चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान एक सख्त चेतावनी जारी की है। अगर 85 साल या उससे ज्यादा उम्र के किसी वोटर को, या किसी बीमार, दिव्यांग या गर्भवती महिला को सुनवाई के लिए बुलाया गया, तो संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और उनके सुपरवाइजर के खिलाफ कार्रवाई होगी। ये बात एक सीनियर चुनाव आयोग अधिकारी ने गुरुवार (1 जनवरी 2026) को कही।
क्या है मामला?
पश्चिम बंगाल में SIR चल रहा है, जिसमें वोटर लिस्ट को अच्छे से जांचा जा रहा है। इसमें पुरानी 2002 की वोटर लिस्ट से लोगों को लिंक करना पड़ता है। कई बुजुर्ग, बीमार और दिव्यांग वोटरों को नोटिस मिले और उन्हें दूर-दूर जाकर सुनवाई में हाजिर होना पड़ा। लंबी कतारों में खड़े होने से इन लोगों को काफी तकलीफ हुई। टाइम्स ऑफ इंडिया ने पहले भी कई बार ऐसी खबरें छापी थीं कि बुजुर्ग और बीमार लोग परेशान हो रहे हैं।
इसी वजह से 29 दिसंबर को बंगाल के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (CEO) के दफ्तर ने सभी डिस्ट्रिक्ट इलेक्टोरल ऑफिसर (DEO) और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट्स (DM) को निर्देश दिए। कहा गया कि 85 साल या उससे ज्यादा उम्र के वोटर, बीमार लोग, दिव्यांग और गर्भवती महिलाओं को (अगर वे खुद रिक्वेस्ट करें) सुनवाई के लिए नहीं बुलाया जाए। अगर पहले ही नोटिस भेज दिया गया है, तो फोन से संपर्क करके उन्हें आने से रोकें और उनकी जांच घर पर ही कर लें।
मिली थी शिकायतें
CEO ऑफिस को राज्य भर से कई शिकायतें मिलीं कि इन निर्देशों के बावजूद ऐसे वोटरों को पर्सनली सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है। यहां तक कि गर्भवती महिलाओं के मामले भी आए। सीनियर अधिकारी ने साफ कहा, “हमने DEO को बोल दिया है कि अगर एक भी ऐसा मामला हुआ तो BLO और उनके सुपरवाइजर पर सख्त कार्रवाई होगी। BLO सुपरवाइजर क्या कर रहे हैं? टांग टूटी हुई है या गंभीर बीमारी है, फिर भी कोई सुनवाई वाली जगह क्यों जाए? BLO घर-घर जाकर ऐसी जांच करेंगे।”
अगर ऐसे वोटरों को पहले नोटिस मिल चुका है, तो उन्हें फोन करके बता दें कि न आएं। उनकी वेरिफिकेशन घर पर होगी। सुनवाई का आखिरी हफ्ता है तो जरूरत पड़ने पर BLO उनके घर पर ही सुनवाई करेंगे। अधिकारी ने ये भी कहा कि ऐसे मामले चुनाव आयोग की इमेज को खराब करते हैं।
क्यों जरूरी है ये निर्देश?
चुनाव आयोग का मकसद वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा रखना है, लेकिन किसी को तकलीफ नहीं पहुंचानी है। खासकर बुजुर्गों, बीमारों और कमजोर लोगों को। पहले से ही कई जगहों पर बुजुर्गों को लंबी कतारों में खड़ा देखकर दया आ रही थी। अब आयोग ने साफ कर दिया कि कोई भी BLO या अधिकारी इन निर्देशों को नजरअंदाज नहीं कर सकता, वरना जवाबदेही तय होगी। ये कदम वोटरों की सुविधा और सम्मान के लिए उठाया गया है, ताकि SIR प्रक्रिया में कोई अनावश्यक परेशानी न हो।

















