म्यांमार की सैन्य जुन्टा अब चुनाव की तैयारी कर रहा है। यह चुनाव 28 दिसंबर 2025 से शुरू हो रहा है, जो 2021 के कूप के बाद पहला बड़ा वोट है। लेकिन ज्यादातर लोग और विशेषज्ञ इसे असली लोकतंत्र की तरफ कदम नहीं मान रहे। बल्कि ये ऐसा वोट लगता है जिससे जुन्टा अपनी सत्ता को वैध ठहराना चाहता है।
पृष्ठभूमि क्या है
फरवरी 2021 में म्यांमार की सेना ने चुनी हुई सरकार को हटा दिया था। उस समय आंग सान सू की की पार्टी NLD ने 2020 के चुनाव में बड़ी जीत हासिल की थी। कूप के बाद आंग सान सू की जेल में हैं, NLD को भंग कर दिया गया है क्योंकि वो जुन्टा के नए चुनाव नियमों को मानने से इनकार कर दिया। कूप के बाद से विरोध शुरू हुआ, जिसमें पीपल्स डिफेंस फोर्स और एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स शामिल हुए। अब देश का करीब एक तिहाई हिस्सा विद्रोहियों या विवादित इलाकों में है। सेना ने वहां से काफी इलाके खो दिए हैं।
हाल की स्थिति और हिंसा
2025 में हालात और खराब हुए हैं। ACLED के मुताबिक जनवरी से नवंबर तक मिलिट्री के एयर और ड्रोन हमले 2024 से 30% ज्यादा हुए। स्कूल, अस्पताल जैसी सिविल जगहों पर भी हमले हो रहे हैं। दिसंबर में राखीन स्टेट के एक अस्पताल पर हमले में दर्जनों लोग मारे गए, जहां ज्यादातर इलाका अराकान आर्मी के कंट्रोल में है। मिलिट्री अब जबरन भर्ती कर रही है – सड़कों, घरों से लोगों को उठाकर आर्मी में डाल रही है। 2025 में ऐसी घटनाएं 26% बढ़ीं। यंग लोग यांगून जैसे शहरों से भाग रहे हैं ताकि कंसक्रिप्शन से बच सकें।
चुनाव कैसे हो रहा है
यह चुनाव तीन फेज में है, पहला 28 दिसंबर से। जुन्टा का कहना है कि ये लोगों के लिए है, इंटरनेशनल कम्युनिटी के लिए नहीं। जुन्टा सरकार के प्रवक्ता जॉ मिन टुन ने कहा, “यह चुनाव म्यांमार के लोगों के लिए हो रहा है, न कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए।” लेकिन नया इलेक्शन प्रोटेक्शन लॉ आ गया है, जिसमें चुनाव या मिलिट्री की आलोचना करने पर कम से कम 3 साल की जेल या मौत की सजा हो सकती है। जुलाई 2025 से अब तक 200 से ज्यादा लोग ऐसे ही गिरफ्तार हो चुके हैं, सोशल मीडिया पर लाइक करने वालों तक को पकड़ा गया। यांगून में घर-घर जाकर लोगों को वोट देने के लिए कहा जा रहा है।
पार्टियां और विकल्प
कुल 57 पार्टियां चुनाव में हैं, लेकिन ज्यादातर सेना से ही जुड़ी हुई हैं। सिर्फ 6 पार्टियां पूरे देश में लड़ रही हैं, और सबसे बड़ी है जुन्टा की पार्टी है यूनियन सॉलिडैरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी (USDP)। कई इलाकों में वो बिना मुकाबले जीत रही है। 2020 में 57% पार्टियां जो 70% से ज्यादा वोट और 90% सीट्स वाली थीं, अब नहीं हैं। एथनिक पार्टियां भी भंग कर दी गई हैं।
कहां वोट नहीं हो रहा
330 टाउनशिप में से 56 में और हजारों वार्ड्स में वोटिंग नहीं हो रही, जो देश का करीब एक तिहाई हिस्सा है। ये इलाके ज्यादातर कंफ्लिक्ट जोन या विरोधियों के कंट्रोल में हैं।
पश्चिमी सरकारें इसे फर्जी बता रहीं
वेस्टर्न सरकारें और UN इसे फर्जी मान रहे हैं। लेकिन चीन, जो जुन्टा का सबसे बड़ा साथी है, इसे सपोर्ट कर रहा है। चीन ने कुछ विद्रोही ग्रुप्स को सप्लाई रोककर मिलिट्री की मदद की, जिससे कुछ इलाके वापस मिले। एक एक्सपर्ट रिचर्ड होरसे का कहना है कि चुनाव के बाद मिलिट्री और इलाके वापस लेने की कोशिश करेगी। प्रो-डेमोक्रेसी एक्टिविस्ट खिन ओहमार कहती हैं कि ये चुनाव लोगों के लिए नहीं, खुद जुन्टा के लिए है।















