वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादूरो की परिणति देख दुनिया के अनेक तानाशाह राष्ट्राध्याक्षों और अपने देशों पर जनता का दमन करके एकछत्र राज चलाते आ रहे नेताओं की नींद उड़ी हुई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का वेनेजुएला के राष्ट्रपति के विरुद्ध की गई कार्रवाई का कानूनी पक्ष भले कुछ भी हो, ट्रंप ने दबंग देश की थानेदारी की जीती—जागती मिसाल तो सामने रखी ही है। बताया जा रहा है कि इस परिस्थिति में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई भी चिंताजनक स्थिति में हैं और उनके कभी भी देश से निकल जाने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। ईरान में पिछले करीब दो हफ्ते से सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं जिनसे सरकारी पुलिस सख्ती से काबू पाने की कोशिश तो कर रही है लेकिन वे कोशिशें कामयाब नहीं हो रही हैं। उधर ट्रंप ने अभी पिछले दिनों ही ईरान की सत्ता को कड़ी चेतावनी दी है, ‘अगर जनता को जान से मारा गया तो यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।’ यूके के मीडिया में एक खबर यह भी चल रही है कि खामेनेई रूस भागने की योजना बना रहे हैं।

ईरान में चल रहे जनता के प्रदर्शनों के निशाने पर खामेनेई ही हैं। वे कट्टर इस्लामी कानूनों के अनुसार जनता को दबाए रखने को आमादा हैं तो जनता पहले हिजाब और अब बिगड़ती अर्थव्यवस्था और महंगाई को लेकर गुस्से में है। इस सबके बीच ‘अमेरिका बहुत जबरदस्त जवाब देगा’ की ट्रंप की धमकी लगातार खामेनेई के कानों में गूंज रही है। हालांकि ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान ने कुछ दमखम दिखाने की कोशिश में अमेरिका को धमकियां देने से बाज आने को कहा था, लेकिन ईरान की सत्ता से अमेरिका का कोई और कड़ा प्रतिकार सुनने में नहीं आया है।

ग्रेट ब्रिटेन न्यूज के अनुसार, सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार अली लारीजानी ने ट्रंप की चेतावनी के बाद इतना भर कहा है कि ईरानी विरोध प्रदर्शनों में अमेरिका का कोई भी दखल इस क्षेत्र में और ज्यादा अशांति ही पैदा करेगा।
दो देशों के बीच ऐसे कूटनीतिक—रणनीतिक दांवपेंचों के बीच ईरानी लोग आर्थिक संकट के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, वे सड़कों पर उतरे हुए हैं। वे राजनीतिक सत्ता में बदलाव और व्यक्तिगत आजादी की मांग कर रहे हैं। विरोध प्रदर्शन गत 28 दिसंबर को शुरू हुए थे जब कारोबारी अपनी दुकानें बंद करके सड़कों पर उतरे थे। तेहरान से शुरू हुआ यह आक्रोश अहवाज, हमादान, केशम और मशहद तक फैलता चला गया।
रिपोर्ट है कि उसके बाद से सुरक्षा कर्मियों सहित कम से कम 12 लोग मारे जा चुके हैं। ये प्रदर्शन 2022-2023 के उस आंदोलन के बाद ईरान में सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन बताए जा रहे हैं, जो उस हिजाब विरोधी आंदोलन की ‘आइकन’ बनी महसा अमीनी की हिरासत में मौत के बाद शुरू हुआ था। महसा को कथित तौर पर महिलाओं के लिए ईरान के सख्त ड्रेस कोड का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

इधर यूके के प्रमुख अखबार द टाइम्स के साथ साझा की गई एक खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के पास देश से भाग निकलने का एक ‘बैक-अप प्लान’ भी है, जो ईरान के सुरक्षा बलों के विरोध प्रदर्शनों को दबाने में नाकाम रहने पर प्रयोग किया जाना है। ईरान में इस्लामिक क्रांति के आठ साल बाद उस सत्ता के दमन से बचकर दशकों तक इस्राएली इंटेलिजेंस में काम कर चुके बेनी सब्ती का मानना है कि खामेनेई संभवत: मॉस्को भाग जाएंगे क्योंकि ‘उनके लिए जाने को कोई दूसरी जगह नहीं है।’
खुफिया जानकारी के अनुसार, 86 वर्षीय खामेनेई करीब 20 करीबी सहयोगियों और रिश्तेदारों के साथ तेहरान से भाग निकलने पर विचार कर रहे हैं। एक सूत्र का कहना है कि ‘प्लान बी’ खामेनेई और उनके बहुत करीबी सहयोगियों और परिवार के लिए है, जिसमें उनके बेटे और नामित उत्तराधिकारी मोज्तबा भी शामिल हैं।

बेनी का भी कहना है कि मॉस्को ही पुतिन के प्रशंसक रहे खामेनेई के लिए एकमात्र सही जगह है। दूसरे, ईरानी संस्कृति रूसी संस्कृति से काफी मिलती-जुलती भी है। सवाल है कि क्या अरबपति ईरानी सुप्रीम लीडर सीरियाई तानाशाह अल-असद जैसी हालत में आ जाएंगे? असद ने भी भागने की ऐसी ही रणनीति बनाई थी। दिसंबर 2024 में विपक्षी लड़ाकों द्वारा राजधानी दमिश्क पर कब्जा करने से पहले ही असद विमान से दमिश्क से मॉस्को चले गए थे।
सूत्रों का ही मानना है कि खामेनेई एक बड़े फाइनेंशियल नेटवर्क को नियंत्रित करते हैं, जो एक दमदार अर्ध-सरकारी चैरिटेबल फाउंडेशन है जो अपने भ्रष्ट लेन—देन के लिए बदनाम है। 2013 की रॉयटर्स की एक जांच में इन संपत्तियों की अनुमानित कीमत लगभग 95 अरब डॉलर आंकी गई थी।
उधर ईरान के प्रर्शनकारियों ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स, बासिज मिलिशिया, पुलिस और सेना की दंगा-रोधी इकाइयों के खिलाफ गोलीबारी, आंसू गैस और वॉटर कैनन जैसे क्रूर तरीके इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। ये सभी सुरक्षा बल सीधे खामेनेई को रिपोर्ट करते हैं। खामनेई के पास ही इस्लामिक गणराज्य में सेना, न्यायपालिका और मीडिया संबंधी सर्वोच्च अधिकार सुरक्षित हैं।

















