Exclusive: BJP के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष बोले-भारत बचाने के लिए बंगाल जीतना होगा; पहला सबसे बड़ा इंटरव्यू
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Exclusive: BJP के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष बोले-भारत बचाने के लिए बंगाल जीतना होगा; पहला सबसे बड़ा इंटरव्यू

इस साक्षात्कार में उनसे पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर ने कई विषयों पर बातचीत की। आप इस साक्षात्कार को पाञ्चजन्य के यूट्यूब पर भी देख सकते हैं। इस साक्षात्कार में बीएल संतोष ने साफ कहा कि भारत को बचाने के लिए पश्चिम बंगाल को जीतना होगा।

Written byPanchjanyaPanchjanya — edited by Lalit Fulara
Dec 27, 2025, 10:34 am IST
inभारत

नई दिल्ली: पाञ्चजन्य के गोवा सागर मंथन : सुशासन संवाद के चौथे संस्करण में भाजपा के राष्‍ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष का विषेष साक्षात्कार लिया गया। यह किसी भी मीडिया समूह को दिया गया उनका पहला साक्षात्कार है। इस साक्षात्कार में उनसे पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर ने कई विषयों पर बातचीत की। आप इस साक्षात्कार को पाञ्चजन्य के यूट्यूब पर भी देख सकते हैं। इस साक्षात्कार में बीएल संतोष ने साफ कहा कि भारत को बचाने के लिए पश्चिम बंगाल को जीतना होगा। उन्होंने कहा कि बंगाल में कोई राजनीतिक लड़ाई नहीं है, बल्कि एक सभ्यतागत युद्ध है। हमें इसे उसी दिशा में, उसी तरीके से आगे बढ़ाना है। हम सब एक ही नजरिए से देखते हैं-भारत को बचाने का नजरिया। बंगाल जीतना होगा, यह केवल भाजपा शासित 19वां-20वां राज्य नहीं होगा, यह भारत को बड़ी जनसांख्यिक चुनौती से बचाने की दिशा में कदम है। इसलिए हम बंगाल जीतना चाहते हैं और जीतेंगे।

आइए जानते हैं कि अपने इस पहले सबसे बड़े साक्षात्कार में बीएल संतोष ने क्या कहा?


8- 9 महीने पहले से ही चल रही थी बीजेपी अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया
उनसे पूछा गया था कि भाजपा ने हमेशा विरोधियों को चौंकाने वाले बड़े लक्ष्य रखे हैं। लेकिन अध्यक्ष के चुनाव को लेकर क्या अब पार्टी खुद को ही चौंका रही है? इस पर उन्होंने कहा कि इसमें चौंकाने वाली कोई बात नहीं है। बाहर की दुनिया हर निर्णय को अचानक देखती है। बीजेपी अध्यक्ष के चुनाव की हमारी प्रक्रिया भी 8-9 महीने से चल रही थी। निर्णय होने पर घोषणा हुई। इसमें चौंकाने का भाव हो सकता है, लेकिन यह कोई साजिश नहीं है। जिस दिन निर्णय हुआ, उसी दिन सार्वजनिक हुआ।

उन्होंने कहा कि जब जे.पी.नड्डा का कार्यकाल पूरा हुआ तो हम मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान चुनावों के दौर में थे। ये हमारे लिए महत्वपूर्ण थे। जब ये चुनाव हुए तो नवंबर-दिसंबर में लोकसभा चुनाव नजदीक आ गए। इसलिए समय नहीं मिला। तो हमने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर अनुमति ली कि अध्यक्ष का चुनाव थोड़े समय बाद करेंगे। उसके बाद संगठन में चर्चा की प्रक्रिया शुरू हुई जो 8-9 महीने चली। उन्होंने कहा कि वर्तमान चुनावी परिस्थितियों के कारण भी अध्यक्ष के चुनाव में समय लगा।

BJP में आंतरिक अनुशासन को दिया जाता है सबसे अधिक महत्व
भाजपा के राष्‍ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने पाञ्चजन्य संपादक हितेश शंकर से बातचीत में कहा कि BJP में आंतरिक अनुशासन को बहुत महत्व दिया जाता है। पार्टी में आंतरिक असहमति के लिए पूर्ण स्वतंत्रता है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी में लोकतंत्र पक्का है। संघ और भाजपा का संबंध को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि संगठन चलाने में हमें 100 प्रतिशत आजादी है। हम दुनिया भर के शुभचिंतकों से चर्चा करते हैं। यहां तो शुभचिंतक नहीं, हमारा मायका है। यहां भी बात तो करते ही हैं। उन्होंने कहा कि संघ हमारा सबसे बड़ा वेल-विशर स्त्रोत है जहां हम सहज रूप से बात करते हैं।

