बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि उनके जाने के बाद देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति और बिगड़ गई है। एक ईमेल इंटरव्यू में हसीना ने हाल की हिंसा की घटनाओं का जिक्र करते हुए यूनुस सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि ऐसी घटनाएं न सिर्फ बांग्लादेश को अंदर से कमजोर कर रही हैं, बल्कि पड़ोसी देशों से रिश्तों को भी खराब कर रही हैं।
भारत विरोधी उस्मान हादी की हत्या के बाद बवाल
हसीना की ये टिप्पणियां कथित छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद आईं। हादी 2024 के जुलाई माह में हुए कथित आंदोलन से जुड़ा था। वह इंकलाब मंच का प्रवक्ता था। साथ ही वो ढाका-8 सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने की तैयारी में था। 12 दिसंबर को ढाका के बिजॉयनगर इलाके में हादी पर अज्ञात हमलावरों ने गोली चलाई। सिर में गोली लगने से वो घायल हो गया। उसे सिंगापुर ले जाया गया। वहां उसकी मौत हो गई। हसीना ने कहा कि ये हत्या उस कानूनहीनता को दिखाती है जो उनकी सरकार को उखाड़ फेंकने के बाद और बढ़ गई है। उन्होंने यूनुस सरकार पर आरोप लगाया कि हिंसा अब आम हो गई है और सरकार या तो इसे रोक नहीं पा रही या रोकना नहीं चाहती।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल
हसीना ने एक हिंदू युवक की हत्या का भी जिक्र किया। मयमनसिंह जिले में 27 साल के दीपू चंद्र दास को कथित ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला और शव को आग लगा दी। इस घटना को लेकर पूर्व पीएम ने कहा कि यूनुस सरकार अल्पसंख्यकों की रक्षा करने में पूरी तरह नाकाम रही है। ऐसे हमले बेरोकटोक हो रहे हैं, जिससे धार्मिक अल्पसंख्यकों में डर का माहौल है। उनका मानना है कि ये घटनाएं पड़ोसी देशों, खासकर भारत के साथ रिश्तों को तनावपूर्ण बना रही हैं। हसीना के शब्दों में, “भारत ये अफरा-तफरी देख रहा है, अल्पसंख्यकों पर जुल्म देख रहा है और हमने जो साथ मिलकर बनाया था, उसका नुकसान देख रहा है।”
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भारत से रिश्तों पर क्या कहा
हसीना ने भारत-बांग्लादेश रिश्तों में आए तनाव की पूरी जिम्मेदारी यूनुस सरकार पर डाली। उनका कहना है कि अंतरिम सरकार भारत के खिलाफ दुश्मनों की तरह बयान देती है, अल्पसंख्यकों को बचाने में नाकाम रहती है और चरमपंथियों को विदेश नीति चलाने देती है। फिर हैरानी जताती है कि रिश्ते क्यों बिगड़ रहे हैं। हसीना ने याद दिलाया कि भारत दशकों से बांग्लादेश का सबसे भरोसेमंद दोस्त रहा है। दोनों देशों के रिश्ते गहरे और मजबूत हैं, जो किसी अस्थायी सरकार से प्रभावित नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय दूतावासों पर हमले, मीडिया ऑफिसों पर धावा और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार – ये सब चरमपंथी ताकतों की हिम्मत से हो रहे हैं, जिन्हें यूनुस सरकार ने खुली छूट दे रखी है। एक जिम्मेदार सरकार तो ऐसे गुंडों को सजा देती, लेकिन यहां उन्हें छूट मिली हुई है।
चरमपंथ पर चिंता
हसीना ने बांग्लादेश के सेक्युलर चरित्र पर खतरे की बात की। उनका आरोप है कि यूनुस ने कैबिनेट में चरमपंथियों को जगह दी, दोषी आतंकियों को जेल से रिहा किया और अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से जुड़े ग्रुपों को सार्वजनिक जीवन में आने दिया। यूनुस खुद राजनीतिज्ञ नहीं हैं और बड़े देश को चलाने का अनुभव नहीं है। हसीना को डर है कि चरमपंथी उनका इस्तेमाल कर रहे हैं। वह कहती हैं कि लाखों बांग्लादेशी आज भी उस सुरक्षित, सेक्युलर देश को याद करते हैं जो पहले था।
पाकिस्तान से नजदीकी पर टिप्पणी
विदेश नीति पर भी हसीना ने सवाल उठाए। उनका कहना है कि बांग्लादेश हमेशा से “सबके साथ दोस्ती, किसी से दुश्मनी नहीं” की नीति पर चला है। पाकिस्तान से अच्छे रिश्ते रखना ठीक है, लेकिन यूनुस का इतनी जल्दबाजी में आगे बढ़ना सही नहीं। पुराने दोस्तों से दूर होकर नए दोस्त ढूंढना उनकी हताशा लगती है। सबसे बड़ी बात ये कि यूनुस चुनी हुई सरकार नहीं हैं, इसलिए बड़े विदेश नीति फैसले लेने का हक नहीं है। ऐसे फैसले आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करेंगे। हसीना को यकीन है कि जब फिर से लोकतंत्र बहाल होगा, तो बांग्लादेश की विदेश नीति फिर से राष्ट्रीय हितों पर आधारित होगी।

















