संभल जिले में जामा मस्जिद के ठीक बगल में मौजा कोट (अंदर चुंगी) वाली जगह पर एक कब्रिस्तान है, जिसकी जमीन करीब 0.470 हेक्टेयर है। इस जमीन का सीमांकन यानी पैमाइश मंगलवार को होने वाली है। यह जमीन सरकारी रिकॉर्ड में नान जेड-ए कैटेगरी में दर्ज है, यानी यह कब्रिस्तान के लिए आरक्षित मानी जाती है। लेकिन लंबे समय से यहां अवैध कब्जे की शिकायतें आती रही हैं।
पिछले साल नवंबर 2024 में जब जामा मस्जिद का सर्वे हुआ था, तब हुई हिंसा में इसी कब्रिस्तान वाली जमीन पर बने मकानों से पथराव की बात सामने आई थी। श्री कल्कि सेना (निष्कलंक दल) के राष्ट्रीय संयोजक और वकील सुभाषचंद्र त्यागी ने 12 दिसंबर को जिलाधिकारी को एक शिकायत दी। इसमें उन्होंने कहा कि 1980 के दशक में यह जमीन पूरी तरह खाली थी और सिर्फ टीला-सा दिखता था। लेकिन पिछले 20-25 सालों में यहां कब्जा करके मकान और दुकानें बना ली गईं। इसलिए अब इसकी सही पैमाइश और अवैध कब्जे हटाने के लिए यह सर्वे हो रहा है।
सुरक्षा के इंतजाम कितने पुख्ता हैं
सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। सोमवार शाम को एसडीएम रामानुज, एएसपी कुलदीप कुमार, सीओ आलोक भाटी और सदर कोतवाल गजेंद्र सिंह ने पुलिस, पीएसी और आरआरएफ की टीम के साथ पूरे इलाके का चक्कर लगाया। फ्लैग मार्च निकाला गया, जिसमें पुलिस फोर्स ने पैदल मार्च किया ताकि इलाके में शांति का माहौल बना रहे और लोग देखें कि हालात नियंत्रण में हैं। ड्रोन से लगातार निगरानी की जा रही है, साथ ही सीसीटीवी कैमरों का भी इस्तेमाल हो रहा है।
पैमाइश के दिन भी पुलिस, पीएसी और आरआरएफ की फोर्स तैनात रहेगी। एएसपी कुलदीप कुमार ने सत्यव्रत पुलिस चौकी पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। ड्रोन की नजर हर तरफ रहेगी और कोई भी गड़बड़ होने की गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी। प्रशासन का पूरा फोकस यही है कि काम शांतिपूर्ण तरीके से हो जाए और कोई अनहोनी न हो।
कब्रिस्तान सर्वे क्यों जरूरी
यह पैमाइश इसलिए हो रही है क्योंकि जमीन पर बने निर्माण को अवैध बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह कब्रिस्तान की जमीन है, लेकिन यहां मकान और दुकानें बन गईं, जो नियमों के खिलाफ है। पिछले सर्वे के दौरान हुई घटना में भी इसी इलाके से पथराव की बात आई थी, इसलिए अब प्रशासन सतर्क है। जमीन का साइज छोटा है – सिर्फ 0.470 हेक्टेयर – लेकिन जामा मस्जिद के इतने करीब होने की वजह से यह संवेदनशील हो गया है। प्रशासन चाहता है कि पैमाइश के जरिए सही सीमाएं तय हों और जो भी अवैध कब्जा है, उस पर कार्रवाई हो सके।