BJP के लिए सत्ता अपने विचार को आगे बढ़ाने का मार्ग
उन्होंने कहा कि हमारे लिए सत्ता भोग के लिए नहीं है। चुनाव जीतने के लिए हर कदम जरूरी नहीं है। ‘डीकाॅलोनाइजेशन’ जैसे निर्णय से ‘लिबरल’ समर्थन खोया, फिर भी इसे कर रहे हैं, क्योंकि हम वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध हैं। राष्ट्र को यह चाहिए। हमारे लिए सत्ता अपने विचार को आगे बढ़ाने का मार्ग है। जहां सत्ता मिली, वहां विचार लागू किए। सत्ता लक्ष्य है, लेकिन राष्ट्रहित के लिए।

BJP केंद्रीकृत पार्टी नहीं है… पार्टी का आंतरिक लोकतंत्र मजबूत
उनसे पूछा गया था कि विपक्ष आरोप लगाता है कि भाजपा में सब कुछ केंद्रीकृत है। इस पर उन्होंने कहा कि भाजपा केंद्रीकृत नहीं है। इसलिए जब कोई समस्या आती भी है तो उसे दूर करने में हमें कोई कठिनाई नहीं होती। नियम संसदीय समिति ही बनाती है, लेकिन वह लचीला रहता है। इसे केंद्रीकृत नहीं कहा जा सकता। देश में हमारे 16,000 मंडल अध्यक्ष (गोवा सहित) हैं।

पाञ्चजन्य के गोवा सागर मंथन : सुशासन संवाद के चौथे संस्करण में भाजपा के राष्‍ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष

हमने नियम बनाया कि 45 वर्ष से कम उम्र का मंडल अध्यक्ष नहीं होगा। इसमें 99.6 प्रतिशत सफलता मिली। इसका चुनाव स्थानीय स्तर पर होता है, दिल्ली से तय नहीं होता। इसका पता मंडल अध्यक्ष को भी नहीं होता है। यहां तक कि चुनाव पूर्व मुख्यमंत्री को भी पता होता है। 45 वर्ष से नीचे की उम्र सीमा का नियम संगठन को युवा बनाने के लिए, उसमें नयापन लाने के लिए है। यदि यही केन्द्रीयकरण है, तो स्वागत है। अन्यथा, कोई केन्द्रीकृत प्रक्रिया नहीं। लोकल स्तर से सुझाव आते हैं, लागू करते हैं।

बीएल संतोष से सवाल पूछा गया था कि संगठन मंत्री के तौर पर आप व्यक्ति केंद्रित और संगठन केंद्रित राजनीति को कैसे देखते हैं? इस पर उन्होंने कहा कि 75 वर्ष में कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों ने व्यक्ति-केंद्रित राजनीति को प्रथा बना दिया। हमारी प्रक्रिया बहुआयामी है। अगर पार्टी ने 14 करोड़ सदस्य बनाए हैं तो ऐसा नहीं कि किसी एक व्यक्ति ने यह किया। 57 लाख कार्यकर्ताओं के कारण यह उपलब्धि हासिल हुई, जिन्होंने 2-10 लोगों को सदस्यता दिलाई। यही वह तरीका है जो विकेंद्रीकरण करता है, लेकिन श्रेय अध्यक्ष को मिलता है। पेशेवर दुनिया से ज्यादा सुगठित प्रक्रिया हमारे यहां है। इसलिए हम सक्रिय हैं, विकास कर रहे हैं।

उनसे पूछा गया था कि भाजपा में अनुशासन कड़ा है। ऐसे में कार्यकर्ता प्रश्न उठाते हैं या भय के कारण प्रश्न नहीं उठाते या प्रेरणावश चुप रह जाते हैं? पार्टी इसका समाधान कैसे करती है? जो ऊपर के दायित्व वाले कार्यकर्ता हैं, उनका दायित्व है कि नीचे के स्तर के लोग खुले रहें। इतने बड़े संगठन में इस मामले में हम बहुत हद तक सफल हैं। लेकिन हर व्यक्ति की सभी बातें सुनना भी संभव नहीं है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए तो मानवीय दृष्टि से यह असंभव है। लेकिन कोई न कोई सुनेगा, इसकी व्यवस्था है। संतुष्टि के लिए भी व्यवस्था है। मैं यह नहीं कह रहा कि हमारा संगठन बहुत आदर्श संगठन है। पिछले 10-15 साल में संगठन का आकार इतना बढ़ गया है कि किसी को पूर्ण रूप से संतुष्ट करना मुश्किल है। लेकिन हम पूरी निष्ठा से प्रयास करते हैं, इसके लिए कई फोरम बनाए हैं। कुछ बच जाता है, लेकिन कहीं न कहीं सुन लिया जाता है। 100 प्रतिशत तो नहीं कह सकता, लेकिन काफी हद तक ऐसा होता है।

