नई दिल्ली/रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में डॉ. आंबेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने गाय के दिल की झिल्ली से युवक की धमनी रिपेयर कर उसकी जान बचाई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रश करते समय युवक के गर्दन की मुख्य धमनी फट गई थी। कुछ ही मिनटों में वह बेहोश हो गया था। इसके बाद डॉक्टरों ने कई घंटे की जटिल प्रक्रिया के बाद युवक की जान बचा ली। आइए जानते हैं क्या है यह पूरा मामला?
सुबह ब्रश करते समय फटी गर्दन की धमनी
रायपुर निवासी दुकानदार जब सुबह ब्रश कर रहा था उसे गर्दन में तेज दर्द हुआ। उसकी गर्दन तेजी से फूलने लगी। परिवार कुछ समझ पाता इससे पहले ही वह बेहोश हो गया। उसे फौरन डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में भर्ती कराया गया। फौरन युवक की सीटी एंजियोग्राफी हुई और पता चला कि उसकी दायीं कैरोटिड आर्टरी फट चुकी थी। चारों तरफ गुब्बारे जैसी संरचना बन गई थी। यह स्थिति बेहद खतरनाक मानी जाती है और इसमें जान बचाना मुश्किल होता है। इस दुर्लभ स्थिति को चिकित्सकीय भाषा में स्पान्टेनियस कैरोटिड आर्टरी रप्चर कहते हैं।
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डॉ. कृष्णकांत साहू के नेतृत्व में हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग की टीम ने तुरंत ऑपरेशन की योजना बनाई और गाय के दिल की झिल्ली से पेच बनाकर युवक की जान बचाई।
दुनियाभर में ऐसे सिर्फ 10 मामले….
चिकित्सकों का कहना है कि आमतौर पर कैरोटिड धमनी फटने की घटनाएं एथेरोस्क्लेरोसिस, चोट या संक्रमण के कारण होती हैं। लेकिन यह मरीज पूरी तरह स्वस्थ था। इसलिए यह मामला और भी दुर्लभ माना जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस उपलब्धि पर चिकित्सालय की टीम को बधाई दी और इसे प्रदेश के लिए गर्व का विषय बताया। बताया जा रहा है कि विश्व के मेडिकल जर्नल्स में ऐसे केवल 10 ही मामले दर्ज हैं। यही वजह है कि रायपुर का यह केस मेडिकल साइंस के लिहाज से भी अहम है।

















