अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50% तक टैरिफ लगाकर भारतीय सामान को महंगा बनाने की कोशिश की थी। यह टैरिफ 27 अगस्त 2025 से लागू हुआ, ताकि भारत का निर्यात कम हो जाए। शुरुआत में सितंबर और अक्टूबर में इसका असर दिखा और निर्यात में गिरावट आई। लेकिन नवंबर आते-आते हालात बदल गए। भारतीय उत्पादों की मांग इतनी मजबूत रही कि अमेरिकी खरीदार ज्यादा टैक्स देकर भी भारतीय सामान लेते रहे। नतीजा यह हुआ कि नवंबर 2025 में भारत का अमेरिका को निर्यात पिछले साल के मुकाबले 22% बढ़कर 6.98 अरब डॉलर पहुंच गया। नवंबर 2024 में यह आंकड़ा सिर्फ 5.70 अरब डॉलर था।
अमेरिका में 50% टैरिफ का असर उल्टा पड़ा
ट्रंप की इस नीति का मकसद भारतीय कारोबार को नुकसान पहुंचाना था, लेकिन नवंबर के आंकड़े बताते हैं कि यह प्लान कामयाब नहीं हुआ। खासकर इंजीनियरिंग गुड्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल जैसे सेक्टर में अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान की डिमांड बहुत ज्यादा है। अमेरिकी कंपनियां और कंज्यूमर ज्यादा कीमत चुकाकर भी यही सामान चुन रहे हैं। वाणिज्य मंत्रालय के डेटा के मुताबिक, अप्रैल से नवंबर 2025 तक अमेरिका को कुल निर्यात 11.38% बढ़कर 59.04 अरब डॉलर हो गया। वहीं अमेरिका से भारत का आयात 13.49% बढ़कर 35.4 अरब डॉलर रहा।
निर्यात में 10 साल का रिकॉर्ड टूटा
न सिर्फ अमेरिका, बल्कि भारत का कुल वस्तु निर्यात (सभी देशों को मिलाकर) नवंबर 2025 में 19.38% बढ़कर 38.13 अरब डॉलर हो गया। यह पिछले 10 साल के नवंबर महीने का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। पहले कभी नवंबर में 38 अरब डॉलर का निर्यात नहीं हुआ था। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि टैरिफ के बावजूद नवंबर शानदार रहा। सितंबर-अक्टूबर के नुकसान की भरपाई हो गई और नया रिकॉर्ड बन गया। उन्होंने बताया कि भारत पर लगे शुल्क दूसरे देशों के मुकाबले 30% ज्यादा हैं, फिर भी निर्यात बढ़ा है।
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व्यापार घाटा भी कम हुआ
निर्यात बढ़ने और आयात घटने से भारत का व्यापार घाटा भी कम हो गया। अक्टूबर 2025 में यह रिकॉर्ड 41.68 अरब डॉलर था, लेकिन नवंबर में घटकर 24.53 अरब डॉलर रह गया। वजह यह रही कि सोने और कच्चे तेल जैसे बड़े आयात आइटम्स में कटौती हुई। कुल आयात नवंबर में घटा, जबकि निर्यात में अच्छी बढ़ोतरी आई। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत मिली और व्यापार बैलेंस बेहतर हुआ।