संवैधानिक संस्थाओं को क्षति पहुंचा रहा है विपक्ष
कई बार विपक्ष संविधान या संवैधानिक संस्थाओं को आगे रखकर भाजपा पर हमला करता है। भाजपा पर चुनाव आयोग या अन्य संवैधानिक संस्थाओं को नष्ट करने का आरोप लगाता है। इसे आप कैसे देखते हैं? हमारे कन्नड़ समाज में दो शब्द हैं-इति (लोअर बॉटम) और मिति (टॉप बॉटम)। माता-पिता या शिक्षक बचपन में सिखाते थे-न इति से नीचे गिरना, न मिति से ऊपर चढ़ना। घमंड न आए, पतन न हो। दुख के साथ कह रहा हूं- विपक्ष इति पर जा पहुंचा है। ओम बिरला जैसे योग्य व्यक्ति की आलोचना तक तो ठीक है, लेकिन उनकी बेटी-दामाद के पीछे पड़ना! केंद्रीय चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बेटे-बहू को घसीटना! इतने बेशर्म लोग आज विपक्ष में बैठे हैं! ये लोग योग्य प्रशासक हैं, अनावश्यक उनकी व्यक्तिगत जानकारी निकाल कर संवैधानिक संस्थाओं को क्षति पहुंचा रहे हैं। ऐसा करके वे न तो देश का और न ही समाज का भला कर रहे हैं। यह विपक्ष का अस्थिरता लाने का प्रयास है। हम किसी भी तरह के राजनीतिक विरोध का निष्पक्षता से सामना करने को तैयार हैं। लेकिन देश को अस्थिर करने वाली यह हरकत ऐसी है, जिसकी हर किसी को समय रहते निंदा करनी चाहिए। हम यह दुख के साथ देख रहे हैं, लेकिन देश आगे बढ़ेगा, यह विश्वास है।

पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष से बातचीत करते हुए

बीजेपी संगठन के बारे में क्या कहा बीएल संतोष ने?

बीएल संतोष ने कहा कि बीजेपी संगठन की खासियतें अनुशासन और सूचना पालन हैं। यह हमारे पास है और आगे भी रहेगी। हमारी राह सीधी नहीं, नेविगेट करनी पड़ती है। इसमें व्यक्तिगत समझ और बुद्धिमत्ता लगती है। संगठन का काम समतल मैदान में मार्च पास्ट करने जैसा नहीं है। अनुशासन-सूचना पालन सर्वोपरि है। लेकिन किसे कितनी सूचना देनी है या नहीं देनी है, इसके लिए विवेक का उपयोग करना पड़ता है। मुझे लगता है कि संगठन में दोनों ही मजबूत हैं।

इसलिए संगठन सतत सक्रिय है और रहेगा। जितना आज है इतना ही नहीं, हम दोगुना परिश्रम करेंगे, क्योंकि अभी भी चार बड़े राज्य (केरल, तमिलनाडु, प. बंगाल, पंजाब) वैचारिक और शासन की दृष्टि से अपने हिस्से में लेने का काम बाकी हैं। हम रणनीति से राज्य नहीं जीतते। रणनीति तो आखिर में आती है। हम तो समाज का स्नेह और सम्मान पाने में लगे हैं। इसमें लंबा समय लगता है। 20 साल बाद हमारा संगठन और बढ़ेगा, उसका विस्तार होगा। अभी हमारे पास 1800 विधायक हैं। हम सोच रहे हैं कि अन्य 1500 सीटों पर क्यों हारे? हम विश्लेषण करते रहते हैं। लोकसभा चुनाव से पहले कारण जानने के लिए हमने 1 लाख हारे हुए बूथों पर कार्यकर्ता भेजे। संगठन में काम करने की प्रेरणा हमें परिवार से मिली, इसका गर्व है।

हम बिहार मॉडल को पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी में लागू नहीं कर सकते। ये केवल अनुभव हैं, जिसे लेकर हम आगे बढ़ेंगे। 20 साल में देश को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करने के प्रधानमंत्री जी के संकल्प को हम 1000-2000 किलोमीटर आगे लेकर जाएंगे। आज हमारे सामने चुनौती है, विचार के अनुरूप उसी रूप में आखिरी पंचायत, नगर निकाय तक उसे पहुंचाना। हर बार वही ताकत लेकर आना चाहिए, जिससे हमें जन समर्थन मिल रहा है। अब हमें यह निर्धारित करना है कि हम कैसे इसे कार्यशैली में लाकर पूरा करेंगे। इसके लिए हम प्रयास कर रहे हैं।

Topics: BJP National Organization NewsBL Santosh Statement on BengalBL Santosh Exclusive InterviewBJP National General Secretary BL SantoshBJP Bengal Strategy 2025 BL Santosh Interview
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