बांग्लादेश में आज फिर से एक और हिन्दू युवक की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। उस पर यह आरोप लगाया गया था कि वह अवैध वसूली जैसी घटनाओं में लिप्त था। मगर उसे भी पुलिस के हवाले न करके मार डाला गया। भीड़ का निजाम जहां होता है, वहाँ ऐसा ही होता है। वहाँ भीड़ जो चाहती है, वही होता है। कहते हैं कि भीड़ की पहचान नहीं होती, वह केवल भीड़ होती है। मगर भीड़ की पहचान होती है, भीड़ का चेहरा होता है और उस पर साफ लिखा होता है कि वह कहाँ से और किससे संचालित हो रही है?
और जब भीड़ का असली चेहरा सामने आने लगता है, हैवान भीड़ की सही पहचान सामने स्पष्ट होने लगती है तो एकदम से ही उसके बचाव करने वाली ताकतें उसकी रक्षा के लिए आ जाती हैं और फिर उसके बचाव के लिए तमाम परदे लगा लेती हैं।
विदेशी मीडिया की हिन्दू घृणा
ऐसा ही एक असफल प्रयास विदेशी मीडिया ने बांग्लादेश में जिहादी भीड़ द्वारा दीपू चंद्र की हत्या को लेकर किया है। पहले तो बहुत ही कम मीडिया संस्थानों ने दीपू चंद्र की निर्मम हत्या को लेकर कवरेज किया है। उस्मान हादी की हत्या का जमकर कवरेज किया गया, परंतु बेअदबी के नाम पर पीट-पीट कर मार डालने वाली भीड़ की जिहादी मानसिकता पर कुछ भी नहीं लिखा।
हाँ, न्यूयॉर्क टाइम्स ने अवश्य इस घटना को लिखा, परंतु बांग्लादेश के जिहादी तत्वों की निंदा के लिए नहीं, अपितु केवल और केवल भारत को घेरने के लिए और भारत को ही इस घटना के लिए दोषी ठहराने के लिए। इस लेख का शीर्षक था “Lynching of a Hindu in Bangladesh Fans Fears of Rising Intolerance।”
सैफ हसन और मुजीब मसाल ने जिहादी कट्टरता का किया बचाव
न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक्स पर यह गर्व से पोस्ट किया कि वह पहला ऐसा विदेशी पोर्टल है, जिसने इस घटना को लेकर लिखा है। परंतु Saif Hasnat and Mujib Mashal की यह रिपोर्ट बांग्लादेश और उसमें बढ़ रही जिहादी कट्टरता को तनिक भी कठघरे में नहीं खड़ा करती है। बल्कि वह साउथ एशिया मे बढ़ रही रिलीजियस इंटॉलरेंस के वृहद पैटर्न में ही नई घटना के रूप में एक नई घटना के रूप में इसे बताती है। उसने पाकिस्तान में बेअदबी के आरोपों मे वृद्धि, इस्लामिस्ट चरमपंथ में वृद्धि के विषय में एक पंक्ति लिखी है और साथ ही अफगानिस्तान में तालिबान के शासनकाल में हिंदुओं और सिखों के वहाँ से भागकर आने की घटना लिखी है, परंतु उसने इसके बाद भारत का उल्लेख किया है।
उसने लिखा कि भारत में हिन्दू विजिलेंटस मुस्लिमों और अन्य अल्पसंख्यकों को निशाना बनाते रहते हैं और वे अधिकतर बीफ (गौमान्स) के संदेह में करते हैं, क्योंकि हिंदुओं का एक बड़ा वर्ग गाय को पवित्र मानता है।
जिहादी भीड़ को जिहादी भीड़ नहीं कहा
इस पूरी रिपोर्ट में न्यूयॉर्क टाइम्स ने कहीं भी मजहबी नारे लगाती भीड़ की जिहादी प्रवृत्ति को नहीं लिखा है। उसने इसे महज एक ऐसी घटना माना है, जो साउथ एशिया में बढ़ रही रिलीजियस असहिष्णुता की एक कड़ी है। यह रिपोर्ट या लेख कहीं न कहीं यह बताने का प्रयास करती है कि मुस्लिम और हिन्दू दोनों ही एक ही समान हैं और दोनों ही एक दूसरे के प्रति असहिष्णु हैं। भारत में हिन्दू मुस्लिमों के प्रति असहिष्णु है।
लव जिहाद पर चुप्पी
यह गजब बात है कि न्यूयॉर्क टाइम्स भारत में लगातार बढ़ रहे लव जिहाद के मामलों पर कुछ नहीं लिख रहा है। यह और भी दिलचस्प है कि जिस मीडिया ने आज तक ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग की सच्चाई को ही नहीं माना है, वह आखिर कैसे भारत में लव जिहाद पर हिंदुओं के पक्ष में लिखेगा? परंतु इतनी निर्मम घटना को भी साधारण घटना बना देगा पश्चिमी मीडिया, इसकी सहज कल्पना नहीं की जा सकती है, परंतु भारत और हिंदुओं के प्रति घृणा से भरी मीडिया से यही अपेक्षा की जा सकती है। वह संतुलन साधने का असफल प्रयास है, जिसे यह कहकर प्रस्तुत किया जा रहा है कि ऐसा हर जगह हो रहा है।
न्यूयॉर्क टाइम्स का दोहरापन
परंतु एक घटना न्यूयॉर्क टाइम्स नहीं कवर कर रहा है कि बांग्लादेश और पाकिस्तान में हिंदुओं अर्थात काफिरों के प्रति और उनके अस्तित्व के प्रति ही घृणा है, और जो उनके मुल्क और दुनिया में रहने के लिए काबिल ही नहीं है। वे यह बर्दाश्त ही नहीं कर सकते हैं कि कोई काफिर एक तो उनके मुल्क में रह कैसे सकता है और दूसरा वह यह उनके मजहब के विषय में कुछ बोल भी सकता है? राजनीतिक अस्थिरता का भी बहाना इसमें दिया गया है। मगर राजनीतिक अस्थिरता के कारण न ही इस्लामिक मजहबी इमारतों को किसी भी भीड़ ने नुकसान पहुंचाया और न ही किसी भी मुस्लिम की इस प्रकार लिंचिंग की?
राजनीतिक अस्थिरता का शिकार केवल हिन्दू ही क्यों?
राजनीतिक अस्थिरता का शिकार केवल हिन्दू और हिन्दू धार्मिक स्थल क्यों हो रहे हैं? यह बात न्यूयॉर्क टाइम्स भी नहीं पूछ सकता है! न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी पूरी रिपोर्ट में एक बार भी उन दुष्ट लोगों का नाम नहीं लिया है, जिन्होंने यह नृशंस कृत्य किया है। यह विदेशी और औपनिवेशिक मानसिकता वाली मीडिया का दोहरा रवैया है, और भारत के प्रति अथाह घृणा से भरा हुआ दृष्टिकोण है, जो हर मौके पर परिलक्षित होता रहता है।

















