चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने नए साल के अपने संबोधन में एक बार फिर ताइवान के मुद्दे पर बात की और पूरी दमदारी दिखाते हुए कहा कि यह तो चीन में मिलकर ही रहेगा। टेलीविजन पर सीधे प्रसारित हुए इस संदेश में उन्होंने कहा कि ताइवान का चीन के साथ एकीकरण ‘अवश्यमभावी’ है। इस वक्तव्य में शी जिनपिंग ने देश की बढ़ती रक्षा प्रगति का भी उल्लेख किया और ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया के सबसे बड़े बांध के निर्माण की बात की।
राष्ट्रीय टेलीविजन पर प्रसारित 2026 के नए साल के संदेश में राष्ट्रपति शी ने आगे कहा कि ताइवान जलडमरूमध्य के दोनों किनारों पर चीनी लोगों के बीच खून के रिश्ते का बंधन है। उन्होंने कहा, “हमारी मातृभूमि का एकीकरण समय की मांग है और यह होकर रहेगा। यह बात उन्होंने उस स्व-शासित द्वीप के आसपास पिछले तीन दिन के दौरान चीनी सेना द्वारा किए गए अत्याधुनिक रक्षा उपकराणों के अभ्यासों के बीच कही। जगजाहिर बात है कि ताइवान को चीन अपनी ‘मुख्य भूमि का हिस्सा’ मानता है।
साल 2022 के बाद यह छठी बार है जब चीन ने ताइवान पर ‘कब्जा करने’ का अत्याधुनिक वायु सेना जेट, विमानवाहक पोत, मिसाइलों और ड्रोन के साथ गहन सैन्य अभ्यास किया है। 72 साल के शी पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के अब तक के सबसे लंबे समय तक इस पद पर रहने वाले नेता हैं। उन्होंने बीजिंग द्वारा आर्थिक, रक्षा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में की गई प्रगति को भी सबके सामने रखा।

वीनी राष्ट्रपति ने ब्रह्मपुत्र पर सबसे बड़ा बांध बनाने का उल्लेख करते हुए कहा, “यारलुंग जंगबो (ब्रह्मपुत्र नदी) के निचले इलाकों में पनबिजली परियोजना का निर्माण शुरू हो गया है।” यहां बता दें कि चीन ने औपचारिक रूप से अरुणाचल प्रदेश से सटी सीमा के करीब, पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर 170 अरब डॉलर के बांध का निर्माण शुरू किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत और बांग्लादेश के निचले नदी तटवर्ती राज्यों के लिए इस बांध के बन जाने से बाढ़ को लेकर चिंता होनी स्वाभाविक है।
शी ने चीन के पहले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापुल्ट सिस्टम से लैस विमानवाहक पोत के चालू होने के बारे में भी बात की। फुजियान नाम का यह जहाज यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड के बाद दुनिया का दूसरा ऐसा विमानवाहक पोत है। शी ने AI में चीन की प्रगति का जिक्र करते हुए कहा, “ह्यूमनॉइड रोबोट ने कुंग फू किक मारी है और ड्रोन ने शानदार लाइट शो किए हैं।”
चीनी अर्थव्यवस्था पर, जो लगभग पांच प्रतिशत की धीमी वृद्धिदर से जूझ रही है और घटते निर्यात पर अधिक निर्भर है, राष्ट्रपति शी ने कहा कि चीन की जीडीपी इस साल 20 खरब डॉलर को पार करने वाली है। उनका कहना था, “हमारा आर्थिक उत्पादन एक के बाद एक पड़ाव पार करता गया है और इस साल इसके 140 खरब युआन (20 खरब डॉलर) तक पहुंचने की उम्मीद है।” शी देश से आर्थिक विकास और तकनीकी तरक्की को बढ़ावा देने के प्रयासों को दोगुना करने का आह्वान किया।

ध्यान दें, उनका यह आह्वान ऐसे समय में आया है जब बीजिंग पर घरेलू स्तर पर आर्थिक बदलाव के लिए दबाव पड़ रहा है, जबकि वह उलझनभरी भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने पर ध्यान दे रहा है। कम्युनिस्ट चीन आने वाले वर्षों में वाशिंगटन के साथ प्रतिद्वंद्विता में अपनी स्थिति मजबूत करने पर ज्यादा जोर दे रहा है।
कल ही चाइनीज पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस (CPPCC) की बैठक में राष्ट्रपति शी ने कहा है कि चीन और अधिक सक्रिय नीतियां लागू करके यह सुनिश्चित करेगा कि अर्थव्यवस्था उचित दर से बढ़े और नए साल में सामाजिक स्थिरता सुनिश्चित हो।

















