पटियाला। एक वाट्सएप ग्रुप के जरिए आनलाइन फ्रॉड में फंसे पंजाब पुलिस के पूर्व आईजी अमर सिंह ने खुद को गोली मार कर आत्महत्या का प्रयास किया। पटियाला के अर्बन स्टेट इलाके में रहने वाले अमर सिंह चहल साइबर ठगों के जाल में फंसे थे। उन्होंने डीजीपी गौरव यादव के नाम 12 पन्नों का सुसाइड नोट लिखा है, जिसमें इसका जिक्र है।
पूर्व आईजी ने साफ लिखा कि वे डीबीएस वेल्थ इक्विटी रिसर्च ग्रुप के चक्कर में फंस गए। वे वाट्सएप ग्रुप के जरिए वेल्थ मैनेजमेंट सिखाने के बहाने फंसे। इस चक्कर में उन्होंने 8.10 करोड़ रुपये फंसा लिए। उन्होंने सुसाइड नोट में आरोपियों को सख्त सजा देने की मांग की है। गोली लगने के बाद उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। आईजी चहल ने अपने गनमैन के सरकारी हथियार से खुद को गोली मारी है। इसकी जानकारी भी उन्होंने अपने सुसाइड नोट में दी।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की गई। पुलिस को घटनास्थल से एक नोट भी बरामद हुआ है, जिसकी गंभीरता से जांच की जा रही है। एसपी सिटी पलविंदर सिंह चीमा ने बताया कि पूर्व आईजी को गोली लगने की सूचना पुलिस को मिली थी, जिसके बाद तुरंत कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि मामले को संदिग्ध परिस्थितियों के रूप में देखा जा रहा है और अभी किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
घटनास्थल से हथियार बरामद
पुलिस सूत्रों के मुताबिक घटनास्थल से हथियार बरामद कर लिया गया है और फोरेंसिक टीम ने मौके से जरूरी सबूत एकत्र किए हैं। घर में मौजूद लोगों और परिजनों से भी पूछताछ की जा रही है, ताकि घटना के समय की परिस्थितियों को स्पष्ट किया जा सके।
जानें पन्नों में क्या लिखा पूर्व आईजी ने
पूर्व आईजी ने अपने सुसाइड नोट की शुरुआत अर्जेंट आखिरी अपील लिख कर की। उन्होंने डीजीपी पंजाब गौरव यादव को लिखा- साइबर अपराधियों द्वारा की गई धोखाधड़ी और ठगी, जो खुद को व्हाट्सऐप और टेलीग्राम पर वेल्थ मैनेजमेंट और वेल्थ एडवाइजर्स”बताकर निवेश सलाह देने वाले दिखा रहे थे। बहुत दुख, पीड़ा और मायूसी के साथ यह बताना पड़ रहा है कि इन साइबर ठगों ने लगभग 8.10 करोड़ रुपये निवेश के नाम पर ले लिए। मैंने पैसे लगाते समय पूरी सावधानी नहीं बरती, जिसका अब अफसोस है। इस ग्रुप को व्हाट्सऐप और टेलीग्राम पर बहुत एक्टिव देखा। ये लोग दावा करते थे कि वे प्रतिष्ठित ग्रुप का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो सरकार द्वारा अधिकृत है और छोटे निवेशकों को कैपिटल मार्केट से अच्छा मुनाफा कमाने में मदद करता है। अब लग रहा है कि ये सब दावे सिर्फ “डैशबोर्ड पर्पज”(दिखावे) के लिए थे, यानी दिखाने के लिए झूठी प्रोफाइल और फर्जी दावे किए गए।
पैसा रिकवर हो तो परिवार को दें
अन्य पन्ने में पूर्व आईजी लिखते हैं कि यदि किसी भी आरोपी को पकड़ा जाए और जो भी रकम रिकवर हो, तो उसका कुछ हिस्सा उनके परिवार को दिया जाए, ताकि वे उधार ली गई रकम लोगों को वापस कर सकें। वह खुद आम लोगों को ठगों से सावधान रहने की सलाह देते रहे, लेकिन खुद ही इनकी जालसाजी का शिकार हो गए। उनकी बेहद चालाक/संगठित ठगी की तरकीबों के आगे वे असहाय हो गए और कोई रास्ता न बचने पर यह कदम उठाया खास तौर पर लाल पैन से उन्होंने लिखा- एंडिंग लाइफ।
नोट में उन्होंने जानकारी दी कि उन्होंने अपने गनमैन रणजीत सिंह की राइफल का इस्तेमाल किया है, जो इस मामले में बिल्कुल दोषी नहीं है। क्योंकि उनके पास अपना निजी हथियार नहीं था, इसलिए वे यह राइफल रात में अलमारी में अपने पास घर पर रखते थे। वे लिखते हैं कि यदि अगला जन्म हो तो वे फिर पुलिस अधिकारी बनना चाहेंगे।

















