अगर आप इन दिनों माघ मेला 2026 के दौरान प्रयागराज आए हैं या आने की योजना बना रहे हैं, तो सबसे पहले आपके मन में त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान करने की इच्छा होगी। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम का धार्मिक महत्व तो अपार है ही, लेकिन प्रयागराज केवल आस्था का ही नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को भी अपने भीतर समेटे हुए है। संगम में स्नान और पूजा-पाठ के बाद यदि आप थोड़ा समय निकालें, तो यहां की कुछ खास जगहें आपकी यात्रा को और भी यादगार और अर्थपूर्ण बना सकती हैं। माघ मेले के दौरान इन स्थलों का वातावरण अलग ही आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है। आइए जानते हैं संगम के अलावा प्रयागराज की प्रमुख जगहों के बारे में, जिन्हें माघ मेले में जरूर देखना चाहिए-
लेटे हुए हनुमान जी का मंदिर- संगम क्षेत्र के समीप स्थित लेटे हुए हनुमान जी का मंदिर प्रयागराज के सबसे अनोखे और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यहां भगवान हनुमान की प्रतिमा लेटी हुई अवस्था में विराजमान है, जो देशभर में बहुत ही दुर्लभ मानी जाती है। मान्यता है कि यह मूर्ति स्वयं प्रकट हुई थी। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि समय के साथ यह मूर्ति धीरे-धीरे भूमि में समाती जाती है और बरसात के मौसम में नदी के जल के साथ पुनः ऊपर दिखाई देती है। माघ मेले के दौरान संगम स्नान के बाद यहां दर्शन करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
अक्षयवट- अक्षयवट एक प्राचीन और पवित्र बरगद का वृक्ष है, जिसे ‘अमर वृक्ष’ कहा जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीराम वनवास के समय माता सीता और लक्ष्मण के साथ यहां ठहरे थे। यह वृक्ष आस्था और विश्वास का प्रतीक है। कहा जाता है कि इसे नष्ट करने के कई प्रयास किए गए, लेकिन यह आज भी अडिग खड़ा है। माघ मेले के दौरान यहां श्रद्धालु दर्शन और प्रार्थना के लिए विशेष रूप से आते हैं।
अलोपी देवी मंदिर- प्रयागराज का अलोपी देवी मंदिर एक अत्यंत अनोखा शक्तिपीठ है। यहां देवी की कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि एक पालना स्थापित है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी स्थान पर माता सती का दाहिना हाथ गिरकर लुप्त हो गया था। इसी कारण देवी को ‘अलोपी’ यानी लुप्त होने वाली देवी कहा जाता है। माघ मेला और कुंभ के दौरान यहां श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है और मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से भर जाता है।

















