राजस्थान के जैसलमेर जिले में एटीएस ने एक मौलवी को गिरफ्तार किया है। यह घटना शनिवार रात को हुई, जब ATS की टीम ने देर रात छापेमारी की। मौलवी उत्तर प्रदेश का रहने वाला है और फिलहाल जैसलमेर के तनोट-किशनगढ़ इलाके में कुरिया बेरी गांव में रह रहा था। उस पर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने का आरोप है।
कौन है यह मौलवी?
यह व्यक्ति करीब 45 साल का है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश का निवासी है, लेकिन पिछले कुछ समय से राजस्थान के जैसलमेर जिले में मजहबी काम कर रहा था। गांव में वह मौलवी के तौर पर जाना जाता था। स्थानीय लोग उसे इसी नाम से पुकारते हैं, हालांकि उसका पूरा नाम अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
कहां और कब हुई कार्रवाई?
कार्रवाई शनिवार की देर रात हुई, जब ATS की टीम ने कुरिया बेरी गांव में दबिश दी। यह इलाका तनोट-किशनगढ़ क्षेत्र में आता है, जो भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के बहुत करीब है। जैसलमेर का यह हिस्सा पहले भी कई बार संदिग्ध गतिविधियों के लिए चर्चा में रहा है, जैसे जासूसी या बॉर्डर पार से आने-जाने की कोशिशें शामिल हैं। पूरी ऑपरेशन काफी गोपनीय तरीके से की गई, जिसकी वजह से सुबह तक गांव वालों को ज्यादा कुछ पता नहीं चला।
क्यों हुई हिरासत?
ATS को खुफिया सूचना मिली थी कि इस मौलवी की कुछ संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं। खासकर देश-विरोधी कामों में शामिल होने का शक है। सूत्रों के मुताबिक, बॉर्डर के उस पार (पाकिस्तान) से संपर्क बनाए रखने या ऐसी कोई गतिविधि में हाथ होने की आशंका जताई गई है। खुफिया इनपुट के आधार पर ही टीम वहां पहुंची। अभी तक कोई ठोस सबूत जैसे कोई सामान या दस्तावेज़ सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन प्रारंभिक जांच में कुछ बातें सामने आईं, जिनके आधार पर हिरासत में लिया गया।
क्या मिला?
रात की छापेमारी के बाद मौलवी को हिरासत में लेकर जयपुर के ATS मुख्यालय ले जाया गया। वहां उससे और गहन पूछताछ की जा रही है। ATS की ओर से अभी कोई लिखित बयान जारी नहीं किया गया है। उन्होंने सिर्फ इतना कहा है कि जांच चल रही है और पूरी डिटेल बाद में बताई जाएगी। उल्लेखनीय है कि जैसलमेर का तनोट और किशनगढ़ इलाका बॉर्डर से सटा हुआ है। यहां तनोट मंदिर, लोंगेवाला पोस्ट जैसी जगहें हैं, जो 1971 के युद्ध में चर्चित रहीं। बॉर्डर के इतने नजदीक रहते हुए किसी की संदिग्ध हरकतें होने पर ATS जैसी एजेंसियां तुरंत एक्टिव हो जाती हैं। पिछले कुछ सालों में भी राजस्थान के बॉर्डर जिलों में ISI या अन्य एजेंसियों से जुड़े कुछ मामले सामने आए हैं।

















