कट्टरपंथ की आग में जलता बांग्लादेश! निशाने पर मीडिया, हिंदू और नेता, मानवाधिकार संगठनों की चुप्पी पर भी उठे सवाल?
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कट्टरपंथ की आग में जलता बांग्लादेश! निशाने पर मीडिया, हिंदू और नेता, मानवाधिकार संगठनों की चुप्पी पर भी उठे सवाल?

बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा बेकाबू— अवामी लीग कार्यालय ध्वस्त, डेली स्टार पर हमला, पत्रकार की हत्या और हिंदू अल्पसंख्यकों पर बढ़ता खतरा। हालात देश की स्थिरता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

Written byShivam DixitShivam Dixit — edited by Shivam Dixit
Dec 19, 2025, 07:29 pm IST
in विश्व

बांग्लादेश राजनीतिक हिंसा एक बार फिर देश की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। राजशाही से लेकर राजधानी ढाका तक हालात तेजी से बिगड़े हैं। अवामी लीग कार्यालय पर हमला और नेताओं के घरों में आगजनी ने यह साफ कर दिया है कि देश में कानून-व्यवस्था कमजोर होती जा रही है। उग्र भीड़ द्वारा खुलेआम की गई तोड़फोड़ और आगजनी से आम जनता में भय का माहौल है।

राजशाही में अवामी लीग का दफ्तर ध्वस्त

राजशाही शहर में अवामी लीग महानगर कार्यालय को उग्रपंथियों ने पूरी तरह ढहा दिया। यह हमला उस समय हुआ जब इंकलाब मंच के आयोजक शरीफ उस्मान हादी की मौत की खबर फैली। देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए और खुद को छात्र व आम नागरिक बताने वाले समूह सड़कों पर उतर आए।

कट्टरपंथी संगठनों और छात्र गुटों की खुली भागीदारी

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार- जमात समर्थित छात्रशिबिर और अन्य कट्टरपंथी गुट राजशाही विश्वविद्यालय क्षेत्र से जुलूस निकालते हुए शहर में दाखिल हुए। बाद में नेशनल सिटिजन पार्टी के नेता और कार्यकर्ता भी उनसे जुड़ गए। मदरसा छात्रों के समूह लाठी-डंडों के साथ सड़कों पर दिखाई दिए, जिसने हालात को और भयावह बना दिया।

पहले भी हो चुका है हमला

बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब इस (अवामी लीग महानगर) कार्यालय को निशाना बनाया गया हो। पिछले साल अवामी लीग सरकार के पतन के बाद भी 5 अगस्त को इसी दफ्तर में आगजनी और भारी तोड़फोड़ की गई थी। लगातार हो रहे हमले यह संकेत देते हैं कि राजनीतिक असहिष्णुता अब हिंसक रूप ले चुकी है।

बंदरबान में पूर्व मंत्री के घर पर हमला

वहीं राजशाही के अलावा पहाड़ी जिला बंदरबान में भी हालात तनावपूर्ण रहे। राजारमाठ इलाके में इस्लामिक उग्रपंथियों ने पूर्व मंत्री बीर बहादुर उशैसिंह के घर में तोड़फोड़ कर आग लगा दी। घटना की सूचना मिलते ही सेना, पुलिस और फायर सर्विस को मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभालना पड़ा।

मीडिया की आवाज दबाने की कोशिश

बता दें कि ढाका हिंसा ने सिर्फ सरकारी और राजनीतिक इमारतों को नहीं जलाया, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता पर भी सीधा हमला किया। डेली स्टार के फोटो पत्रकार प्रवीर दास की तस्वीरें वायरल हुईं, जिसमें वे फूट-फूट कर रोते नजर आए।

डेली स्टार दफ्तर पर हमला

बता दें कि डेली स्टार कार्यालय पूरी तरह आग की चपेट में आ गया। चार से छह मंजिल तक सब कुछ जल गया। एक भी ड्रॉअर सुरक्षित नहीं बचा। यह हमला केवल संपत्ति पर नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार था।

