"इंडिया-बांग्लादेश रिलेशंस: द वे फॉरवर्ड": अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले और भारत की कूटनीतिक चिंता
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“इंडिया-बांग्लादेश रिलेशंस: द वे फॉरवर्ड”: अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमले और भारत की कूटनीतिक चिंता

शशि थरूर की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति की रिपोर्ट में बांग्लादेश के राजनीतिक बदलाव को भारत के लिए 1971 के बाद सबसे बड़ी चुनौती बताया गया। अल्पसंख्यक सुरक्षा, चीन की दखल, सीमा मुद्दे और आर्थिक संबंधों पर विस्तृत सुझाव। दिसंबर 2025 की प्रमुख रिपोर्ट।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Dec 20, 2025, 12:52 pm IST
in भारत
Parliament Winter Session

Parliament Winter Session

कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने दिसंबर 2025 में अपनी नौवीं रिपोर्ट पेश की है। रिपोर्ट का नाम है “इंडिया-बांग्लादेश रिलेशंस: द वे फॉरवर्ड”। इसमें अगस्त 2024 के बाद बांग्लादेश में हुए राजनीतिक बदलावों को भारत के लिए 1971 के बाद सबसे बड़ी रणनीतिक, सुरक्षा और कूटनीतिक चुनौती बताया गया है। समिति ने विदेश मंत्रालय से कई ब्रीफिंग लीं, जिसमें विदेश सचिव से भी बातचीत हुई। रिपोर्ट में सलाह दी गई है कि भारत को लगातार बातचीत रखनी चाहिए, सटीक संदेश देना चाहिए और संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाना चाहिए।

अल्पसंख्यकों पर हमले की चिंता

रिपोर्ट में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को बड़ा मुद्दा बनाया गया है। अगस्त 2024 के बाद राजनीतिक अस्थिरता और सामाजिक उथल-पुथल के बीच अल्पसंख्यकों और उनके धार्मिक स्थलों पर हमले बढ़े हैं। आंकड़ों के मुताबिक, मई 2025 तक ऐसी 2,446 घटनाएं दर्ज हुईं। भारत ने इस मुद्दे को ऊंचे स्तर पर उठाया, लेकिन बांग्लादेश की तरफ से इन्हें “सांप्रदायिक हिंसा” की बजाय “राजनीतिक हत्याएं” बताया गया। समिति का कहना है कि कूटनीति में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए और दोषियों पर जल्द कार्रवाई की मांग करनी चाहिए।

चीन की बढ़ती दखलंदाजी

समिति ने बांग्लादेश में चीन की बढ़ती मौजूदगी पर भी गंभीर चिंता जताई है। उदाहरण के तौर पर मोंगला पोर्ट का विस्तार और लालमोनिरहाट एयर बेस का जिक्र किया गया, जो भारतीय सीमा के करीब है। चीन की मदद से कुछ प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जो भारत के लिए रणनीतिक खतरा बन सकते हैं। भारत ने इसका जवाब खुलना-मोंगला रेल लाइन जैसे प्रोजेक्ट और चटगांव व मोंगला पोर्ट तक पहुंच देकर दिया है। रिपोर्ट सुझाती है कि विदेशी ताकतों को बांग्लादेश में सैन्य ठिकाना बनाने से रोकने के लिए निगरानी रखें और भारत खुद को बेहतर विकास साझेदार के रूप में पेश करे। कुछ स्रोतों में पाकिस्तान की भूमिका का भी उल्लेख है, लेकिन मुख्य फोकस चीन पर है।

सीमा सुरक्षा के मुद्दे

भारत-बांग्लादेश सीमा 4,096 किलोमीटर लंबी है, जो पांच राज्यों से गुजरती है और मुश्किल इलाकों में फैली है। इसमें से 3,231 किलोमीटर पर बाड़ लग चुकी है, लेकिन 864 किलोमीटर अभी खुले हैं। समस्याएं हैं अवैध घुसपैठ, तस्करी, उग्रवाद और सीमा पार अपराध। सीमा इलाकों में गरीबी और कमजोर अर्थव्यवस्था इन मुद्दों को बढ़ाती है। समिति ने सलाह दी है कि बाड़ लगाने की रफ्तार बढ़ाएं, जमीन अधिग्रहण के झगड़ों को सुलझाएं और आधुनिक तकनीक जैसे फ्लोटिंग बाड़, लेजर निगरानी और स्मार्ट सेंसर इस्तेमाल करें। बीएसएफ और बीजीबी के बीच बातचीत और जॉइंट टास्क फोर्स को मजबूत करने की बात कही गई है।

इसे भी पढ़ें: Mir Yar Baloch ने X पर की PM Modi को सर्वोच्च Baloch सम्मान ‘बलूच दस्तार’ से सम्मानित करने की घोषणा

व्यापार और आर्थिक संबंध

दोनों देशों के बीच व्यापार 2024-25 में 13.46 अरब डॉलर तक पहुंच गया। बांग्लादेश दक्षिण एशिया में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक पार्टनर है। लेकिन चुनौतियां हैं – इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, टैरिफ, नॉन-टैरिफ बैरियर और लैंड पोर्ट पर जाम। भारत ने बांग्लादेश को कनेक्टिविटी, बिजली और इंफ्रा के लिए 10 अरब डॉलर की मदद का वादा किया है, लेकिन कुछ परियोजनाओं में भी देरी हो रही है। 2026 में बांग्लादेश एलडीसी स्टेटस से बाहर हो जाएगा, इसलिए सीईपीए समझौता जल्द पूरा करने की जरूरत है। पानी बंटवारे में 54 साझा नदियां हैं, गंगा संधि 2026 में खत्म हो रही है और तीस्ता जैसे मुद्दे अनसुलझे हैं।

1971 की विरासत और लोगों के रिश्ते

रिपोर्ट में 1971 के मुक्ति संग्राम को दोनों देशों के रिश्तों की नैतिक आधारशिला बताया गया है। लेकिन बांग्लादेश की नई पीढ़ी में भारत की भूमिका के बारे में जागरूकता कम हो रही है और कुछ संशोधनवादी विचार उभर रहे हैं। सलाह है कि सांस्कृतिक कार्यक्रम, शिक्षा आदान-प्रदान और लोगों के संपर्क बढ़ाकर इस विरासत को जिंदा रखें। वीजा सेवाएं अगस्त 2024 के बाद कम हुईं, लेकिन सुरक्षा के आधार पर धीरे-धीरे सामान्य करने की बात कही गई है। शेख हसीना को भारत में शरण देने को मानवीय बताया गया है।

Topics: संसदीय रिपोर्ट 2025अल्पसंख्यक हमले बांग्लादेशचीन दखल बांग्लादेशसीमा सुरक्षा भारत बांग्लादेशशेख हसीनातीस्ता जल विवादSheikh HasinaParliamentary report 2025Shashi Tharoorattacks on minorities in Bangladeshशशि थरूरChinese interference in Bangladeshभारत-बांग्लादेश संबंधTeesta water disputeIndia-Bangladesh RelationsIndia-Bangladesh border security
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कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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