सोनिया गांधी के पास नेहरू के 51 बक्से: सरकार बोली – वापस करें, राष्ट्र जानने का हकदार है
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सोनिया गांधी के पास नेहरू के 51 बक्से: सरकार बोली – वापस करें, राष्ट्र जानने का हकदार है

नेहरू के निजी पत्र और नोट्स वाले 51 बक्से 2008 से सोनिया गांधी के पास। केंद्र सरकार ने उन्हें सार्वजनिक अभिलेखागार में रखने की मांग की है। जानें विवाद के सभी पहलू और ऐतिहासिक दस्तावेजों का महत्व।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Dec 18, 2025, 08:05 am IST
inभारत
सोनिया गांधी

सोनिया गांधी

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से जुड़े कुछ पुराने दस्तावेजों को लेकर सरकार और कांग्रेस के बीच फिर बहस छिड़ गई है। मामला है 51 बक्सों का, जिनमें नेहरू के निजी पत्र और नोट्स हैं। सरकार का कहना है कि ये दस्तावेज सोनिया गांधी के पास हैं और इन्हें वापस लौटाया जाना चाहिए, क्योंकि ये किसी की निजी संपत्ति नहीं हैं। सरकार का कहना है कि देश को नेहरू से जुड़े दस्तावेजों को जानने का हक है।

क्या है पूरा मामला

ये दस्तावेज 2008 में सोनिया गांधी की तरफ से अनुरोध करने पर प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (पीएमएमएल, पहले नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी) से ले लिए गए थे। उस समय सोनिया गांधी के प्रतिनिधि ने लिखित में कहा था कि ये नेहरू के निजी पारिवारिक पत्र और नोट्स हैं, जिन्हें वापस लिया जा रहा है। इसके बाद 51 बक्से उन्हें सौंप दिए गए। पीएमएमएल में इनके रिकॉर्ड अभी भी मौजूद हैं।

सरकार ने क्या कहा

केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने एक्स पर पोस्ट करके साफ किया कि ये दस्तावेज “लापता” नहीं हैं, क्योंकि उनका पता तो मालूम है – वो गांधी परिवार के पास हैं। मंत्री ने कहा कि ये भारत के पहले प्रधानमंत्री से जुड़े महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभिलेख हैं, जो सार्वजनिक जगह पर रखे जाने चाहिए, न कि किसी बंद कमरे में। विद्वान, शोधकर्ता, छात्र और आम लोग इन तक पहुंच के हकदार हैं, ताकि नेहरू के जीवन और उनके समय को सही तरीके से समझा जा सके।

शेखावत ने पूछा कि इतने साल बीत जाने के बाद भी ये क्यों वापस नहीं किए गए। पीएमएमएल ने 2025 में जनवरी और जुलाई में सोनिया गांधी को पत्र लिखकर इनकी वापसी मांगी थी, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया। मंत्री ने आदर से सोनिया गांधी से सवाल किया कि आखिर क्या छिपाया जा रहा है और वापस न करने के तर्क क्या हैं।

इसे भी पढ़ें: हिम्मत देखिए! सदन में हथेली में छिपाकर ई-सिगरेट पी रहे थे कीर्ति आजाद, BJP ने वीडियो जारी कर TMC को घेरा

संसद में क्या हुआ

बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने लोकसभा में सवाल पूछा था कि क्या 2025 के वार्षिक निरीक्षण में नेहरू से जुड़े कोई दस्तावेज गायब पाए गए। मंत्री शेखावत ने लिखित जवाब में कहा कि नहीं, कोई दस्तावेज गायब नहीं है। कांग्रेस ने इसे आधार बनाकर सरकार से माफी मांगने की बात कही, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया कि गायब नहीं हैं, बल्कि 2008 में ही ले लिए गए थे।

क्यों महत्वपूर्ण हैं ये दस्तावेज

ये पत्र नेहरू के विभिन्न लोगों से लिखे-पढ़े संवाद हैं, जैसे जयप्रकाश नारायण, एडविना माउंटबेटन, अल्बर्ट आइंस्टीन, अरुणा असफ अली, विजया लक्ष्मी पंडित और जगजीवन राम जैसे नामों से। इनसे नेहरू के राजनीतिक विचार, कूटनीति और निजी जीवन की झलक मिलती है। सरकार का मानना है कि ऐसे ऐतिहासिक कागजात सार्वजनिक अभिलेखागार में होने चाहिए, ताकि इतिहास को तथ्यों के आधार पर समझा जा सके।

पुराना विवाद

ये मुद्दा भाजपा और कांग्रेस के बीच पहले भी गरमाता रहा है। पीएमएमएल में कुछ लोग लंबे समय से इन दस्तावेजों की वापसी की मांग कर रहे हैं। जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड, जो सोनिया गांधी की अध्यक्षता में चलता है, ने हाल में नेहरू का डिजिटल आर्काइव लॉन्च किया है, लेकिन ये पुराने बक्से अलग हैं। ये पूरा मामला पारदर्शिता और इतिहास की पहुंच से जुड़ा है। सरकार बार-बार पत्र लिख रही है, लेकिन दस्तावेज अभी भी वापस नहीं आए।

 

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कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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