राख में तब्दील एक फोटो पत्रकार की कमाई

वहीं प्रवीर दास ने भावुक होकर बताया कि उनके लिए कैमरा केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि उनकी पहचान था। आग में उनके कैमरे, लेंस और वर्षों की मेहनत से संजोई गई हार्ड ड्राइव जलकर खाक हो गईं। उन्होंने कहा कि एक फोटो पत्रकार के ड्रॉअर में कम से कम 25 से 30 लाख रुपये का सामान होता है, जो एक ही रात में नष्ट हो गया।

आग में फंसी पत्रकार जाइमा इस्लाम की आपबीती

डेली स्टार कार्यालय में जब आग लगी, उस समय पत्रकार जाइमा इस्लाम दफ्तर में मौजूद थीं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि चारों तरफ धुआं है और उनका दम घुट रहा है। इस घटना से समझ लें कि पत्रकारों की सुरक्षा बांग्लादेश में किस हद तक खतरे में है।

एक के बाद एक हमला

बता दें उग्र कट्टरपंथी भीड़ ने पहले प्रथोम आलो और फिर डेली स्टार के दफ्तर पर हमला किया। टेबल, कुर्सी, टीवी, कंप्यूटर सब तोड़ दिए गए और अंत में आग लगा दी गई। इसके चलते दोनों अखबारों का मुद्रित संस्करण प्रकाशित नहीं हो सका।

नाम का आश्वासन, लेकिन सवाल बरकरार..?

इस घटना के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने कथित तौर पर दोनों अखबारों के साथ खड़े होने का भरोसा दिया है। संपादकों से बातचीत कर संवेदना जताई गई, लेकिन मानवाधिकार उल्लंघन और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर सवाल अब भी कायम हैं।

पत्रकार की हत्या

वहीं ढाका की हिंसा के बीच खुलना से एक और दर्दनाक खबर सामने आई। जिसमे कुछ चरमपंथी बदमाशों ने एक पत्रकार की गोली मारकर हत्या कर दी। मृतक की पहचान इमदादुल हक मिलन के रूप में हुई, जो शलुआ प्रेस क्लब के अध्यक्ष थे।

चाय की दुकान पर बरसाई गई गोलियां

पुलिस के अनुसार, यह वारदात आड़ंगघाटा थाना क्षेत्र में हुई। पत्रकार मिलन और पशु चिकित्सक देवाशीष विश्वास चाय की दुकान पर बैठे थे, तभी हमलावरों ने गोलियां चला दीं। मिलन की मौके पर मौत हो गई, जबकि देवाशीष की हालत गंभीर बनी हुई है।

अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर बढ़ता खतरा

इन घटनाओं के बीच बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक उथल-पुथल के दौरान अक्सर हिंदू मंदिरों, घरों और व्यवसायों को निशाना बनाया जाता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर इन घटनाओं को अपेक्षित गंभीरता नहीं मिलती।

कट्टरपंथ का बढ़ता प्रभाव

बांग्लादेश में लगातार हो रही मजहबी हिंसक घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि बांग्लादेश में कट्टरपंथ तेजी से मजबूत हो रहा है। वहीं राजनीतिक दलों, मीडिया और अल्पसंख्यकों पर हमले यह दर्शाते हैं कि बांग्लादेश में किस तरह मजहबी कट्टरपंथ के सामने लोकतांत्रिक मूल्य कमजोर पड़ रहे हैं।

मानवाधिकार संगठनों की चुप्पी पर सवाल

वहीं पत्रकारों की हत्या, मीडिया दफ्तरों पर हमले और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के बावजूद वैश्विक तौर पर मानवाधिकार संगठन अपेक्षाकृत शांत नजर आ रहे हैं। यह चुप्पी भी अपने आप में कई सवाल खड़े करती है।

अस्थिरता की ओर बढ़ता बांग्लादेश

बढ़ती हिंसा, असुरक्षित पत्रकार, डरे हुए राजनेता और हाशिये पर जाता हिंदू समुदाय— ये सभी संकेत देते हैं कि बांग्लादेश एक गंभीर मोड़ पर खड़ा है। अगर समय रहते कट्टरपंथ और हिंसा पर लगाम नहीं लगी, तो इसका असर केवल बांग्लादेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित करेगा।

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Shivam Dixit
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अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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