई जाती थी। गिरोह ने 20,000 से ज्यादा फोन नंबर इस्तेमाल किए। देशभर में 1,000 से अधिक शिकायतें आईं।
गिरफ्तार कौन-कौन हुए?
दिल्ली पुलिस ने 7 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। आई-त्सुंग चेन (ताइवानी नागरिक), ये तकनीकी मास्टरमाइंड था। सिम बॉक्स सप्लाई, इंस्टॉल और कॉन्फ़िगरेशन करता था। शशि प्रसाद (53) और परविंदर सिंह (38) दिल्ली में सिम बॉक्स चलाने वाले लोकल ऑपरेटर थे। सरबदीप सिंह (33) और जसप्रीत कौर (28) पंजाब के मोहाली से हैं और दोनों ने पहले कंबोडिया में स्कैम सेंटर में काम किया था। दिनेश कुमार (तमिलनाडु, कोयंबटूर) पैसों की लॉन्ड्रिंग में शामिल हैं। अब्दुस्सलाम (मुंबई) ने सिविल इंजीनियरिंग डिप्लोमा किया था।
इसे भी पढ़ें: भारत का अंतरिक्ष में पहला रिफ्यूलिंग मिशन: OrbitAID का AayulSAT की लॉन्चिंग आज
कहां-कहां छापे मारे गए?
दिल्ली में 5 जगहों पर सिम बॉक्स लगे थे – गोयला डेयरी, कुतुब विहार, दिनपुर, शाहबाद डेयरी। मोहाली में एक पूरा हब था। मुंबई और कोयंबटूर में भी सेटअप तैयार हो रहा था। गिरफ्तार किए गए अपराधिय़ों के पास से 22 सिम बॉक्स, 8 मोबाइल फोन, 3 लैपटॉप, 120 चीनी सिम कार्ड और 10 भारतीय सिम, 7 सीसीटीवी कैमरे, 5 राउटर, 3 पासपोर्ट, कंबोडियन रोजगार कार्ड और दूसरे दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन
ये सिंडिकेट सिर्फ भारत तक सीमित नहीं था। इसके तार चीन, नेपाल, कंबोडिया, ताइवान और पाकिस्तान तक फैले हुए थे। कंबोडिया में लोग ट्रेनिंग लेते और भर्ती होते थे। नेपाल से मुख्य कोऑर्डिनेशन होता था। पाकिस्तानी हैंडलर फंडिंग और तकनीकी मदद देते थे। ताइवान से आई-त्सुंग चेन जैसे लोग तकनीक देते थे। कुछ आरोपी पहले कंबोडिया में स्कैम सेंटर चला चुके थे और वहां से पाकिस्तानी हैंडलर द्वारा भर्ती हुए थे। दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट (इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशंस) ने ये कार्रवाई की। डिप्टी कमिश्नर विनीत कुमार और एसीपी विजय गहलावत के नेतृत्व में टीम ने महीनों की छानबीन के बाद ये बड़ा खुलासा किया। जांच अक्टूबर 2025 से शुरू हुई थी और अभी भी जारी है।














