केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने विजन आईएएस को UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा के रिजल्ट को लेकर भ्रामक विज्ञापनों के लिए 11 लाख रुपये का जुर्माना ठोका है। यह मामला 2022 और 2023 के UPSC रिजल्ट से जुड़ा है, जहां संस्थान ने सफल कैंडिडेट्स की संख्या बताई लेकिन यह नहीं बताया कि वे किस कोर्स में थे। CCPA का कहना है कि इससे स्टूडेंट्स को गलतफहमी होती है। यह ऑर्डर 18 दिसंबर 2025 को चीफ कमिश्नर निधि खारे और कमिश्नर अनुपम मिश्रा ने जारी किया।
क्या थे विजन आईएएस के दावे?
विजन आईएएस की ऑफिशियल वेबसाइट पर बड़े-बड़े क्लेम थे। CSE 2023 के लिए लिखा था – “टॉप 10 में 7 और टॉप 100 में 79 सिलेक्शन”। इसी तरह CSE 2022 के लिए “टॉप 50 में 39 सिलेक्शन”। इनके साथ सफल कैंडिडेट्स की फोटो और नाम भी लगाए गए थे। वेबसाइट पर फाउंडेशन कोर्स, क्लासरूम प्रोग्राम समेत कई कोर्स के ऐड चल रहे थे। इससे लगता था कि ये सभी टॉपर्स संस्थान के फुल कोर्स वाले स्टूडेंट्स हैं। लेकिन असल में कई तो सिर्फ टेस्ट सीरीज या छोटे प्रोग्राम में थे।
CCPA ने कैसे पकड़ा मामला?
CCPA ने खुद नोटिस लिया और 30 मई 2024 को शो-कॉज नोटिस भेजा। संस्थान से पूछा कि क्लेम के सबूत दो। विजन आईएएस ने 19 जून 2024 को जवाब दिया कि न्यूजपेपर ऐड में डिटेल्स थीं और वेबसाइट पर स्पेस की कमी थी। लेकिन CCPA को यह बहाना मंजूर नहीं हुआ। उन्होंने डिटेल जांच कराई। डायरेक्टर जनरल (इन्वेस्टिगेशन) की रिपोर्ट 14 अक्टूबर 2025 को आई, जिसमें बड़ा अंतर निकला।
जांच में क्या निकला?
CSE 2023 के टॉप 100 में से सिर्फ 17 कैंडिडेट्स ही संस्थान में एनरोल थे। CSE 2022 के क्लेम में भी गैप था। कुछ कैंडिडेट्स जैसे मेधा आनंद (रैंक 13, 2023) और कृतिका मिश्रा (रैंक 66, 2022) को स्टूडेंट बताया गया, लेकिन उनके एनरोलमेंट का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। संस्थान एनरोलमेंट फॉर्म और कैंडिडेट्स की कंसेंट भी नहीं दे पाया कि उनकी फोटो-नाम इस्तेमाल करने की परमिशन थी। विजन आईएएस ने बाद में कहा कि ये कैंडिडेट्स टेस्ट सीरीज में थे, लेकिन सबूत नहीं दिए।
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क्यों माना गया भ्रामक?
CCPA के मुताबिक, कोचिंग के ऐड में कोर्स का नाम, ड्यूरेशन और फीस बताना बहुत जरूरी है। इससे स्टूडेंट्स सही फैसला ले सकते हैं कि कौन सा कोर्स उनके लिए सही है। वेबसाइट पर स्पेस की कमी का बहाना नहीं चलेगा, क्योंकि ऑनलाइन ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी होती है। CCPA ने इसे जानबूझकर छुपाने की कोशिश माना। यह कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 की सेक्शन 2(28) के तहत भ्रामक ऐड है। पहले जनवरी 2025 में भी विजन आईएएस पर इसी तरह का केस हुआ था, इसलिए इसे “दोबारा उल्लंघन” माना गया।
क्या आदेश दिए गए?
विजन आईएएस को 11 लाख जुर्माना भरने को कहा गया। आगे भ्रामक ऐड नहीं करने और पूरी सच्ची जानकारी देने का ऑर्डर दिया। कंप्लायंस रिपोर्ट 15 दिनों में जमा करनी है।

















