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भारत की सभ्यतागत परंपरा में निहित हैं कालातीत नेतृत्व के सूत्र : उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि स्वामी प्रभुपाद का जीवन सेवा, अनुशासन और नैतिक नेतृत्व का आदर्श है। “सिंग, डांस एंड लीड” पुस्तक आधुनिक नेतृत्व को नई दिशा देती है।

Written byएजेंसीएजेंसी — edited by Shivam Dixit
Jan 7, 2026, 07:37 pm IST
inभारत, दिल्ली

नई दिल्ली (हि.स.) । उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि भारत एक सभ्यतागत नेता रहा है, जिसकी परंपराओं में मूल्यों, सेवा और आत्म-अनुशासन पर आधारित नेतृत्व की गहरी समझ निहित है। उन्होंने कहा कि श्रील ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद का जीवन इसी परंपरा का सशक्त उदाहरण है, जो उद्देश्य, विनम्रता और नैतिक स्पष्टता पर आधारित नेतृत्व को दर्शाता है।

उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में पुस्तक विमोचन कार्यक्रम

उपराष्ट्रपति ने यह विचार बुधवार को यहां उपराष्ट्रपति एन्क्लेव परिसर में आयोजित एक कार्यक्रम में व्यक्त किए, जहां उन्होंने लेखक हिन्दोल सेनगुप्ता की पुस्तक “सिंग, डांस एंड लीड: श्रील प्रभुपाद के जीवन से नेतृत्व के सबक” का विमोचन किया।

तेजी से बदलती दुनिया में स्वामी प्रभुपाद की प्रासंगिकता

उपराष्ट्रपति ने कहा कि तेज़ी से बदलती दुनिया में स्वामी प्रभुपाद के विचार और शिक्षाएं पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी प्रभुपाद ने ऐसे संस्थानों की स्थापना की, जो आने वाली पीढ़ियों तक मानवता की सेवा करते रहेंगे।

नेतृत्व की सच्ची कसौटी और वैश्विक प्रभाव

उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व की सच्ची कसौटी यह है कि भले ही बहुत से लोग उनका नाम न जानते हों, लेकिन दुनिया भर में करोड़ों लोग उनके कार्यों से प्रभावित हैं।

उच्च आयु में वैश्विक यात्रा और जीवन पद्धति का प्रसार

उन्होंने स्मरण कराया कि अधिक आयु में भी स्वामी प्रभुपाद ने महाद्वीपों की यात्रा की और केवल एक धार्मिक दर्शन ही नहीं, बल्कि अनुशासन, भक्ति और आनंद पर आधारित जीवन पद्धति को विश्व के सामने प्रस्तुत किया।

इस्कॉन की स्थापना और नेतृत्व का प्रमाण

वर्ष 1966 में अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ (इस्कॉन) की स्थापना का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इसकी वैश्विक सफलता अधिकार नहीं, बल्कि दृढ़ विश्वास, सेवा और स्पष्ट दृष्टि पर आधारित नेतृत्व का प्रमाण है।

“सिंग, डांस एंड लीड” का केंद्रीय संदेश

पुस्तक के केंद्रीय विचार को रेखांकित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि “सिंग, डांस एंड लीड” यह सशक्त संदेश देती है कि नेतृत्व आनंदमय, सहभागितापूर्ण और मानवीय हो सकता है।

प्रेरणा से नेतृत्व और सादगी में संस्थान निर्माण

उन्होंने कहा कि स्वामी प्रभुपाद ने आदेश से नहीं, बल्कि प्रेरणा से नेतृत्व किया और सादगी एवं भक्ति में रहते हुए स्थायी संस्थानों का निर्माण किया।

तिरुवल्लुवर की शिक्षाएं और नेतृत्व दृष्टि

संत-कवि तिरुवल्लुवर की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि नेतृत्व की शुरुआत स्पष्ट सोच और ऊंचे आंतरिक दृष्टिकोण से होती है, जिसे सामूहिक कर्म में बदलना आवश्यक है।

नैतिक और परिवर्तनकारी नेतृत्व का अध्ययन

उन्होंने कहा कि यह पुस्तक स्वामी प्रभुपाद के जीवन को नैतिक और परिवर्तनकारी नेतृत्व के एक प्रभावशाली अध्ययन के रूप में प्रस्तुत करती है, जो इतिहास, दर्शन और आधुनिक नेतृत्व चिंतन को जोड़ती है।

सार्वजनिक जीवन और लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए प्रासंगिकता

उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे ग्रंथ सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक हैं, जहां लोकतांत्रिक संस्थाएं विश्वास, संयम और सेवा की भावना पर आधारित होती हैं।

युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत पुस्तक

उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह पुस्तक युवाओं को भौतिक सफलता से परे उद्देश्य की तलाश करने और नेतृत्व को दूसरों के उत्थान तथा व्यापक कल्याण के माध्यम के रूप में देखने के लिए प्रेरित करेगी।

कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य अतिथि

कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, अक्षय पात्र फाउंडेशन के संस्थापक एवं अध्यक्ष तथा इस्कॉन बेंगलुरु के अध्यक्ष मदु पंडित दास, अक्षय पात्र फाउंडेशन के उपाध्यक्ष एवं सह-संस्थापक तथा इस्कॉन बेंगलुरु के वरिष्ठ उपाध्यक्ष चंचलपति दास सहित वरिष्ठ अधिकारी, विद्वान और गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।

Topics: Vice President book launchspiritual leadership IndiaiskconVice President CP RadhakrishnanSpiritual LeadershipSrila PrabhupadaIndian LeadershipSing Dance And Lead BookSrila Prabhupada leadershipISKCON leadership values
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