ऑस्ट्रेलिया के अल मदीना दावा सेंटर के मौलवी वीसम हद्दाद ने एक अखबार को टेलीग्राम ऐप के जरिए एक बयान भेजकर दावा किया है कि बॉन्डी बीच में अंधाधुंध गोलियां दागकर अनेक निर्दोष लोगों की हत्या करने वाले जिहादी नवीद से उसका कोई संबंध नहीं है। उसने यह भी कहा कि इस प्रकार की बातें ‘अस्पष्ट और गुमराह करने वाली’ हैं। विसम हद्दाद अपने संदेश में लिखता है, “यह दावा अस्पष्ट और गुमराह करने वाला है। शब्द ‘फॉलोअर’ को समझाया नहीं गया है और यह सोशल मीडिया पर फॉलो करने जैसी छोटी सी बात भी हो सकती है, जिससे किसी तरह का समर्थन, प्रभाव या पर्सनल रिश्ता साबित नहीं होता।”
दरअसल बॉन्डी बीच जिहादी हमले के बाद आस्ट्रेलिया में यह चर्चा आम है कि हद्दाद ने यहूदी समुदाय के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिए थे, इसी मौलवी की तकरीरों ने नवीद में यहूदियों के विरुद्ध इतनी नफरत भर दी थी कि सागरतट पर हुनक्का फेस्टीवल मना रहे यहूदियों पर अपने अब्बा के साथ मिलकर उसने गोलियां बरसाई थीं।

कौन है हद्दाद
हद्दाद एक कट्टरपंथी मौलवी है जो मुख्य रूप से मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में सक्रिय है। उसका पूरा नाम अब्दुल्लाह वीसम हद्दाद बताया जाता है, हालांकि वह खुद को केवल ‘हद्दाद’ ही कहलवाता है। सऊदी अरब में जन्मा हद्दाद कुरान और हदीस की तकरीरों की आड़ में जिहादी सोच भरने वाली तकरीरें करता रहा है। जल्दी ही वह जिहादी सोच के मुस्लिम युवाओं में मशहूर हो गया। उन्हें हद्दाद का आक्रामक अंदाज भा गया और टेलीग्राम, यूट्यूब और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर उसके लाखों फॉलोअर्स हो गए। वह जिहाद, इस्लामिक इतिहास और पश्चिमी प्रभावों के मुद्दों पर खूब नफरती बातें करता रहा है।
बताते हैं, हद्दाद ने कई किताबें लिखी हैं, जैसे ‘इस्लाम के दुश्मन’ और ‘फितने का दौर’, जो कट्टरपंथी सोच से भरी हैं। इनमें हद्दाद की भाषा नफरत फैलाने वाली है। पिछले कुछ वर्ष से वह आस्ट्रेलिया के अल मदीना दावा सेंटर में रहता है। वहीं से अपनी गतिविधियां चलाता है।

आस्ट्रेलिया का अल मदीना दावा सेंटर इस्लामिक प्रचार करने में जुटी ऐसी संस्था है, जो सऊदी अरब के मदीना से प्रेरित होकर स्थापित की गई थी। 2015 में शुरू हुआ यह सेंटर दावा सेंटर दुनिया भर में तकरीरें, सेमिनार और ऑनलाइन कैंपेन चलाता है। सेंटर का दावा है कि यह ‘शुद्ध इस्लाम’ का प्रसार करता है, लेकिन जानकारों के अनुसार, यह सेंटर कट्टरपंथ को बढ़ावा देता है। हद्दाद यहां का खास मौलवी है।
सेंटर की तकरीरों में हद्दाद ने यहूदी समुदाय को निशाना बनाता रहा है। उसने तकरीरों में यहूदियों को ‘बुरे’, ‘शरारती’ और ‘धोखेबाज’ ही बताया है। हद्दाद ने अपने हममजहबियों से अपील भी की थी कि ‘इस्राएल पर थूकें’, जिसे उसने प्रतीकात्मक जिहाद बताया था। अल मदीना सेंटर इन तकरीरों को जायज ठहराता आया है। यह भी पता नहीं चलता कि सेंटर की फंडिंग का स्रोत क्या है, लेकिन कथित तौर पर खाड़ी देशों से आए चंदे पर यहां काम होता है। 2023 में, यूरोपीय संघ ने सेंटर पर नजर रखने की बात कही थी, क्योंकि इसकी सामग्री ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन को बढ़ावा दे रही थी।

ऑस्ट्रेलिया में अल मदीना दावा सेंटर पर उठे विवादों के बाद, सीनेटर जेम्स पैटरसन ने नफरत भरी तकरीरों के इस केन्द्र को बंद करने की मांग की थी। यह सेंटर बॉन्डी बीच हमले में शामिल नवीद अकरम से प्रॉपर्टी बताई जाती है जहां वह अक्सर आता-जाता था और हद्दाद को सुनता था। इस घटना के बाद यहूदी संगठन और मानवाधिकार समूह कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
हद्दाद और अल मदीना सेंटर का भारत, पाकिस्तान और यूरोप में उसके कट्टरपंथी मजहबियों पर काफी प्रभाव बताया जाता है। सेंटर की तकरीरें हिंदी, उर्दू और अरबी में उपलब्ध कराई जाती हैं।

















