गत दिनों विद्या भारती, पंजाब के संपर्क विभाग द्वारा प्रांत कार्यालय, जालंधर में ‘त्याग और बलिदान : सिख गुरु परंपरा का गौरवमय इतिहास’ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
गोष्ठी का शुभारंभ शहीद शिरोमणि श्री गुरु तेगबहादुर जी एवं उनके संपूर्ण परिवार को श्रद्धासुमन अर्पित कर हुआ। मुख्य अतिथि जत्थेदार बाबा गुरदेव सिंह ने अपने उद्बोधन में सिख पंथ की स्थापना के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने सभी गुरुओं के जीवन, उनके संघर्ष, शहादत एवं पारिवारिक बलिदानों का स्मरण कराया।
उन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में वर्णित उपदेशों के माध्यम से प्रकृति– जल, वायु, आकाश, पृथ्वी एवं अग्नि की रक्षा का संदेश दिया तथा समाज को एकजुट होकर सामाजिक बुराइयों को दूर करने का आह्वान किया। मुख्य वक्ता सरदार जसबीर सिंह ने सिख गुरुओं के इतिहास, उनके त्याग, तपस्या, शौर्य एवं बलिदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने गुरु परंपरा द्वारा स्थापित मूल्यों को आत्मसात कर उनके कार्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में राजेंद्र कुमार ने शहीदी सप्ताह के महत्व पर कहा कि इन दिनों में केवल उत्सव नहीं, बल्कि अपने धर्म, संस्कृति एवं साहिबजादों के महान बलिदानों को स्मरण करने की आवश्यकता है। ऐसे त्याग और बलिदान की गाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारा कर्तव्य है।













