ईरान में हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं। वहां जनता सड़कों पर है। लोग ईरान में राजशाही की बहाली करने और अली खामेनेई को सत्ता से बेदखल करने के लिए लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे निपटने के लिए इस्लामी सरकार ने देशभर में इंटरनेट बंद हाल ही में पूरे देश में इंटरनेट पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
विरोध प्रदर्शन कैसे शुरू हुए
ये सारे विरोध पिछले महीने के आखिर से चल रहे हैं, यानी दिसंबर 2025 के अंत से। शुरुआत तेहरान के ग्रैंड बाजार से हुई, जहां दुकानदारों ने रियाल की तेज गिरावट और महंगाई के खिलाफ आवाज उठाई। रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया, जिससे खाने-पीने की चीजों, दवाइयों और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें आसमान छूने लगीं। महंगाई बहुत तेज है, पिछले साल से खाने का औसत दाम 70% से ज्यादा बढ़ गया है, और दवाइयां भी 50% महंगी हो गई हैं।
धीरे-धीरे ये विरोध सिर्फ आर्थिक मुद्दों तक नहीं रहा। लोग सड़कों पर उतर आए, और नारे बदल गए – “तानाशाह मुर्दाबाद”, “इस्लामिक रिपब्लिक मुर्दाबाद” जैसे। कई जगहों पर शाह के समर्थन में नारे लगे, जैसे “पहलवी वापस आएगा”। ये प्रदर्शन अब 12वें दिन में हैं, और पूरे देश में फैल चुके हैं – तेहरान से लेकर तबरीज, इस्फहान, मशहद, केरमान, कुर्दिस्तान के इलाकों तक। ग्रामीण इलाकों में भी लोग शामिल हो रहे हैं।
रेजा पहलवी की लोगों से अपील
निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी (जो शाह के बेटे हैं) ने बाहर से वीडियो मैसेज जारी करके लोगों से कहा कि 8 और 9 जनवरी को बड़े पैमाने पर सड़कों पर उतरें। उन्होंने लिखा, “ईरान की महान जनता, दुनिया आपकी तरफ देख रही है। एकजुट होकर अपनी मांगें जोर से कहो।” उन्होंने चेतावनी भी दी कि इस्लामिक रिपब्लिक, उसके लीडर और रेवोल्यूशनरी गार्ड्स पर दुनिया और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नजर रखे हुए हैं। दमन की सजा मिलेगी।
उनके कॉल के बाद ही 8 जनवरी की शाम को विरोध और तेज हो गए। तेहरान में लोग घरों की बालकनी से चिल्लाए, सड़कों पर जमा हुए। हजारों की संख्या में लोग दिखे। कई शहरों में बाजार बंद हो गए, दुकानदारों ने हड़ताल की – खासकर कुर्द इलाकों में। ये हड़ताल कुर्द पॉलिटिकल ग्रुप्स के कॉल पर हुई।
इंटरनेट और फोन बंद
सरकार ने विरोध शुरू होते ही इंटरनेट और टेलीफोन लाइनें बंद कर दीं। नेटब्लॉक्स (एक इंटरनेट मॉनिटरिंग ग्रुप) ने कहा कि ईरान अब पूरे देश में इंटरनेट ब्लैकआउट में है। ये पहले से चल रही डिजिटल सेंसरशिप का अगला कदम था, जो लोगों को बात करने और जानकारी शेयर करने से रोकता है। इस बीच ईरानी सुरक्षा बलों ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया। तेहरान में कई जगह टकराव हुए। कुछ रिपोर्ट्स में ड्रोन से लोगों की पहचान करने की बात कही गई। तबरीज एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स रोक दी गईं, और कई इलाकों में NOTAM जारी किए गए। राज्य मीडिया ने कहा कि सुरक्षा बलों के कुछ लोग घायल या मारे गए, लेकिन विरोध की असल तस्वीर नहीं दिखाई।
नुकसान और आंकड़े
ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (अमेरिका बेस्ड) के मुताबिक, अब तक कम से कम 39 लोग मारे गए हैं (कुछ रिपोर्ट्स में 45 तक), जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। 2,260 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कई जगह अस्पतालों में छापे मारे गए, घायलों को उठा लिया गया।
ये विरोध अब सिर्फ महंगाई का नहीं रहे। लोग आजादी, बदलाव और रिजीम के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं। नेता नहीं है कोई एक, लेकिन गुस्सा पूरे देश में एक जैसा है। इंटरनेट बंद होने से बाहर की दुनिया को सही जानकारी मिलना मुश्किल हो गया है।

















